मुरादाबाद में बड़ा खेल! एक ही परिवार को बांट दिए 12 फ्लैट, समिति की जांच रिपोर्ट में खुले कई राज
मुरादाबाद की माया नगर सहकारी आवास समिति की जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे हुए हैं, जिसमें एक ही परिवार को 12 फ्लैट आवंटित करने और नियमों का उल्लंघन कर च ...और पढ़ें

माया नगर आवासीय सहकारी समिति
HighLights
असली सदस्य दर-दर भटके... माया नगर की रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे
मोहसिन पाशा, मुरादाबाद। एक टावर में कुल 28 फ्लैट और उनमें से करीब आधे यानी 12 फ्लैट एक ही परिवार के नाम। यह दावा किसी शिकायतकर्ता का नहीं, बल्कि माया नगर सहकारी आवास समिति की अंतरिम प्रबंध समिति की जांच रिपोर्ट का है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों और परिवारों को लाभ पहुंचाया, जबकि वर्षों से भूखंड और फ्लैट का इंतजार कर रहे वास्तविक सदस्य अपने अधिकार से वंचित रह गए।
रिपोर्ट के अनुसार विनायक अपार्टमेंट में फ्लैट आवंटन के दौरान सबसे अधिक लाभ बिज परिवार को मिला। एक ही परिवार के 12 सदस्यों के नाम टावर-बी में फ्लैट दर्ज हैं। इतना ही नहीं, तत्कालीन सभापति पूर्व विधायक फूलकुंवर ने अपने और अपने बेटे के नाम फ्लैट आवंटित कराए, जबकि तत्कालीन सचिव अजय कुमार दुबे ने भी अपने परिवार के सदस्यों को अलग-अलग फ्लैट दिलाए।
कई अन्य परिवारों को भी एक से अधिक फ्लैट आवंटित किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सदस्यताओं के हस्तांतरण के लिए न तो प्रबंध समिति का कोई वैध प्रस्ताव मिला और न ही नियमानुसार हस्तांतरण शुल्क जमा कराने का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इसलिए इन सदस्यताओं की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार समिति के अभिलेखों में बड़े पैमाने पर वाइटनर, कटिंग और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। कई मामलों में मूल सदस्यों की जानकारी के बिना उनकी सदस्यता दूसरे लोगों के नाम स्थानांतरित कर दी गई। नामिनी के नाम बदलने तक के संकेत मिले हैं। यही नहीं, समिति की बहुमूल्य जमीन को वर्षों बाद कम कीमत वाली भूमि से एक्सचेंज कर दिया गया।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रक्रिया के लिए भी कोई वैध प्रस्ताव उपलब्ध नहीं है, जिससे समिति को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। लाकड़ी फाजलपुर योजना में भी रिकार्ड अधूरे मिले। 678 सदस्यों में से अधिकांश की मूल फाइलें उपलब्ध नहीं हैं। केवल 16 सदस्यों की अपूर्ण पत्रावलियां कार्यालय में मिलीं।
रिपोर्ट के अनुसार समिति के बैंक खातों का संचालन भी नियमों के विरुद्ध किया गया। खाते बिल्डर के साथ संयुक्त हस्ताक्षरों से संचालित किए गए और अभिलेखों पर विधिवत हस्ताक्षर तक नहीं मिले। अंतरिम प्रबंध समिति का मानना है कि समिति अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक गई।
जिन लोगों ने वर्षों पहले भूखंड के लिए धन जमा किया, उन्हें आज तक कब्जा नहीं मिला, जबकि समिति की बहुमूल्य जमीन उद्योगपतियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंच गई।
रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा-65 के तहत विस्तृत जांच कराने, अवैध सदस्यताओं का सत्यापन, जमीन का चिन्हांकन, अवैध कब्जे हटाने और दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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अंतरिम कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, इन परिवारों और पदाधिकारियों को नियमों के विपरीत एक से अधिक फ्लैट आवंटित किए गए:
- बिज परिवार : सुकेश कुमार बिज, सुनीता बिज, इशु बिज, भोला नाथ बिज, आशा बिज, अशोक कुमार बिज, श्वेता बिज, अनिल कुमार बिज, विमल बिज, अनुभव बिज, विनोद कुमार बिज और सुदमन कुमार को टावर-बी में कुल 12 फ्लैट आवंटित किए गए।
- मल्होत्रा परिवार : केवल कृष्ण मल्होत्रा, अजला मल्होत्रा और मेघा मल्होत्रा को तीन फ्लैट आवंटित किए गए।
- तत्कालीन सभापति फूलकुंवर : रिपोर्ट के अनुसार स्वयं फूलकुंवर को एक फ्लैट और उनके पुत्र कुंवर मयंक सिंह को एक अन्य फ्लैट आवंटित किया गया।
- तत्कालीन सचिव अजय कुमार दुबे : अजय कुमार दुबे, उनके पुत्र राहुल दुबे और राशि दुबे के नाम तीन फ्लैट आवंटित किए गए।
- महेन्द्रपाल सिंह राठी परिवार : महेन्द्रपाल सिंह राठी और उनकी पुत्री अनविता को दो फ्लैट आवंटित किए गए।
- अग्रवाल परिवार : सुनील कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी वाणी अग्रवाल को दो फ्लैट आवंटित किए गए।
रिपोर्ट का दावा है कि इन सदस्यताओं के हस्तांतरण के संबंध में प्रबंध समिति का कोई वैध प्रस्ताव और नियमानुसार हस्तांतरण शुल्क जमा होने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। इसी आधार पर अंतरिम प्रबंध समिति ने इन आवंटनों की वैधता पर प्रश्न उठाते हुए धारा-65 के तहत विस्तृत जांच की संस्तुति की है।