खेतों में काम थमा, घरों में कैद हुए बच्चे और महिलाएं; मुरादाबाद के खादर में तेंदुए का खौफ
मुरादाबाद के लालापुर पीपलसाना और मलकपुर सेमली गांवों में तेंदुए के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं, जहां लोग रातभर पहरा दे रहे हैं और खेतों में जाने से ड ...और पढ़ें

मुरादाबाद के खादर में तेंदुए का खौफ।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। ठाकुरद्वारा क्षेत्र के लालापुर पीपलसाना और मलकपुर सेमली गांवों में तेंदुए का आतंक अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है।
बुधवार की रात लालापुर पीपलसाना किसी पहरेदार गांव की तरह नजर आया। गलियों में लाठी-डंडे लेकर ग्रामीण पूरी रात पहरा देते रहे, जबकि घरों के भीतर महिलाएं और बच्चे सहमे हुए सुबह होने का इंतजार करते रहे।
गांव में हर आहट लोगों को तेंदुए की मौजूदगी का अहसास करा रही थी। हमले के डर से खेतों पर भी किसान काम करने के लिए नहीं जा रहे हैं।
रामगंगा नदी के खादर के गांव में लगातार हो रहे तेंदुओं के हमलों ने ग्रामीणों की दिनचर्या बदलकर रख दी है। किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं और बच्चों का घर से बाहर निकलना लगभग बंद हो गया है। लालापुर पीपलसाना के साथ-साथ मलकपुर सेमली गांव में लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तेंदुए को पकड़ने की ठोस कार्रवाई ही उन्हें राहत दिला सकती है।
महिपाल सिंह बोले एक महिला की जान जाने के बाद भी हालात नहीं बदले। यदि वन विभाग समय पर पहुंच जाता तो दूसरी घटना टाली जा सकती थी। कुलदीप सिंह ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद अधिकारी सक्रिय नहीं हुए, जिससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
तेंदुए के हमले में जान गवांने वाली संतोष देवी के पति वीरेंद्र सिंह ने कहा कि परिवार आज भी उस दर्द से नहीं उबर पाया है और अब फिर उसी गांव में हमला होने से लोगों का डर कई गुणा बढ़ गया है। गांव में पेयजल टैंक की दीवार पर बैठे तेंदुए टार्च की तेज रोशनी डालने पर भी वे वहां से नहीं हटे।
दो तेंदुए तो दिखाई दिए, लेकिन आसपास और भी तेंदुए होने की आशंका से लोग घर से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा रहे। किसान सुरेंद्र सिंह की सतर्कता से जान तो बच गई, लेकिन घटना का ऐसा सदमा लगा कि कमरे में पहुंचते ही वह बेहोश हो गए। गांव में सुरक्षा के लिए वन विभाग की चार सदस्यीय टीम तैनात होने का दावा किया गया था, लेकिन जरूरत पड़ने पर कोई मौके पर नहीं पहुंचा।
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एक कर्मचारी को शूटर बताया जा रहा था, लेकिन उसका फोन तक नहीं उठा। पड़ोसी के मोबाइल से संपर्क करने की कोशिश की गई तो भी आने से इनकार कर दिया गया। सुबह करीब सात बजे वन विभाग की टीम गांव पहुंची, लेकिन तब तक दोनों तेंदुए पेयजल टैंक की दीवार से उतरकर खेतों की ओर निकल चुके थे।
अब रात नहीं, हर पल डर का पहरा
लालापुर पीपलसाना और मलकपुर सेमली में तेंदुए का आतंक केवल रात तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण दिन में भी खेतों में अकेले जाने से बच रहे हैं। महिलाएं पशुओं के लिए चारा लेने नहीं निकल रहीं और बच्चे घरों में कैद हैं। शाम ढलते ही गांव की गलियां सूनी हो जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तेंदुए को पकड़कर जंगल में नहीं छोड़ा जाता, तब तक गांव में सामान्य जीवन लौटना मुश्किल है।