जून और जुलाई में नदियों में मछली पकड़ने पर रहेगी रोक, पकड़े जाने पर होगी कार्रवाई; सामने आई वजह
मऊ जिले में वर्षा ऋतु के दौरान मछलियों के प्रजनन और संरक्षण के लिए 1 जून से 30 जुलाई तक नदियों व प्राकृतिक जल स्रोतों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाय ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, मऊ। सहायक निदेशक मत्स्य विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि जनपद में वर्षा ऋतु के दौरान मछलियों के प्रजनन एवं संरक्षण को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा नदियों एवं प्राकृतिक जल स्रोतों में मत्स्य आखेट (मछलियां पकड़ना) व मत्स्य बीज (मछलियाें के बच्चों) को पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
यह प्रतिबंध उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम-1948 एवं उत्तर प्रदेश मत्स्य (विकास एवं नियंत्रण) नियमावली-1954 के प्रावधानों के अंतर्गत लगाया गया है। एक जून से 30 जुलाई तक नदियाें व प्राकृतिक जल स्त्रोतों से मछलियाें के पकड़ने पर रोक लगा दी गई है।
मत्स्य शिकार करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा
उन्होंने बताया कि जारी अधिसूचना के अनुसार जनपद में प्रवाहित घाघरा नदी एवं उससे संबंधित नालों व अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में एक जून से 30 जुलाई तक मत्स्य शिकार करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। इसके अतिरिक्त 15 जुलाई से 31 अगस्त तक मत्स्य फ्राई एवं फिंगरलिंग आकार 2 से 10 सेमी के मत्स्य बीज पकड़ने, नष्ट करने एवं विक्रय करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
बताया कि वर्षा ऋतु में रोहू, कतला, नैन सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियां प्रजनन करती हैं। ऐसे में उनके संरक्षण एवं मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रतिबंध लगाया गया है। प्रतिबंध अवधि के दौरान नदियों एवं प्राकृतिक जल स्रोतों में मत्स्य आखेट की निगरानी एवं चेकिंग के लिए मत्स्य विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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संबंधित अधिकारी नियमित निरीक्षण एवं कार्रवाई करेंगे। उन्होंने आमजन से अपील की है कि प्रतिबंध अवधि में मत्स्य आखेट अथवा मत्स्य बीज के अवैध शिकार एवं विक्रय से दूर रहें। नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मत्स्य अधिनियम 1948 के तहत विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।