Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मुरादाबाद का 'मायानगर' घोटाला: फ्लैट के नाम पर ₹2.09 करोड़ का खेल, 44 खातों ने खोली सिस्टम की पोल!

    Updated: Wed, 25 Mar 2026 04:00 PM (IST)

    मुरादाबाद की मायानगर सहकारी आवास समिति में 2.09 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। ऑडिट में 44 ऐसे लोगों की पहचान हुई जिन्होंने बिना बुकिंग के पैसे ज ...और पढ़ें

    मायानगर सहकारी समिति

    मायानगर सहकारी समिति

    HighLights

    1. ठेकेदार भुगतान के नाम पर रकम की निकासी

    2. जांच में रिकार्ड से छेड़छाड़ के भी मिले संकेत

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मायानगर सहकारी आवास समिति का घोटाला अब सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक जालसाजी के रूप में सामने आ रहा है। करोड़ों रुपये की इस कथित लूट में सबसे बड़ा झटका उन असल सदस्यों को लगा है, जिन्हें आज तक न फ्लैट मिला, न जमीन जबकि फर्जी सदस्य बनकर शहर के कई रसूखदार लोगों ने मोटा निवेश कर अपनी जगह पक्की कर ली थी लेकिन, मामला खुलने से उनका सपना भी टूटता नजर आ रहा है।

    ताजा आडिट में जो खुलासा हुआ है, वह पूरे सहकारी सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है। करीब डेढ़ महीने से चल रहे आडिट के दौरान 44 ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिन्होंने बिना किसी फ्लैट बुकिंग के ही दो करोड़ नौ लाख रुपये समिति के खाते में जमा करा दिए। हैरानी की बात यह है कि इन जमाओं के बदले कोई आवंटन नहीं था।

    मायानगर घोटाला: घटनाक्रम की समयरेखा

    समय/तारीख घटनाक्रम (विवरण)
    2014-15 समिति की जमीन और सदस्यता में अनियमितताओं के आरोप पहली बार सामने आए।
    2025 (प्रारंभ) वित्तीय गड़बड़ियों और शिकायतों में भारी तेजी आई।
    मध्य 2025 सहकारी अधिकारी (आवास विकास) द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की गई।
    2025 (मंडल स्तर) मंडलायुक्त आंजनेय सिंह द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष कमेटी का गठन।
    06 अक्टूबर 2025 अपर आवास आयुक्त विनय कुमार मिश्र ने समिति को भंग करने का आदेश दिया।
    अक्टूबर 2025 सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय को समिति का प्रशासक नियुक्त किया गया।
    जनवरी-फरवरी 2026 ज्येष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी अरुणा यादव द्वारा गहन आडिट (Audit) की शुरुआत।
    मार्च 2026 बड़ा खुलासा: 44 फर्जी जमाकर्ताओं और ₹2.09 करोड़ के अवैध लेनदेन के साक्ष्य मिले।

    इस रकम को ठेकेदार के भुगतान के नाम पर निकाल लिया गया। सबसे चौंकाने वाला मामला समिति के पूर्व उपसभापति डीपी सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने फ्लैट के लालच में 20 लाख रुपये जमा कराए। यह रकम मात्र चार दिन के भीतर ठेकेदार के नाम पर भुगतान दिखाकर निकाल ली गई। यही पैटर्न अन्य जमा रकमों के साथ भी अपनाया गया।

    जमा, फिर भुगतान के नाम पर निकासी होती रही। सबको लालच फ्लैट देने का ही दिया गया। आडिट में करोड़ों के घपले की परतें अब तक खुल चुकी हैं। समिति में एक हजार से अधिक सदस्य हैं, छह महीने से चल रही जांच के बावजूद किसी असली सदस्य को राहत नहीं मिली। रिकार्ड बता रहा है कि हेरफेर कर बाहरी लोगों को फायदा पहुंचाया गया।

