मुरादाबाद में बड़ा खुलासा: नदी और रास्तों की जमीन पर भी कर दिए पट्टे, सच सामने आया तो कांपे भूमाफिया
मुरादाबाद के कल्याणपुर एतमाली गांव में नदी, रेत और सार्वजनिक रास्तों की जमीन पर हुए अवैध पट्टों का बड़ा खुलासा हुआ है। चकबंदी प्रक्रिया शुरू होने पर भ ...और पढ़ें

भूमि की नापजोख कराती चकबंदी विभाग की टीम। स्रोत : विभाग
HighLights
अवैध रूप से पट्टे करने की पूरी प्रक्रिया में शामिल अफसर व भूमाफिया सुरक्षित
जैसे-जैसे बढ़ती गई चकबंदी की कार्रवाई, खुलता गया पर्दे के पीछे का पूरा खेल
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। कल्याणपुर एतमाली गांव में नदी, रेत और सार्वजनिक रास्ते में दर्ज भूमि पर पट्टे का खेल भले ही उजागर हो गया है। मगर, पर्दे के पीछे खड़े असल खिलाड़ी भूमाफिया गिरोह पूरी तरह से बच गए हैं। इतना ही नहीं भूमाफिया गिरोह के एजेंट के रूप में काम करने वाले अफसर भी सुरक्षित हैं। चूंकि, खेल वर्ष 1970 से शुरू हुआ। ऐसे में खेल में शामिल तमाम अफसर तो सेवानिवृत्त भी हो गए होंगे।
मगर, सिलसिला 2006-07 तक चला। ऐसे में तमाम मौजूदा अफसरों का भी खेल में शामिल होना तय है। पूरे प्रकरण में चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2025 के अक्टूबर में गांव में जब चकबंदी आई, तभी भूमाफिया गिरोह को खेल खुलने का डर सताने लगा था। इसलिए चकबंदी रुकवाने का उन्होंने पूरा ताना-बाना बुना।
किसानों और ग्रामीणों को आगे कर चकबंदी प्रक्रिया के लिए भड़कया। फिर बाकायदा कलक्ट्रेट में प्रदर्शन भी करवाया। फरवरी माह में बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान एकत्र होकर कलक्ट्रेट पहुंचे और डीएम से क्षेत्र में शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। तर्क दिया कि गांव के अधिकांश क्षेत्र में मकान और रामगंगा का बहाव है, इसलिए कृषि भूमि न होने के कारण यहां चकबंदी प्रक्रिया लागू करने का कोई औचित्य नहीं है।
मगर, चकबंदी के लिए हुए निर्णय पर किसी का जोर ना चला। चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुआ। पूर्व बन्दोबस्त 1365 फसली व खतौनी 1359 फसली के अभिलेखों की जांच में टीम हैरत में पड़ गई। पता चला कि जो भूमि राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6 नदी, रेत और सार्वजनिक रास्ते में दर्ज है।
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जिसके पट्टे किये ही नहीं जा सकते। उसके भी पट्टे कर दिये गए। ना सिर्फ पट्टे किये गए। सिलसिला 2007 तक चलता रहा। किसी ने भी इसकी सुध नहीं ली। ऐसे में सरकारी भूमि अब कब्जामुक्त होने के बाद संभल व अमरोहा की तर्ज पर पूरे खेल में शामिल अफसरों व भूमाफिया गिरोह के सरगना के चेहरे भी बेनकाब होना जरूरी है।
एमडीए के मास्टर प्लान में आता है क्षेत्र
यह पूरा क्षेत्र एमडीए के मास्टर प्लान में भी आता है। नगर निगम का वार्ड-36 और वार्ड-44 भी इसी के अंतर्गत आता है। क्षेत्र 1995 में नगर निगम के अधीन आया था।
फंसने के डर से पट्टाधारक सामने ना आए, कब्जा किसी और का...
अवैध रूप से हुए इस पट्टे के खेल में एक बात और सामने आई। जिन 101 पट्टाधारकों के पट्टे निरस्त हुए हैं। उसमे सामने आया कि किसी भी नोटिस पर कोई पट्टाधारक सामने नहीं आाया। इतना ही नहीं इन पट्टाधारकों के इंद्राज संबंधित प्रपत्र भी नहीं मिले। सिर्फ पट्टे पर पट्टा आगे बढ़ता रहा। ऐसे में इस बात की आशंका भी जताई जा रही है कि मुखौटे के रूप में दूसरे को आगे कर भूमाफिया गिरोह भूमि को हथियाने में लगा था।
ऐसे में कुल 129.4143 हेक्टेयर में शेष बचे 35.9100 हेक्टेयर भूमि पर जमे पट्टाधारकों से पूछताछ की जाए तब पूरी तस्वीर साफ हो सकती है क्योंकि पूरी भूमि पर यही पट्टाधारक ऐसे हैं तो लिखत-पढ़त में सामने आए हैं। डीएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डीएम कोर्ट में इन पट्टाधारकों की कहानी टिकने वाली नहीं क्योंकि संबंधित भूमि के पट्टे किये ही नहीं जा सकते।