चाचा कांग्रेसी नेता, भतीजा सचिव... और जनता के 100 करोड़ गोल! मायानगर समिति में चल रही 'पारिवारिक लूट'
मुरादाबाद की मायानगर सहकारी आवास समिति में 100 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। 1975 से भूखंडों के आवंटी अपनी जमीन के लिए भटक रहे हैं। कांग्रेस नेत ...और पढ़ें

मायानगर सहकारी आवास समिति
HighLights
1975 से आज तक भटक रहे आवंटी, करोड़ों की जमीन खुर्दबुर्द
जांच में दोषी, फिर भी सालों तक चलता रहा हेराफेरी का खेल
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मायानगर सहकारी आवास समिति में घोटाला महज जमीन की हेराफेरी नहीं, बल्कि सत्ता, रिश्तेदारी और सहकारी व्यवस्था की सुनियोजित लूट का जीता जागता उदाहरण है। समिति जिम्मेदार रहे कांग्रेस नेता अपने ही भतीजे को सचिव बनवाकर करोड़ों रुपये की संपत्तियों का खेल किया। एक ही परिवार के दो लोगों के शीर्ष पदों पर रहते हुए समिति की जमीन को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि समिति के सैकड़ों मूल आवंटियों ने वर्ष 1975 में भूमिधन जमा किया, रजिस्ट्री कराई, दाखिल-खारिज भी हुआ, इसके बावजूद आज तक उन्हें अपने भूखंडों पर कब्जा नहीं मिल सका। जांच आख्या के अनुसार, इस पूरे खेल से समिति को करीब 100 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।
प्रबंध कमेटी ने मूंदी आंखें
समिति के पूर्व सचिव नवनीत कुमार शर्मा और उससे पहले लंबे समय तक सचिव रहे अजय दूबे पर गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से गाटा संख्या-1023 सहित कई कीमती भूखंडों की वर्ष 2014-15 में फर्जी रजिस्ट्री करा दी गई, जबकि वह जमीन समिति की संपत्ति थी। प्रबंध कमेटी ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया और जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं।
जांच में यह भी सामने आया कि आवासीय भूखंडों पर नियमों के विपरीत बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां संचालित करवाई गईं। केवल 10 प्रतिशत लोग ही आवासीय में रह गए। सहकारी समिति नियमावली-1968 के उपनियम 53(1) और 53(2) का खुलेआम उल्लंघन करते हुए भूखंडों का विभाजन किया गया, ले-आउट संशोधन कराए बिना ही भू-उपयोग बदल दिया गया।
खबरें और भी
काट रहे अदालतों के चक्कर
चंदौसी निवासी सदस्य राजीव कुमार बताते हैं कि उनके और उनके भाई के प्लाट की रजिस्ट्री हो चुकी है, बावजूद इसके वे आज अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे पास कागज पूरे हैं, फिर भी कब्जा नहीं मिला। हर बार कोई नया बहाना बना दिया जाता है। वे कहते हैं।अदालत में गुहार लगाने के बाद आदेश हमारे हक में हुआ, इसके बाद भी प्लाट नहीं मिला है।
लगभग तीन बीघा भूमि पर बिना निबंधक की अनुमति के कथित सचिव के करीबी लोगों द्वारा कब्जा कराया गया। गाटा संख्या-2674 और 2676 में फर्जी गिफ्ट डीड के जरिए गैर-आवंटियों को जमीन दे दी गई, जबकि मूल आवंटी और उनके उत्तराधिकारी आज भी भटक रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में अदालत को गुमराह करने के लिए झूठे हलफनामे दाखिल किए गए।
गलत हलफनामे प्रस्तुत कराए गए
रीना अग्रवाल और राजीव अग्रवाल के मामलों में रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज होने के बावजूद कोर्ट में यह कहा गया कि समिति का उस जमीन से कोई संबंध नहीं है। आरोप है कि मोटी रकम देकर शिखा बसू के पक्ष में गलत हलफनामे प्रस्तुत कराए गए। कुछ गाटा संख्या की जमीन पर फर्जी वसीयत बनाकर सचिव के करीबियों को कब्जा दिलाने के भी आरोप हैं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि समिति ने वर्षों से एजीएम नहीं कराई, न ही बैलेंस शीट प्रस्तुत की गई। आर्थिक अपराधों और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए पूरी व्यवस्था को ठप रखा गया। इन तमाम तथ्यों को देखते हुए सहकारी अधिकारी (आवास), मुरादाबाद ने समिति की प्रबंध कमेटी को पदच्युत कर अंतरिम प्रबंध कमेटी गठन की संस्तुति की थी।
अंतरिम कमेटी के गठन को दो अफसरों के लगभग तय
मायानगर सहकारी आवास समिति की अंतरिम कमेटी बनाए जाने के लिए पांच सदस्यों की जरूरत है। प्रशासक यानी कार्यवाहक सभापति की भूमिका सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय की नियुक्ति हो चुकी है। सदस्य के तौर पर सहकारी अधिकारी, आवास विकास परिषद, सतीश कुमार द्विवेदी और एडीसीओ कंचन सिंह हैं।
सचिव समेत दो सदस्यों की नियुक्ति और होनी है। इनमें एक राजस्व विभाग और दूसरा सहकारिता विभाग से रहेगा। बताया जा रहा है कि इसके लिए दो अधिकारियों के नाम लगभग तय हो गए हैं। एक-दो दिन में नियुक्तियां होने के बाद समिति का दफ्तर खोलकर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।