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    मेरठ कलेक्ट्रेट पर लाठीचार्ज मामले में SSP समेत 50 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज, 3 अगस्त को होगी सुनवाई

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 06:30 AM (IST)

    मेरठ कलेक्ट्रेट पर हुए लाठीचार्ज मामले में अधिवक्ता अनिल प्रधान ने एसएसपी समेत 50 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी/एसटी कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    HighLights

    1. कलेक्ट्रेट लाठीचार्ज में एसएसपी समेत 50 पुलिसकर्मियों पर केस।

    2. अधिवक्ता अनिल प्रधान ने एससी/एसटी कोर्ट में दायर किया मुकदमा।

    3. पुलिस पर भेदभाव, मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। कलेक्ट्रेट पर आठ जुलाई को अनुसूचित जाति के लोगों पर हुए लाठीचार्ज प्रकरण में अधिवक्ता अनिल प्रधान ने विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। इसमें एसएसपी अविनाश पांडेय, एसपी देहात अभिजीत कुमार समेम 50 पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए है।

    न्यायालय में वीडियो व फोटो पेश कर आरोपितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तिथि नियत की है।

    मुकदमा दायर करने वाले अधिवक्ता अनिल प्रधान ने आरोप लगाया कि ललिता गौतम हत्याकांड की विवेचना में पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। आरोपितों को बचाने का पूरा प्रयास किया। इससे आहत अनुसूचित जाति के लोगों व स्वजन आठ जुलाई को जिलाधिकारी से मिलने कलेक्ट्रेट आए थे।

    पुलिस ने कलक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए। लोगों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के लोगों से पुलिस ने भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हुए लाठी चार्ज किया। अधिकारियों ने उनसे हाथापाई की। पुलिस ने प्रतिशोध की भावना से पुलिसकर्मियों के फर्जी डॉक्टरी परीक्षण कराकर अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट दर्ज की।

    पुलिस से मारपीट के कोई साक्ष्य उनके पास नहीं है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि यह भारती संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत सभी को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन का अधिकार है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकार, मानवाधिकारों का उल्लंघन कर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला है।

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    अधिवक्ता रवि कुमार गौतम को धरना स्थल से एकांत में ले जाकर उससे मारपीट कर अमानवीय व्यवहार किया। उन्होंने न्यायालय से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने को रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई को 3 अगस्त की तिथि निश्चत की है।

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