एजेंट के झांसे में आकर रूसी सेना में शामिल हुआ था मऊ का युवक, 29 माह बाद घर पर निशानी पहुंचते ही रो पड़े परिजन
मऊ के घोसी निवासी विनोद यादव, जिसे आकर्षक वेतन का लालच देकर रूस भेजा गया था और रूसी सेना में शामिल कर लिया गया, रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हो गया। 29 ...और पढ़ें

HighLights
मऊ के विनोद यादव को एजेंट ने रूस भेजा।
रूसी सेना में शामिल होकर युद्ध में शहीद हुए।
29 माह बाद घर पहुंची उनकी सामग्री।
जागरण संवाददाता, घोसी (मऊ)। रूस-यूक्रेन में कई सालों से युद्ध हो रहा है। इस युद्ध में शहीद घोसी कोतवाली के चंद्रापार निवासी 43 वर्षीय विनोद यादव का ड्रेस व सामग्री 29 माह बाद शनिवार को पैतृक गांव पहुंची। पोटली देखते ही परिजन विलाप करने लगे। पूरे गांव में मातमी सन्नाटा छा गया। उसको दिल्ली के दो एजेंटों ने रूस में आकर्षक वेतन का प्रलोभन देकर 13 जनवरी 2024 को रूस भेजा। विनोद को वीजा देने के पूर्व दिल्ली में रूसी भाषा में छपे एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कराया गया था।
दिल्ली से रूस पहुंचते ही विनोद को रूसी आर्मी शिविर में ले जाया गया। वहां पहुंचने व रूसी अधिकारियों की सख्ती देख उसे छले जाने का आभास हुआ पर उसकी वापसी के सारे रास्ते बंद हो चुके थे। मार्च-अप्रैल 2024 के बीच विनोद रणभूमि में शहीद हो गया। तमाम प्रयास के बाद विनोद का शव तो न मिला पर अब उसकी निशानी के रूप में रूस में भारतीय दूतावास के माध्यम से कपड़ों व कागजात की पोटली मिली है।
दूतावास के अधिकारियों के पहुंचते ही विनोद की पत्नी अनीता देवी की चीखने लगी। विनोद का 18 वर्षीय पुत्र आलोक यादव बड़े चाचा देवेंद्र से लिपटकर रोने लगा। विनोद की दोनों पुत्रियाें 10 वर्षीया शिवांगी व सात वर्षीया शिवानी को उनकी सहेलियां स्वयं रोते हुए ढाढस बंधाती रहीं।
पुत्र के शहीद होने के गम में पिता भी चल बसे
शहीद विनोद यादव चार भाइयों में सबसे छोटा था। बड़े भाई रवींद्र यादव मलेशिया में है जबकि दूसरे नंबर पर रहे याेगेंद्र की मौत हो चुकी है। पिता दुखंती यादव को बेटे के युद्ध में मारे जाने की सूचना तो अप्रैल 2024 में ही मिल गई थी। उसके गम को सीने में लिए अंतिम दर्शन करने की प्रतीक्षा करने लगे। पर बेेटे का अंतिम दर्शन करने के पूर्व ही वह बीते अप्रैल माह में स्वर्गवासी हो गए।
रूस-यूक्रेन युद्ध में चार ने गंवाई है जान
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चंद्रापार निवासी विनोद यादव गांव के ही अपने मित्र सुनील यादव व आजमगढ के बाजार गाेंसाई निवासी कन्हैया यादव संग 13 जनवरी 2024 को घर से निकला। दिल्ली में एक दिन रूकने के बाद तीनों रूस चले गए। 26 जनवरी 2024 को मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गौहरपुर निवासी श्याम सुंदर यादव को भी एजेंटों ने रूस भेजा। श्याम सुंदर यादव रूस-यूक्रेन युद्ध में गोलीबारी के दौरान 24 मार्च 2024 को शहीद हो गया। श्याम सुंदर के पिता भजुरामा ने विनोद यादव पर पत्र को रूस ले जाने का आरोप लगाया था।
बहरहाल विनोद के स्वयं रूस में होने के चलते आरोप सिद्ध न हो सका। पिता की भाग दौड़ के बाद श्याम सुंदर यादव का शव कुछ माह बाद आ गया। दिसंबर 2024 में विनोद के जीजा कन्हैया का शव आया, जबकि सुनील का शव सात माह पूर्व भारत आया।