    मायानगर घोटाला: जांच एजेंसियां और उनकी भूमिका

    अधिकारी / जांच एजेंसी मुख्य भूमिका और कार्रवाई
    सहकारी अधिकारी (आवास विकास) प्रारंभिक जांच: मामले की शुरुआत में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि की।
    मंडलायुक्त (आंजनेय सिंह) विस्तृत जांच: उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर व्यापक स्तर पर जांच के निर्देश दिए।
    अपर आवास आयुक्त (विनय कुमार मिश्र) कठोर कार्रवाई: घोटाला सामने आने पर पूरी समिति को तत्काल प्रभाव से भंग किया।
    ज्येष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी (अरुणा यादव) वित्तीय ऑडिट: वर्तमान में खातों की बारीकी से जांच और अवैध लेनदेन का खुलासा कर रही हैं।
    प्रशासनिक कमेटी (विनय पांडेय, आदि) निगरानी व नोटिस: समिति का संचालन, जांच की निगरानी और दोषियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया।

    प्रशासनिक कमेटी के गठन के बाद आडिट में वित्तीय गड़बड़ी, फर्जी भुगतान और रिकार्ड में छेड़छाड़ के कई साक्ष्य सामने आए हैं। इसके बावजूद अब तक किसी बड़े जिम्मेदार के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होना सवाल भी खड़े कर रहा है। छह अक्टूबर 2025 को अपर आवास आयुक्त एवं अपर निबंधक विनय कुमार मिश्र ने समिति को भंग कर दिया था।

    उस समय पूर्व विधायक फूलकुंवर अध्यक्ष और नवनीत शर्मा सचिव थे। भंग होने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय को सभापति और अनिल त्रिपाठी को सचिव बनाया गया। इसके साथ ही एडीसीओ कंचन सिंह और सहकारी अधिकारी सतीश कुमार द्विवेदी को सदस्य बने हैं।

    खबरें और भी

    लेकिन राजस्व विभाग से नियुक्त कर्मचारी ने ज्वाइन तक नहीं किया जो जांच की गंभीरता पर भी सवाल खड़ा करता है। स्थानीय सदस्यों और लोगों का आरोप है कि शुरुआती जांच में करोड़ों का घपला सामने आने के बावजूद अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।

    कई अहम फाइलें और रिकार्ड संदिग्ध स्थिति में पाए गए हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। मायानगर घोटाला अब सिर्फ वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सहकारी संस्थाओं पर जनता का भरोसा पूरी तरह डगमगा सकता है।

    जांच जारी, नोटिस होंगे जारी

    सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय का कहना है कि जिन लोगों ने बिना सदस्यता या वैध बुकिंग के पैसे जमा किए हैं, उन्हें नोटिस देकर पूछा जाएगा कि उन्होंने किस नियम के तहत पैसा जमा किया। उनके मुताबिक, सिर्फ वैध सदस्य ही फ्लैट बुकिंग के नाम पर पैसा जमा कर सकते थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जिस तरह से पैसा जमा हुआ और निकाला गया, उससे साफ संकेत मिलता है कि यह घपला योजनाबद्ध तरीके से किया गया।

     

    अपर आवास आयुक्त एवं अपर निबंधक विनय कुमार मिश्र ने घपला होने का मामला प्रकाश में आने के बाद समिति को भंग किया था लेकिन, छह महीने से जांच चल रही है, अभी तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी।मैंने तो फ्लैट के लिए धनराशि जमा की थी। इसी तरह और भी तमाम लोगों ने धनराशि जमा की है। समिति को बहाल कराने के लिए प्रशासन को जल्द जांच पूरी करके चुनाव कराना चाहिए।

    - डीपी सिंह, पूर्व उपसभापति, माया नगर सहकारी आवास समिति, मुरादाबाद


    यह भी पढ़ें- बचने के रास्ते बंद! मायानगर सहकारी समिति के घोटालेबाजों पर प्रशासन ने कसा शिकंजा, हाईकोर्ट में भी होगी घेराबंदी


    यह भी पढ़ें- चाचा कांग्रेसी नेता, भतीजा सचिव... और जनता के 100 करोड़ गोल! मायानगर समिति में चल रही 'पारिवारिक लूट'