रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली इन 3 चीजों में निकली भारी मिलावट, मोबाइल लैब ने खोली दुकानदारों की पोल
मुरादाबाद में तीन माह में 602 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिसमें 37 में मिलावट पाई गई। सबसे अधिक मिलावट मसालों और दूध में मिली, हालांकि मोबाइल लैब की ...और पढ़ें

खाद्य सुरक्षा विभाग कार्यालय में खड़ा वाहन। जागरण
HighLights
एफएसडब्ल्यू वाहन केवल जागरूकता तक सीमित, दुकानदारों को सुधार की दी सलाह
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मिलावटखोरी की रोकथाम के लिए नमूने लेने के साथ व्यापारियों को जागरूक किया जा रहा है। फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स (एफएसडब्ल्यू) मोबाइल लैब से 602 खाद्य पदार्थों के नमूनों की आन-द-स्पाट जांच की। जिसमें 437 नमूने मानकों के अनुरूप मिले और 37 नमूने फेल हो गए। विभागीय अधिकारियों ने व्यापारियों को चेतावनी दे दी है।
मोबाइल वैन से लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें यह बताना है कि आपके नमूने में क्या मिलाया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल से 30 जून तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मोबाइल लैब के माध्यम से 602 खाद्य पदार्थों के नमूनों की आन-द-स्पाट जांच की गई। इनमें 437 नमूने मानकों के अनुरूप मिले, जबकि 37 नमूने फेल हो गए।
जांच में सबसे अधिक मिलावट मसालों और दूध में सामने आई। 37 मिलावटी नमूनों में 12 चटनी, 12 लाल मिर्च, हल्दी सहित अन्य मसालों तथा 13 दूध के नमूने शामिल हैं। ये ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनका आम लोगों की रसोई में रोजाना उपयोग होता है। ऐसे में इनकी गुणवत्ता पर सवाल उठना उपभोक्ताओं की सेहत के लिए चिंता का विषय है।
हालांकि, मोबाइल लैब की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ न तो चालान किया जाता है और न ही कोई कानूनी कार्रवाई होती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एफएसडब्ल्यू वाहन का उद्देश्य लोगों और खाद्य कारोबारियों को जागरूक करना है। मौके पर यदि किसी नमूने में मिलावट या गुणवत्ता संबंधी कमी मिलती है तो संबंधित दुकानदार को इसकी जानकारी देकर सुधार करने की सलाह दी जाती है।
खबरें और भी
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता जरूरी है, लेकिन यदि बार-बार मिलावट सामने आने के बाद भी कार्रवाई न हो तो इसका गलत संदेश जाता है। इससे मिलावट करने वालों में कार्रवाई का डर भी नहीं बन पाता।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि जांच में मिलावट साबित हो रही है तो संबंधित प्रतिष्ठानों के नियमित नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण कराया जाए और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। इससे बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
यह है नियम
फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स (एफएसडब्ल्यू) मोबाइल लैब का उद्देश्य मुख्य रूप से जागरूकता और त्वरित स्क्रीनिंग है। मोबाइल लैब में होने वाली जांच स्क्रीनिंग टेस्ट होती है, इसे अंतिम कानूनी साक्ष्य नहीं माना जाता।
यदि स्क्रीनिंग में मिलावट या गुणवत्ता में कमी का संकेत मिलता है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी को संदेह के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट-2006) तथा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रुल्स 2011 के तहत विधिवत नमूना लेना होता है।
यह नमूना निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सील कर राज्य की अधिसूचित खाद्य प्रयोगशाला भेजा जाता है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट ही कानूनी रूप से मान्य होती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई या अभियोजन किया जाता है।
फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स (एफएसडब्ल्यू) मोबाइल लैब का उद्देश्य मुख्य रूप से जागरूकता और त्वरित स्क्रीनिंग है। इसके माध्यम से हमारी टीम स्पाट पर जांच करके लोगों को जागरूक कर रही है। उन्हें चेतावनी दी जाती है। तीन माह में 602 नमूनों की आन-द-स्पाट जांच में 437 सही और 37 में मिलावट की पुष्टि हुई। जागरूकता अभियान निरंतर जारी रहता है।
राजवंश प्रकाश श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड टू
यह भी पढ़ें- मुरादाबाद में सनसनी: महिला की गला रेतकर हत्या, पहचान छुपाने के लिए चेहरा भी जलाया; जंगल में मिला शव