हेलो डॉक्टर: नम स्थानों पर नंगे पैर टहलने से बचें, बरसात में लेप्टोस्पाइरोसिस का बढ़ जाता है खतरा
मेरठ में वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने 'हेलो डॉक्टर' कार्यक्रम में बताया कि बरसात में नम स्थानों पर नंगे पैर चलने से लेप्टोस्पाइरोसिस का खतरा ह ...और पढ़ें
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वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही
HighLights
नम स्थानों पर नंगे पैर चलने से लेप्टोस्पाइरोसिस का खतरा।
डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड से बचाव को स्वच्छता व सावधानी बरतें।
विशेषज्ञ ने दी मानसून में स्वस्थ रहने की अहम सलाह।
जागरण संवाददाता, मेरठ। बरसात के मौसम में जमा हुए गंदे पानी के आसपास नम स्थानों पर नंगे पैर टहलना सेहत पर भारी पड़ सकता है। इससे लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी का खतरा होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले साल बड़ी संख्या में इसके मामले सामने आए थे। यह लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है।
बरसात के पानी में संक्रमित जानवरों (विशेषकर चूहों, कुत्तों ) का मूत्र मिल जाता है। जब कोई इस पानी या इसके आसपास के नम स्थान पर नंगे पैर चलता है तो यह बैक्टीरिया त्वचा पर मौजूद छोटे कट या खरोंच के जरिए शरीर के भीतर प्रवेश कर जाता है। समय पर उपचार न होने पर यह संक्रमण लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और लकवे जैसी स्थिति बन सकती है। इसके साथ मच्छर पनपने से डेंगू-मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है।
अगस्त-सितंबर में इन बीमारियों के अनुकूल वातावरण होने के कारण सबसे ज्यादा इन्हीं से बचाव पर ध्यान देने की जरूरत है। यह बात रविवार को दैनिक जागरण के हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने कही। उन्होंने फोन पर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी।
- मेटा बेटा 18 साल का है। खूब खाता है, लेकिन शरीर में लगता नहीं। दुबला-पतला है। एक सप्ताह पहले चक्कर आने से गिर गया था। क्या करें।-प्रेमचंद्र मोहनपुरी।
मौसमी फल, हरी सब्जी खिलाएं। सुबह नियमित 30 मिनट टहलने के लिए भेजें। सात-आठ घंटे की नींद लें। किसी हार्मोंस विशेषज्ञ को दिखवा भी लें।
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- 65 साल का हूं। सुबह पेट पत्थर जैसा हो जाता है। ऐसा क्यों हो रहा है।-ऋषिपाल सिंह, फाजलपुर।
इस उम्र के पड़ाव पर खानपान में बदलाव करना चाहिए। दूध पीने के बजाए दही खाएं। 50 साल के बाद दूध पचाने की क्षमता कम हो जाती है। मौसमी फल, हरी सब्जी का सेवन बढ़ाएं। टहलना जरूरी है।
- बरसात के मौसम में माता-पिता को लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। क्या करें-विनोद शर्मा सूजरकुंड।
नमी के कारण त्वचा में फर्क पड़ता है। फंगस के निशान बन जाते हैं। डिटाल साबुन से नहाएं। गीले कपड़े न पहने। पसीने से भीगे कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें।
- बरसात के मौसम में बच्चों बाहर का खाना खाने की जिद करते हैं। क्या बाहर का खाना नुकसानदायक होता है।- वत्सला, कंकरखेड़ा।
ढाबे, होटल और स्ट्रीट फूड पर जाकर लोग व्यंजन करते हैं। ध्यान ये देना है कि जो खा रहे हैं वह ताजा हो। सफाई हो। काफी देर का रखा हुआ न हो। पानी शुद्ध हो। मिर्च-मशाला ज्यादा न हो। दूषित खानपान नुकसान पहुंचाता है।
- पेट में दर्द है और उल्टी-दस्त हो रही है। देवेंद्र हापुड़ रोड, करन, राेहटा, पवनजीत।
चिकित्सक की सलाह लेकर दवाएं लें। हाथ धोकर भोजन करें। शुद्ध पानी पीएं। बरसात में हाथों में लगी गंदगी और दूषित पानी पीने से पेट का संक्रमण होता है।
- छह महीने से शुगर है। उम्र 61 साल और वजन 72 किलो है। -अजय सेठी, प्रहलाद नगर।
सबसे पहले अपना वजन नियंत्रित करें। आलू, चावल, चीनी, गुड़ खाना कम कर दें। खाने के बाद 15 मिनट टहलें। इससे शुगर नियंत्रित होती है। जो दवा ले रहे हैं, उसे लेते रहें।
- क्या मानसून में होने वाले बुखार में एंटीबायोटिक ही लेनी चाहिए। महाराज सिंह, मेरठ।
उल्टी-दस्त ठीक नहीं हो रही हो। बुखार कई दिनों तक न उतरे। ऐसी अवस्था में चिकित्सक की सलाह पर ही एंटीबायोटिक लेनी चाहिए।
- गले में कई दिनों से संक्रमण है। खांसी-जुकाम और सांस लेने में तकलीफ होती है।- भारत तोमर, एटूजेड कॉलोनी।
बरसात के मौसम में बैक्टीरिया सक्रिया हो जाते हैं। एसी में रखने पर, फ्रिज में रखी ठंडी चीजें, पानी पीने से यह स्थिति बनती है।
- बीपी-कोलेस्ट्राल बढ़ा हुआ है। पेट से परेशान हैं। क्या सावधानी रखें-राजवती, कंकरखेड़ा, महेंद्र सिंह, पांचली खुर्द।
नमक का प्रयोग कम करें। चिकनाई घी-तेल अधिक न खाएं। मीठे से परहेज करें। अचार न खाएं। इसमें नमक अधिक होता है। हरी सब्जी का सेवन करें।
- पेट में ऐंठन हो रही है। पैरों की अंगुलियों के बीच खुजली बहुत होती है।- सागर, अमरोहा, रणवीर किला रोड।
दूषित खानपान से पेट में यह समस्या हो सकती है।यूरीन टेस्ट कराएं। नम स्थानों पर जाने से अंगुलियों के बीच फंगस की स्थिति बन जाती है।
- पेट दर्द, भूख नहीं लगती है। छाती में जलन होती है। क्या करें-कामता आनंद, टीपी नगर।
लिवर और आंतों की बीमारी में ऐसा होता है। एक बार पेट के डॉक्टर को दिखा लें।
जागरण के पांच सवाल
- मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचने के लिए क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? मौसमी फ्लू, वायरल फीवर और डेंगू या मलेरिया के लक्षणों में क्या अंतर होता है? क्या फ्लू से बचाव का टीका लगवाना जरूरी है?
