Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    NHAI की रिंग रोड परियोजना में फंसा पेंच, 33 किमी लंबे मार्ग पर 'गाटा' विवाद ने बढ़ाई टेंशन

    Updated: Wed, 01 Apr 2026 04:29 PM (IST)

    मुरादाबाद की 33 किमी लंबी एनएचएआई रिंग रोड परियोजना 76% पूरी हो चुकी है, लेकिन किसानों के 78 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान लंबित है। विवादित गाटों औ ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक चित्र

    प्रतीकात्मक चित्र

    HighLights

    1. जुलाई तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य, विवादित गाटों ने रोकी भुगतान प्रक्रिया

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की महत्वाकांक्षी रिंग रोड परियोजना अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, अब 24 प्रतिशत काम ही शेष बताया जा रहा है, लेकिन किसानों के मुआवजे के भुगतान का मामला अब भी अधूरा है। परियोजना के दोनों पैकेजों में कुल करीब 78 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने से हजारों किसान प्रभावित हैं और प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    पैकेज-एक रिंग रोड के लिए एनएचएआइ ने 185 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था, जिसकी कुल लागत 453 करोड़ रुपये तय हुई थी। इसमें से अब तक 432 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 21 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं। वहीं पैकेज-दो, जो मुरादाबाद-ठाकुरद्वारा-टिहरी हाईवे के चौड़ीकरण से जुड़ा है, उसमें 170 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई।

    इस पैकेज के लिए 547 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए, लेकिन किसानों को अब तक 490 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं। यहां 57 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर पाकबड़ा से पहले सीएनजी पंप के पास से शुरू होकर करीब 33 किलोमीटर लंबी रिंग रोड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

    यह मार्ग शहर के बाहर से होते हुए दलपतपुर के पास रामपुर दिशा में हाईवे से जुड़ेगा। एनएचएआइ के अनुसार रिंग रोड का करीब 76 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और जुलाई तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, पैकेज-दो में कार्य की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है, जहां केवल 41 प्रतिशत निर्माण ही पूरा हो पाया है।

    खबरें और भी

    अधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों पर विवादित गाटा और दस्तावेजों की कमी के कारण भुगतान प्रक्रिया अटकी हुई है, जिससे निर्माण भी प्रभावित हो रहा है।

    रिंग रोड को शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और भारी वाहनों को बाहरी मार्ग देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन मुआवजे का लंबित भुगतान इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधा बनता जा रहा है। किसान लगातार भुगतान की मांग उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन जांच प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।

     

    जिला प्रशासन ने मुआवजा वितरण में तेजी से काम किया है। हम पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से चला रहे हैं। जिन किसानों का भुगतान अभी लंबित है, उनके प्रपत्रों की गहन जांच की जा रही है। जैसे ही दस्तावेज सही पाए जाएंगे, भुगतान जारी कर दिया जाएगा। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी पात्र किसान का मुआवजा लंबित न रहे।

    - अरविंद कुमार, पीडी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, मुरादाबाद


    यह भी पढ़ें- AI के आगे फेल हुई 'सुल्तान' की चालाकी: 21 साल बाद यक्ष एप ने मुरादाबाद के हिस्ट्रीशीटर को ऐसे पहचाना