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    सस्पेंस खत्म! मुरादाबाद में आजम खान की 'बेटी' की एंट्री, क्या 2027 के लिए बिछ गई सियासी बिसात?

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 08:31 AM (IST)

    आजम खां की मुंहबोली बेटी एकता कौशिक की मुरादाबाद में सक्रियता ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। आंबेडकर जयंती पर काफिले के साथ उनकी मौजूदगी और सोशल मीडिया पो ...और पढ़ें

    एकता कौश‍िक

    एकता कौश‍िक

    HighLights

    1. नगर विधानसभा में सर्वाधिक 39 हजार 850 नए वोटर बने, साल 2022 में हजार से कम था जीत-हार का अंतर

    मोहसिन पाशा, मुरादाबाद। डा. भीमराव आंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में कई गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नेता मोहम्मद आजम खां की मुंहबोली बेटी एकता कौशिक की सक्रियता ने शहर की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी को सिर्फ एक औपचारिक भागीदारी नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दस्तक के तौर पर देखा जा रहा है।

    खास बात यह है कि इससे पहले एकता कौशिक इंटरनेट मीडिया पर मुरादाबाद आना अच्छा लगता है पोस्ट लिखकर भी जिले की सियासत में दस्तक देने का संकेत दे चुकी हैं, जिससे अब उनके इरादों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।

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    मंगलवार को आंबेडकर जयंती के मौके पर जिस तरह से एकता कौशिक काफिले के साथ शहर पहुंचीं और स्थानीय कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आईं, उसने साफ कर दिया कि उनकी मौजूदगी अब नियमित होने वाली है। सपा के स्थानीय नेताओं के बीच भी यह चर्चा है कि वह मुरादाबाद नगर सीट से सियासी पारी शुरू करने की तैयारी में हैं।

    इसी उद्देश्य से यहां लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती हैं। उन्होंने कई नेताओं से यह भी कहा है कि उन्हें शहर के अधिक से अधिक कार्यक्रमों में शामिल कराया जाए, ताकि वह स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर सकें। एकता कौशिक की इस सक्रियता को उनके आजम खां से करीबी रिश्ते के बिना नहीं देखा जा रहा।

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    उन्हें आजम खां की मुंहबोली बेटी के रूप में जाना जाता है और यह रिश्ता उनकी सबसे बड़ी सियासी ताकत माना जा रहा है। पिछले साल आजम खां पर आयकर विभाग की कार्रवाई के दौरान उनके गाजियाबाद स्थित घर पर भी छापेमारी हुई थी, तब आजम खां ने खुलकर कहा था कि क्या ये गुनाह है कि वो मेरी बेटी है।

    इस बयान ने दोनों के रिश्ते को सार्वजनिक रूप से मजबूत किया और राजनीतिक पहचान भी दी थी। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले रामपुर सीट से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा हुई थी, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब मुरादाबाद में उनकी सक्रियता को उनके सियासी करियर की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

    कुल मिलाकर, आंबेडकर जयंती के मंच से लेकर इंटरनेट मीडिया पोस्ट तक, एकता कौशिक के हर कदम को अब सियासी नजरिए से देखा जा रहा है। मुरादाबाद की सियासत में यह नई हलचल आने वाले समय में किस दिशा में जाएगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि 2027 के चुनाव से पहले यहां नई बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है।

    सपा के लिए मुस्लिमों को साधना बनेगा चुनौती

    मुरादाबाद शहर विधानसभा सीट पर अब तक सपा मुस्लिम प्रत्याशी उतारती रही है, लेकिन बदलते चुनावी समीकरणों के बीच अब पार्टी नए प्रयोग पर भी विचार कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में रूचि वीरा के सांसद चुने जाने के बाद यह चर्चा तेज हुई कि जहां मुस्लिम प्रत्याशी कम अंतर से हारते हैं, वहां गैर-मुस्लिम चेहरे को उतारने से जीत की संभावना बढ़ सकती है।

    ऐसे में एकता कौशिक का नाम एक संभावित विकल्प के तौर पर हो सकता है, जो गैर-मुस्लिम होते हुए भी आजम खां के प्रभाव के कारण मुस्लिम वोटरों तक पहुंच बना सकती हैं हालांकि, यह रणनीति सपा के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। पार्टी को अपने पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक को साधने के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण भी बनाने होंगे।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर संतुलन नहीं बना तो अन्य दल मुस्लिम वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं। एकता की एंट्री से शहर सीट पर पहले से सक्रिय दावेदारों के बीच भी हलचल बढ़ गई है।

    पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी को प्रबल दावेदार माना जा रहा है, जबकि अंसारी समाज से जुड़े कई अन्य नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। ऐसे में एकता कौशिक की एंट्री ने सपा के भीतर प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है।

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