घर और आसपास जल जमाव न होने दें। गमले, कूलर, टायरों में पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचने के लिए सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। सफाई रखें, भोजन से पहले हाथ जरूर धोएं। दूषित पानी पीने से बचें। बासी भोजन या फ्रिज में ज्यादा समय तक रखा भोजन न करें। मौसमी फ्लू व वायरल फीवर में गले में संक्रमण होता है। डेंगू का बुखार सिरदर्द और कमर दर्द के साथ आता है। मलेरिया का बुखार एक दिन छोड़कर आता है। चिकनगुनिया में जोड़ों का दर्द होता है। सितंबर में इन्फ्लूएंजा टीका लगवा लेना चाहिए। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और कम्युनिटी रिस्क वाले लोगों के लिए फायदेमंद होता है। साल में एक बार ही लगता है।
- इस मौसम में पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए किस तरह का खानपान होना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए? दूषित पानी से होने वाले इन्फेक्शन (जैसे डायरिया, हैजा) से खुद को और परिवार को कैसे सुरक्षित रखें?
ताजा पका गर्म भोजन करें। उबला हुआ या फिल्टर पानी पीएं। गिलोय-तुलसी का काढ़ा, सूप, हल्दी वाला दूध और अदरक का सेवन इन दिनों फायदेमंद रहता है। सड़क किनारे बिकने वाले कटे फल व स्ट्रीट फूड, बासी खाना, तला-भुना भोजन करने सेे बचें। हरी पत्तेदार सब्जियां अच्छी तरह से धोकर पकाकर ही खानी चाहिए। भोजन करने के बाद 10 से 15 मिनट टहलना जरूरी है। दूषित पानी से होने वाले संक्रमण से बचाव के लिए पानी को कम से कम 10 मिनट उबालकर या फिल्टर से साफ करके ही पीएं। साबुन से हाथ धोएं।
- घर में कौन-कौन सी जरूरी फर्स्ट-एड दवाइयां रखनी चाहिए? बुखार या कोई अन्य लक्षण दिखाई देने पर कब तक घरेलू देखभाल करनी चाहिए और किस स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है?
घर में ओआरए और इलेक्ट्रोलाइट्स घोल रखें। थर्मा मीटर, सैनिटाइजर, पैरासिटामोल की टेबलेट, एंटीसेप्टिक क्रीम, बैंड-एड, और काटन-पट्टी जरूर रखें। सर्दी-जुकाम, खांसी और हल्का बुखार हो तो घर पर ही आराम करें। मानसून में इमरजेंसी तब होती है जब उल्टी-दस्त न रूके। शुगर-बीपी अनियंत्रित हो और सांस लेने में परेशानी हो। पेशाब में खून, दस्त में खून आ रहा हो तो तत्काल अस्पताल में भर्ती होना चाहिए।
- पिछले साल बरसात के मौसम में लेप्टोस्पाइरोसिस के केस बड़ी संख्या में आए थे। इसके लक्षण क्या होते हैं और बचाव के लिए क्या करें ?
बरसात में जल जमाव होने पर नम स्थानों पर लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया पनपता है। पिछले साल मेरठ में डेंगू से ज्यादा लेप्टोस्पाइरोसिस के केस आए थे। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और आंखों का लाल होना है। बचाव के लिए जलभराव वाले इलाकों में नंगे पैर न जाएं। पैरों में कोई घाव या खरोंच हो तो उसे ढककर रखें। गंदे पानी के संपर्क में आने पर पैरों को साबुन और साफ पानी से तुरंत धोएं।
- डेंगू शाक सिंड्रोम और डेंगू हेमरेज सिंड्रोम में क्या फर्क है। डेंगू होने पर कितनी प्लेटलेट्स गिरने पर अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए।
डेंगू हेमरेज सिंड्रोम में नसों से प्लाज्मा का रिसाव और ब्लीडिंग होती है। नाक, कान, मुंह से खून आने लगता है। जबकि डेंगू शाक सिंड्रोम इसी का खतरनाक रूप है। इसमें ब्लीडिंग के साथ ब्लड प्रेशर इतना गिर जाता है कि शरीर के अंगों को खून मिलना बंद हो जाता है। अगस्त से अक्टूबर तक मच्छरों से बचाव करें। मलेरिया और डेंगू का खतरा होता है।