राष्ट्रपति की ब्रज में ऐतिहासिक गोवर्धन यात्रा: अभेद सुरक्षा के बीच नंगे पैर चलीं द्रौपदी मुर्मू, ‘राधे राधे’ से गूंजा मार्ग
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ब्रज में गोवर्धन परिक्रमा कर इतिहास रचा। अभेद सुरक्षा के बीच उन्होंने नंगे पांव परिक्रमा की, गिरिराजजी का अभिषेक किया और ...और पढ़ें
HighLights
राष्ट्रपति मुर्मू ने नंगे पांव की गोवर्धन परिक्रमा
अभेद्य सुरक्षा में आस्था का अद्भुत प्रवाह दिखा
ब्रज के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज हुआ
रसिक शर्मा, जागरण, गोवर्धन (मथुरा)। जब ब्रज की पावन धरा पर श्रद्धा अपने उत्कर्ष पर होती है, तब इतिहास केवल लिखा नहीं जाता, वह स्वयं साकार हो उठता है। शनिवार को ऐसा ही अलौकिक और अविस्मरणीय क्षण देखने को मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अभेद सुरक्षा घेरे के बीच पूर्ण विनम्रता, आस्था और परंपरा के साथ गिरिराज महाराज की परिक्रमा कर ब्रज की आध्यात्मिक महिमा को चरम पर पहुंचा दिया।
दानघाटी मंदिर में की राष्ट्रपति ने पूजा
परिक्रमा का शुभारंभ दानघाटी मंदिर से हुआ, जहां राष्ट्रपति ने गिरिराजजी का पंचामृत से अभिषेक कर विधि विधान से पूजा-अर्चना की। दीपू पुरोहित और कुलदीप बाबा के सस्वर मंत्रोच्चारण से वातावरण दिव्य ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।
मंदिर रिसीवर ललित शर्मा ने उन्हें पुष्पगुच्छ और राधा-कृष्ण का चित्रपट भेंट कर ब्रज की पारंपरिक आतिथ्य भावना को साकार किया।
श्रद्धा का चरम उस समय देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने नंगे पांव परिक्रमा मार्ग पर कदम रखे। करीब 200 मीटर पैदल चलकर उन्होंने आस्था और सादगी का सशक्त संदेश दिया, तत्पश्चात वे गोल्फकार्ट में सवार हुईं।

गोल्फकोर्ट से परिक्रमा के दौरान राष्ट्रपति।
रास्ते में छतों पर उमड़े श्रद्धालुओं ने ‘राधे राधे’ से किया जयघाेष
मार्ग के दोनों ओर और छतों पर उमड़े श्रद्धालुओं ने ‘राधे राधे’ के जयघोष से पूरे वातावरण को गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने भी हाथ हिलाकर जनस्नेह को आत्मीयता से स्वीकार किया। आन्यौर में उन्होंने पुनः कुछ दूरी पैदल चलकर जनभावनाओं से जुड़ाव प्रदर्शित किया, वहीं पूंछरी पहुंचने पर राजस्थान के गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका स्वागत किया। यहां भी उन्होंने कुछ कदम पैदल चलकर श्रद्धा की निरंतरता बनाए रखी।
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मानसी गंगा का पूजन किया
परिक्रमा के मध्य राष्ट्रपति मुकुट मुखारविंद मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने मानसी गंगा का पूजन कर गिरिराजजी का रबड़ी और दूध से अभिषेक किया। श्रीजी पीठाचार्य मनीष बाबा ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। मंदिर रिसीवर कपिल चतुर्वेदी ने उन्हें राधा-कृष्ण की दिव्य मूर्ति भेंट की, वहीं राज्यपाल को माखनचोर कान्हा की प्रतिमा अर्पित की गई।
पूरे परिक्रमा मार्ग पर भक्ति और संस्कृति का अद्भुत समागम देखने को मिला। जगह-जगह कलाकारों द्वारा राधा-कृष्ण की लीलाओं का सजीव मंचन, ढोल नगाड़ों की गूंजती थाप और वैदिक मंत्रोच्चारण ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।
ब्रज की भक्ति में डूबा राष्ट्र, इतिहास में दर्ज हुआ स्वर्णिम अध्याय
ब्रज की आत्मा मानो सजीव होकर हर कदम पर स्पंदित हो रही थी। राष्ट्रपति के इस ऐतिहासिक दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभेद और बहुस्तरीय रही। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा, आसमान से लेकर धरातल तक हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी गई। सुरक्षा और श्रद्धा का ऐसा संतुलन विरले ही देखने को मिलता है, जहां व्यवस्था और विश्वास एक साथ कदमताल करते नजर आए।
ब्रज में भक्ति का विराट दृश्य: राष्ट्रपति की परिक्रमा बनी ऐतिहासिक क्षण
यह परिक्रमा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रही, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक गरिमा, आस्था की गहराई और जन जन की भावनाओं का विराट उत्सव बन गई। राष्ट्रपति का यह दौरा ब्रजभूमि के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित हो गया, जहां सत्ता और श्रद्धा का अद्भुत संगम, भक्ति के महासागर में विलीन होता दिखाई दिया।