मेरठ फर्जी पुलिस चौकी का मामला: 'खाकी' की फजीहत देखकर हनी ट्रैप में बदला केस, लाखों की वसूली का खुलासा
मेरठ में नकली पुलिस अधिकारी बनकर वसूली करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने पहले इसे फर्जी चौकी बताया, लेकिन बाद में फजीहत से बचने के लिए हनी ट्र ...और पढ़ें

फर्जी पुलिस अधिकारी बनने वाले आरोपित और कार्यालय
HighLights
नकली पुलिस अधिकारी बनकर मोहकमपुर में वसूली करते थे।
पुलिस ने पहले फर्जी चौकी, बाद में हनी ट्रैप बताया।
वॉकी-टॉकी, बीट बुक जैसे पुलिस उपकरण बरामद हुए।
जागरण संवाददाता, मेरठ। मोहकमपुर में कार्यालय खोलकर सीओ, एचएसओ, एसओ और दारोगा तक नकली बनाए जा रहे थे। पुलिस के प्रेसनोट में वॉकी-टॉकी मय चार्जर, फोन-पे रिसीवर बॉक्स, बीट बुक, पुलिस की लाठी और थाने की मोहर तक बरामद होने का दावा किया हैं, आखिर यह सामान पुलिस चौकी और थाने पर ही मिलता है, अन्य कार्यालय पर ऐसा सामान नहीं मिलेगा।
उसके बाद भी पुलिस के अफसर इसे पुलिस की फर्जी चौकी या थाना बताने से इनकार करने लगे, जबकि प्रेस कांफ्रेंस बुलाने को डाले गए मैसेज में खुद फर्जी चौकी का पर्दाफाश होने का दावा किया गया। महकमे की फजीहत के डर से फर्जी पुलिस चौकी का मामला बदलकर हनी ट्रैप कर दिया। साथ ही पुलिस और पत्रकार बताकर रकम वसूली का मामला दर्शाया गया।
वॉकी टॉकी, फोन-पे रिसीवर बॉक्स और बीट बुक बरामद
पुलिस की तरफ से शाम तीन बजे मीडिया सेल पर अपलोड किए प्रेस नोट में दर्शाया गया कि आरोपित नकली सीओ, एचएसओ, एसओ और दारोगा बनकर वसूली की वारदात को अंजाम दे रहे थे। यहां तक बताया गया कि गलत काम करने वालों को मोहकमपुर स्थित कार्यालय में पकड़कर लाते थे। उसके बाद मुठभेड़ का डर दिखाकर रकम वसूली कर छोड़ देते है। शाम पांच बजे दोबारा से प्रेस नोट अपलोड किया, बताया कि हनी ट्रैप गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपित पकड़ गए। दर्शाया गया कि फर्जी पुलिस और पत्रकार बनकर रकम वसूली कर रहे थे।
एसपी सिटी विनायक भोसले ने अपनी बाइट में स्पष्ट कर दिया कि नकली चौकी या थाना नहीं चला रहे थे। बल्कि कार्यालय खोलकर पुलिस और पत्रकार के नाम पर रकम वसूली कर रहे थे।
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गलत काम करने वालों से मोटी रकम वसूल चुका गिरोह
पुट्ठा के आकाश चौधरी के घर पर शंशाक शर्मा किराए पर रहता था। शंशाक शर्मा मूलरूप से हरियाणा का रहने वाला है। शंशाक ने ही आकाश चौधरी को फर्जी पुलिस अधिकारी बनने का आईडिया दिया। उसके बाद रिठानी के राहुल पाल को जोड़ लिया। उसके बाद आरोपितों ने आसपास के एरिया में गलत काम करने वालों की सूची तैयार की। उक्त लोगों के घरों पर रात के समय पहुंचते थे।
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कई लोगों को कार में उठाकर मोहकमपुर स्थित कार्यालय पर लेकर आते थे। परिवार से रकम वसूली कर छोड़ देते थे। कई गलत काम करने वालों से प्रतिमाह रकम वसूली भी की जाती थी। बताया जाता है कि पिछले छह माह से तीनों 50 लाख से ज्यादा रकम वसूली कर चुके है।