विंध्य क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती से दोगुनी होगी किसानों की आय, सरकार दे रही बंपर सब्सिडी
विंध्याचल मंडल के किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती से आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रहे हैं, जिससे उनकी आय दोगुनी हो रही है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
मीरजापुर में 35 हेक्टेयर ड्रैगन फ्रूट खेती का लक्ष्य।
किसानों को प्रति हेक्टेयर 2.70 लाख रुपये अनुदान।
ड्रैगन फ्रूट से किसानों की आय दोगुनी हो रही।
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। विंध्याचल मंडल के किसान धान व गेहूं आदि की परंपरागत खेती के साथ ही औद्यानिक खेती करके आर्थिक रुप से स्वावलंबी बन रहे हैं। उद्यान विभाग की ओर से इस वर्ष मीरजापुर में 35 हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती कराने का लक्ष्य शासन से मिला है।
सबसे बड़ी राहत की बात है कि सरकार की ओर से किसानों को मिलने वाला अनुदान भी बढ़ा दिया गया है। किसानों को प्रति हेक्टेयर दो लाख 70 हजार रुपये अनुदान मिलेगा। किसान जुलाई माह से ड्रैगन फ्रूट की खेती आरंभ कर सकते हैं। वर्तमान में जनपद मीरजापुर में ही 350 एकड़ में 362 किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं।
जिला उद्यान अधिकारी मेवा राम ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की पैदावार जून से दिसंबर माह तक होती है। ड्रैगन फ्रूट पोषण से भरपूर तथा एंटी एलर्जी सहित कई गुणों से युक्त है। प्रति एकड़ 45 से 55 क्विंटल ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है।
एक एकड़ खेती करने पर लगभग साढ़े चार लाख रुपये का खर्च आता है। तीसरे वर्ष से प्रति एकड़ लगभग छह लाख रुपये की आमदनी आरंभ हो जाती है। वर्तमान समय में जनपद में 125 एकड़ में लगभग 250 किसान खेती कर रहे हैं। राजगढ़ के गढ़वा में नीलू सिंह सहित लगभग 30 महिलाएं भी खेती कर रही हैं।
बनारस, प्रयागराज, लखनऊ आदि जिलों में भी ड्रैगन फ्रूट की आपूर्ति की जा रही है। राजगढ़ के बनइमिलिया की सुमन देवी को राज्यपाल बीते 17 फरवरी 2025 को पुरस्कृत कर चुकी हैं। सिटी ब्लॉक के नुआव गांव के आकाश दुबे के अनुसार एक एकड़ में लगभग चार लाख का खर्च आया है। एक फल का वजन आधा किलो या उससे ज्यादा होता है।
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धूप से बचाने के लिए चूने का करें छिड़काव
बारिश होते ही फूल देना आरंभ कर देते हैं। ड्रैगन फ्रूट को धूप से बचाने के लिए पौधे के उपर रात भर भिगोकर रखे गए चूने का स्प्रे मशीन से छिड़काव करें। चूने के पानी से छिड़काव करने से धूप से बचाव होगी साथ ही पौधों को कैल्सियम की आपूर्ति भी हो जाएगी।
सूर्य का प्रकाश चूने पर पड़ने के बाद रिफ्लेक्ट कर देता है। इसके चलते पौधा स्वस्थ बना रहता है। वहीं फल तनों पर आते हैं, इसलिए तने में गलन नहीं होता है इसके चलते फल की मात्रा बढ़ने से उत्पादन बढ़ जाता है।