बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने पर क्या करें परीक्षार्थी? जल्द जारी होने वाला है UP Board का रिजल्ट
मेरठ में मनोवैज्ञानिकों ने बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने पर छात्रों को मार्गदर्शन दिया है। उन्होंने बताया कि अंक क्षमता का अंतिम मापदंड नहीं हैं और तना ...और पढ़ें

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HighLights
अंक क्षमता का अंतिम मापदंड नहीं हैं।
तनाव कम करने के लिए मन को व्यस्त रखें।
अभिभावक बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें।
जागरण संवाददाता, मेरठ। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं का परीक्षा परिणाम आ चुका है। यूपी बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं का रिजल्ट भी जल्द आने वाला है। इसके साथ ही आइएससी का रिजल्ट भी आएगा। अपने परिणाम को लेकर बोर्ड परीक्षार्थियों के मन में भी अब सवाल उठ रहे हैं।
पीएमश्री राजकीय इंटर कालेज परिसर स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की ओर से बोर्ड परीक्षार्थियों के विभिन्न सवालों के जवाब दिए जा रहा हैं। साथ ही उनकी शंकाओं का समाधान भी किया जा रहा है। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की मंडलीय मनोविज्ञानी कीर्ति, केंद्र प्रवक्ता डा. मनीषा तेवतिया एवं डा. शिवराज सिंह बोर्ड परीक्षार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
बोर्ड परीक्षार्थी उनसे सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने बोर्ड परीक्षा परिणाम: चिंता और तनाव से कैसे निपटें विषय पर वेबिनार के माध्यम से समाधान किया। बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए परीक्षार्थियों ने पूछा कि कम अंक आने पर क्या करना चाहिए। मनोविज्ञानियों का कहना है कि अंक परीक्षार्थियों की क्षमता का अंतिम मापदंड नहीं हैं। प्रस्तुत हैं परीक्षार्थियों के सवाल व मनोविज्ञानियों के जवाब...।
बोर्ड परीक्षा परिणाम आने से पहले विद्यार्थियों में तनाव क्यों बढ़ जाता है?
परिणाम को लेकर परीक्षार्थियों में अनिश्चितता, परिवार और समाज की अपेक्षाएं तथा भविष्य की चिंता तनाव का मुख्य कारण बनती है। कई छात्र अपने अंक को ही अपनी पहचान मान लेते हैं, जिससे दबाव और बढ़ जाता है।
क्या परीक्षा परिणाम वास्तव में जीवन का निर्णायक मोड होता है?
नहीं, परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। परिणाम केवल एक शैक्षणिक मूल्यांकन है, यह आपकी क्षमता, प्रतिभा और भविष्य को पूरी तरह तय नहीं करता।
परीक्षा परिणाम से पहले परीक्षार्थियों को क्या करना चाहिए?
अपने मन को व्यस्त रखें (हाबी, खेल, पढ़ाई)। सकारात्मक सोच विकसित करें। मोबाइल और इंटरनेट मीडिया का सीमित उपयोग करें। पर्याप्त नींद और संतुलित आहार लें। परिवार और मित्रों से खुलकर बात करें।
अगर अपेक्षा से कम अंक आएं तो क्या करें?
घबराएं नहीं और खुद को दोष न दें। अपनी गलतियों का विश्लेषण करें। वैकल्पिक करियर विकल्पों पर विचार करें। याद रखें कि अंक आपकी क्षमता का अंतिम मापदंड नहीं हैं। जरूरत पड़े तो शिक्षक या काउंसलर से मार्गदर्शन लें
अभिभावकों की क्या भूमिका होनी चाहिए?
बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। उनकी भावनाओं को समझें और समर्थन दें। तुलना करने से बचें। परिणाम चाहे जैसा हो, बच्चे का मनोबल बढ़ाएं।
तनाव कम करने के आसान उपाय क्या हैं?
गहरी सांस और ध्यान। हल्का व्यायाम या योग सकारात्मक बातें सोचें और लिखें।
क्या इंटरनेट मीडिया तनाव बढ़ाता है?
हां, कई बार। दूसरों के परिणाम और सफलता देखकर तुलना की भावना बढ़ती है, जिससे तनाव बढ़ सकता है। इसलिए सीमित उपयोग करना बेहतर है।
क्या परीक्षा में फेल होना जिंदगी में असफल होना है?
नहीं, बिल्कुल नहीं। फेल होना केवल एक परीक्षा में असफल होना है, न कि जीवन में। यह सीखने और सुधार का अवसर है।
कम अंक आने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
खुद को शांत रखें, घबराएं नहीं और तुरंत कोई बड़ा निर्णय न लें। अपने परिणाम को स्वीकार करें और आगे की योजना बनाएं।
क्या 10वीं का रिजल्ट भविष्य तय करता है?
नहीं, आज के समय में सफलता केवल अंकों पर निर्भर नहीं है, बल्कि कौशल, मेहनत और सही दिशा पर निर्भर करती है।
अभिभावकों को बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?
बच्चों को डांटने के बजाय उनका साथ दें, समझें और प्रोत्साहित करें। तुलना करने से बचें।