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    मऊ में अनदेखी का शिकार 743 कुओं को मिलेगी संजीवनी, वीबी-जीरामजी से पुनर्जीवित करेगा प्रशासन

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 04:21 PM (IST)

    मऊ जिले में अनदेखी के कारण विलुप्त हुए 743 कुओं को पुनर्जीवित करने की तैयारी चल रही है, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा। ...और पढ़ें

    यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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    HighLights

    1. मऊ में 743 विलुप्त कुओं को पुनर्जीवित किया जाएगा।

    2. भूजल स्तर सुधारने और जल संरक्षण का लक्ष्य है।

    3. 'जलदूत ऐप' से कुओं की निगरानी की जाएगी।

    जागरण संवाददाता, मऊ। शासन-प्रशासन व लोगों की अनदेखी से जनपद के 743 कुंए विलुप्त हो गए। हालात यह हो गई है कि गांवों में कुओं को पाटकर अतिक्रमण कर लिया गया है। कुछ जगहों पर बचे हैं तो वह झांड-झंखाड़ या घास-फूंस से ढके हुए हैं। अब भाग रहे जलसंरक्षण को देखकर शासन-प्रशासन की तरफ से कुंओं को सहेजने की पहल की जा रही है। इसे लेकर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है और विलुप्त हो गए कुओं को सहेजने की तैयारी की जा रही है।

    पाताल भाग रहे भूगर्भ जल को लेकर हर कोई चिंतित है। जल संरक्षण के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, फिर भी हर साल जलस्तर घटता जा रहा है। जल संरक्षण को लेकर गांवों में विलुप्त हो चुके कुंए को पुनर्जीवित करने की तैयारी की जा रही है। इसको वीबी-जीरामजी के तहत जीवित किया जाएगा। इससे भू-गर्भ जलस्तर में सुधार होगा। साथ ही बारिश के जलस्तर की नापी करने में सहूलियत होगी।

    भू-गर्भ जलस्तर में होगा सुधार

    कुंओं और जलस्तर की जानकारी जलदुत एप पर अपलोड की जाएगी। जिले के 645 ग्राम पंचायतों में रोजगार सेवक व सचिवाें के माध्यम से 743 कुएं की खोज की गई है। इसमें जमा सिल्ट की सफाई कर कुंए को पुनर्जीवित किया जाएगा। इससे बारिश के पानी का आसानी से संरक्षण होगा और भू-गर्भ जलस्तर में सुधार हो गया।

    जलस्तर को बेहतर बनाने के लिए शासन की तरफ से जलदूत एप जारी किया गया है। इसपर कुंए की संख्या को अंकित किया गया है। साथ ही वीबी-जीरामजी विभाग की तरफ से बारिश से पहले और बाद में कुएं के पानी की मापी की जाएगी। इसके बाद दोनों आंकड़ों को एप पर दर्ज किया जाएगा। इससे बारिश के जलस्तर का आंकलन लगाने में सहूलियत मिलेगी।

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    पानी की किल्लत से मिलेगा छुटकारा

    पिछले दिनों कुंए जलसंरक्षण और पेयजल के प्रमुख साधन थे। समय के अनुसार गांवों में हैंडपंप और सबमर्सिबल का उपयोग पेयजल के लिए किया जाना लगेगा। इसके कारण गांवों में अधिकांश कुंओं कचरा व मिट्टी डालकर बंद कर दिया गया। इसका अस्तित्व ही पूरी तरह से समाप्त हो गया। जिसका असर सीधे भू-गर्भ जलस्तर पड़ेगा।

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    अधिकांश गांवों में भू-जल में गिरावट आने के कारण भीषण गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत का लोगों को सामना करना पड़ता है। भू-जल में सुधार लाने के लिए कुंओं की सफाई कार्य किया जाएगा।

    जिले के 645 ग्राम पंचायतों में 743 कुएं चिंहित किए गए है। इसको जलदूत एप पर अपलोड किया गया है। इसकी सफाई कर जल संरक्षण किया जाएगा। साथ ही बारिश से पहले और बाद में जलस्तर की मापी की जाएगी।


                                                                         राजीव कुमार, उपायुक्त श्रम रोजगार