बांकेबिहारी मंदिर में सेवायत उड़ा रहे परंपरा की धज्जियां, शयनभोग सेवा में नहीं सजा फूल बंगला
श्रद्धालु सेवा के लिए तत्पर रहते हैं, लेकिन सेवायत परंपरा का उल्लंघन कर रहे हैं। प्रबंधन समिति ने फूलबंगला सजाने की राशि बढ़ाई है, फिर भी सेवायत भक्तो ...और पढ़ें

बांकेबिहारी मंदिर में शयनभोग सेवा में नहीं सजा फूल बंगला।

समय कम है?
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संवाद सहयोगी, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी के भक्त अपने आराध्य को सर्वस्व न्योछावर करने को हमेशा तत्पर रहते हैं। इसका प्रमाण इसी बात से मिलता है कि पर्व, उत्सव हों या फिर गर्मी में फूलबंगला की परंपरा। श्रद्धालु पूरी तरह से सेवा अर्पित करने को तत्पर रहते हैं।
यहां तक कि श्रद्धालुओं में होड़ लगी रहती है कि किसे ठाकुरजी की सेवा का मौका मिले। लेकिन, इस बार गर्मियों में मंदिर में फूलबंगला सेवा के दौरान सेवायत ही मंदिर की परंपरा की धज्जियां उड़ा रहे हैं। रविवार की शाम शयनभोग सेवा में एकबार फिर फूलबंगला नहीं सजाया गया।
इस सीजन में 10वीं बार नहीं सजाया फूलबंगला, भक्त अचंभित
ठाकुर बांकेबिहारी के प्राकट्यकर्ता संगीत सम्राट स्वामी हरिदास ने ठाकुरजी की फूलबंगला की शुरुआत निधिवन राज मंदिर में लाड़ लड़ाते हुए की थी। स्वामी हरिदास की मंशा थी कि लाड़ले ठाकुर बांकेबिहारीजी को गर्मी से शीतलता देने का फूलडोल में विराजा जाए। इसलिए वे निधिवन राज मंदिर में ही फूल व पत्तियों के बने फूलडोल में गर्मी के दिनों में विराजते थे।
मंदिर के सेवायत ही तोड़ रहे वर्षों से चली आ रही परंपरा
स्वामी हरिदास ने ही अक्षय तृतीया पर चरण दर्शन, हरियाली तीज पर हिंडोला उत्सव की परंपरा की शुरुआत की, जो आज भी मंदिर में भावपूर्ण तरीके से निभाई जा रही हैं। लेकिन, मंदिर के सेवायत इन दिनों मंदिर की सेवा परंपरा को तार-तार करने में लगे हैं। गर्मी के दिनों में ठाकुरजी की फूलबंगला सेवा के साथ जिस तरह तोड़ रहे हैं, ये सीधे तौर पर ठाकुरजी की सेवा परंपरा से खिलवाड़ है।
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फूल बंगला सजाने की राशि 15 हजार से बढ़ाकर 1.51 लाख रुपये की थी
रविवार को दसवें दिन शाम को शयनभोग सेवा में फूलबंगला नहीं सजा सका। इसका कारण उच्चाधिकार प्रबंधन समिति ने बीते दिनों फूल बंगला सजाने की राशि 15 हजार से बढ़ाकर 1.51 लाख रुपये की थी। हालांकि विरोध पर अब इसे एक लाख रुपये कर दिया गया है। जबकि, सेवायत भक्तों से इसके लिए लाखों रुपये लेते आ रहे हैं। लेकिन, सेवाधिकारी ठाकुरजी के नाम से मिल रहे पैसे को ठाकुरजी की सेवा में ही देने से बच रहे हैं।