मुरादाबाद काली मंदिर विवाद: 5 महीने पुरानी उस रिपोर्ट में क्या है जिसने दोनों महंतों की कुर्सी छीन ली?
मुरादाबाद के लालबाग स्थित श्री काली मंदिर विवाद में पांच महीने पुरानी प्रशासनिक जांच रिपोर्ट ने दोनों पूर्व महंतों, सज्जन गिरि और रामगिरि, के दावों की ...और पढ़ें

मुरादाबाद स्थित काली मंदिर
HighLights
दावों की पोल खुली, श्री काली मंदिर महंताई के दावे व आपराधिक मामले जांच में सामने आए
राजस्व अभिलेखों में सज्जन गिरि व रामगिरि का जांच रिपोर्ट में नाम नाम नहीं होने की कही बात
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। लालबाग स्थित सिद्धपीठ श्री काली माता मंदिर और सिद्धपीठ नौ देवी मंदिर में हाल ही में दोनों महंतों सज्जन गिरि और रामगिरि को हटाकर नए महंतों की नियुक्ति के बाद अब पांच महीने पुरानी प्रशासनिक जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले की परतें खोल दी हैं।
ताजा घटनाक्रम में जहां दोनों महंतों को पद से हटाकर नए महंत नियुक्त हो चुके हैं, वहीं अब सामने आई तीन प्रशासनिक अफसरों की संयुक्त जांच रिपोर्ट में उनके दावों, दस्तावेजों और गतिविधियों को संदिग्ध बताते हुए कई गंभीर तथ्य उजागर किए गए हैं।
यह जांच सज्जन गिरि की रामगिरि के विरुद्ध शिकायत पर बैठाई गई थी। जिसके बाद जिलाधिकारी ने एडीएम प्रशासन, एसडीएम और एसपी सिटी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने 30 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। जिसमें सामने आया कि राजस्व अभिलेखों में सज्जन गिरि और रामगिरि के नाम नहीं हैं।
वहीं रामगिरि के खिलाफ महिला संबंधी अपराध में अभियुक्त रह चुके होने की बात भी सामने आई है। जांच में सबसे अहम तथ्य यह सामने आया कि रिकार्ड में अंतिम बार वेदांत गिरि का नाम दर्ज पाया गया, जिनके 2015 में ब्रह्मलीन होने के बाद से ही सज्जन गिरि और रामगिरि में श्री काली मंदिर की गद्दी को लेकर विवाद शुरू हुआ।
खबरें और भी
सज्जन गिरि ने स्वयं को 2016 से महंत बताते हुए जूना अखाड़ा के लेटरपैड पर महंताईनामा प्रस्तुत किया था, लेकिन जांच में यह दस्तावेज न तो पंजीकृत मिला और न उस पर तिथि अंकित थी। वहीं रामगिरि ने संत समिति के पत्र और स्टांप पेपर पर अनुबंध के जरिए दावा पेश किया, लेकिन उनके दस्तावेज भी कानूनी रूप से प्रमाणित नहीं पाए गए।
पूर्व के दोनों महंत सज्जन गिरि और रामगिरि के दावों के बाद लोगों ने भी उनकी भूमिका पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे। इसको लेकर शिकायत दर शिकायत का सिलिसिला चलता रहा। पांच महीने पुरानी जांच में निष्कर्ष यह निकला था कि सज्जन गिरि के दावे भी जमीन और महंताई के मामलों में प्रमाणित नहीं पाए गए।
मंदिर की जमीन पहले स्व. कृष्णानंद गिरि के शिष्य वेदांत गिरि के नाम दर्ज थी, लेकिन उनके बाद उत्तराधिकार को लेकर कोई वैध प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
इस पूरे विवाद को लेकर दोनों पक्षों ने अदालतों का भी रुख किया था, लेकिन न तो हाईकोर्ट और न ही सिविल कोर्ट से किसी को राहत मिली। ऐसे में अब जूना अखाड़ा द्वारा दोनों को हटाकर नए महंतों की नियुक्ति के बाद प्रशासनिक रिपोर्ट ने इस लंबे विवाद की असल तस्वीर सामने ला दी है।