22 साल बाद मकर संक्रांति पर दुर्लभ 'एकादशी संयोग': जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और नियम
मकर संक्रांति पर 22 साल बाद एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे स्नान-दान का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाएगा। 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे सूर्य मकर राशि ...और पढ़ें

मकर संंक्रांति
HighLights
मकर संक्रांति लगने से छह घंटे पहले शुरू हो जाएगा पुण्यकाल, करें स्नान व दान
14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे सूर्यदेव
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मकर संक्रांति पर 22 वर्षों बाद एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। 14 जनवरी को एकादशी और मकर संक्रांति एक ही दिन पड़ने से इसका पुण्यफल कई गुणा बढ़ गया है। इससे पहले यह संयोग वर्ष 2003 में बना था। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं, जिससे दान-पुण्य, स्नान और पूजा का महत्व अक्षय फल देने वाला माना गया है।
सूर्यदेव 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। हालांकि संक्रांति से छह घंटे पहले यानी सुबह 8:45 बजे से पुण्यकाल प्रारंभ हो जाएगा, इसी समय से स्नान-दान व खिचड़ी का वितरण किया जा सकता है। महापुण्य काल दोपहर 3:07 बजे से शाम छह बजे तक रहेगा।
संक्रांति-एकादशी पर यह करें
ज्योतिषाचार्य डा. जगदीश प्रसाद कोठारी ने बताया कि इस बार संक्रांति और एकादशी एक ही दिन होने के कारण एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु 14 जनवरी को खिचड़ी का सेवन न करें। वे इस दिन फलाहार लें और तिल, वस्त्र व अन्न का दान करें।

द्वादशी लगने पर 15 जनवरी को खिचड़ी खाकर व्रत का पारण कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य श्रद्धालु पुण्यकाल में स्नान-दान और खिचड़ी का वितरण कर सकते हैं, लेकिन एकादशी व्रती को संयम रखना आवश्यक है।
खरमास तो खत्म होगा, पर शुभ कार्य 31 जनवरी से
मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा, लेकिन मांगलिक कार्य 30 जनवरी तक नहीं होंगे, क्योंकि इस अवधि में शुक्र अस्त रहेगा। शुक्र के उदय होने के बाद ही विवाह व अन्य शुभ संस्कार किए जा सकते हैं। इसलिए 31 जनवरी 2026 से ही शुभ कार्य शुरू होंगे।
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माघ मेले का पहला स्नान भी इसी दिन
धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम प्रयागराज में देवी-देवता स्वरूप बदलकर स्नान करने आते हैं। इसी दिन से एक माह चलने वाला माघ मेला प्रारंभ होता है, जिसका पहला और सबसे बड़ा स्नान मकर संक्रांति पर होता है।
बाजार में संक्रांति-लोहड़ी के लिए तिल, रेवड़ी व गुड़ की बिक्री बढ़ी
मकर संक्रांति के लिए गुड़, तिल की बिक्री भी तेज हो गई है। फड़ से लेकर दुकानों तक गुड़, तिल बिकने लगा है। मकर संक्रांति 14 जनवरी को है, लेकिन इससे पहले 13 जनवरी को लोहड़ी भी है। संक्रांति व लोहड़ी दोनों के लिए खरीदारी हो रही है। लोहड़ी पर भी गजक, रेवड़ी, मूंगफली, मक्का की बिक्री खूब होती है। इन दिनों दोनों ही त्योहारों का असर बाजार में देखने को मिल रहा है।
विवाह मुहूर्त व शुभ कार्य
जनवरी: 31
फरवरी: 3, 4, 5, 10, 13, 15, 19, 20, 21
मार्च: 6, 9, 10, 11, 12
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