चाय की चुस्की से कीमो और सर्जरी के बाद रिकवरी होगी फास्ट, एमिटी नोएडा की प्रोफसर ने बनाई विशेष Herbal Tea
एमिटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सर्जरी और कीमोथेरेपी के बाद मरीजों की रिकवरी के लिए एक विशेष हर्बल चाय विकसित की है। यह चाय पांच औषधीय पौधों के ...और पढ़ें

एमिटी नोएडा की प्रोफेसर हर्षा ने बनाई हर्बल टी। फोटो: जागरण
HighLights
एमिटी ने सर्जरी और कीमोथेरेपी रिकवरी के लिए चाय बनाई
पांच औषधीय पौधों का संतुलित, सिनर्जिस्टिक मिश्रण है इसमें
सूजन, पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करती है
स्वाति भाटिया, नोएडा। सर्जरी के बाद डॉक्टर दवाइयों के साथ हल्का और सुपाच्य आहार लेने की सलाह देते हैं। अगर यही चाय शरीर की रिकवरी का भी सहारा बन जाए तो?
इसी सोच को साकार करते हुए एमिटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानियों ने एक ऐसी विशेष हर्बल चाय विकसित की है, यह सामान्य हर्बल चाय की तरह केवल पाचन, डिटाॅक्स या इम्यूनिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान के अनुसार तैयार ऐसा फार्मूला है, जो रिकवरी के दौरान शरीर की कई जरूरतों को एक साथ पूरा करने का प्रयास करता है।
इस तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट कार्यालय में आवेदन किया जा चुका है। एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइटोकेमिस्ट्री एंड फाइटोमेडिसिन के निदेशक डाॅ. हर्षा खड़खवाल के नेतृत्व में विकसित इस चाय में पांच औषधीय पौधों का संतुलित मिश्रण किया गया है।
इसके गुण
- इसमें चेनोपोडियम नेपालेंसिस से सूजन और शरीर में संक्रमण दूर करने और रिकवरी में मदद।
- एंजेलिका ग्लौका- शरीर को तनाव से उबरने, कमजोरी कम करने, प्राकृतिक एडाप्टोजेन में मदद।
- रोडोडेंड्रोन आर्बोरियम- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है और हृदय रोग में सहायक।
- फोएनिकुलम वल्गेयर (सौंफ)- गैस, पेट फूलना, अपच और मिचली जैसी समस्याओं में राहत देती है,
- पाइपर नाइग्रम (काली मिर्च) अन्य जड़ी-बूटियों के लाभकारी तत्वों का शरीर में अवशोषण बढ़ाकर उनके असर को अधिक प्रभावी बनाती है।
क्या हैं बड़ी खासियत
इसका सिनर्जिस्टिक फार्मूलेशन है। यानी सभी जड़ी-बूटियों को विज्ञान के परीक्षणों के आधार पर ऐसे अनुपात में मिलाया गया है कि वह एक-दूसरे के गुणों को बढ़ाएं। यह बाजार में मिलने वाली सामान्य हर्बल चाय से अलग है और 25 प्रतिशत तेजी से काम करती है।
वैज्ञानियों के परीक्षणों के परिणाम कैसे है अलग
- स्वाद,डिटाॅक्स, सर्दी जुखाम इम्यूनिटी जैसे सामान्य उपयोग, सर्जरी, कीमोथेरेपी और रिकवरी में सहायक।
- पांच औषधीय पौधों का वैज्ञानिक अनुपात में मिश्रण।
- जड़ी बूटियों का सामान्य मिश्रण, सिनर्जिस्टिक फार्मूलेशन, जिसमें सभी घटक एक-दूसरे के प्रभाव को बढ़ाते हैं।
- सक्रिय तत्वों का बड़ा हिस्सा पाचन के दौरान नष्ट हो सकता है - पापरिन( काली मिर्च के अर्क) के कारण लाभकारी तत्वों की 78 प्रतिशत जैव उपलब्धता।
- तेज तापमान पर सुखाने से औषधीय तेल कम हो सकते हैं। यह 45 सेलसियस से कम तापमान में सुखाया जाता है, जिससे प्राकृतिक सक्रिय तत्व सुरक्षित रहते हैं।
- एंटीआक्सीडेंट क्षमता का वैज्ञानिक परीक्षण प्राय उपलब्ध नहीं। प्रयोगशाला में परीक्षण में 89.2 प्रतिशत एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव(डीपीपीएच एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव) आईसी50:45.6 माइक्रोग्राम मिलीमीटर।
- रिकवरी के दौरान पाचन, एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा, इम्यूनिटी और ऊर्जा चार प्रमुख जरूरतों को एकसाथ पूरा करना।
- अनुमानित उत्पादन लगात 4-5 रुपये प्रति 2-3 ग्राम टीबैग।
किन समस्याओं में कारगार हुई
कीमोथैरेपी के बाद मिचली और उल्टी, मुंह और पाचन नली में सूजन, पेट का अल्सर, दवाओं से हृदय पर पड़ने वाले प्रभाव, अत्यधिक थकान, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, ऑक्सीडेटिव तनाव, लिवर पर दवाओं के प्रभाव, नसों की कमजोरी, सांस की नलियों में ऐंठन, एलर्जी की समस्याएं, जोड़ोंऔर मासपेशियों का दर्द, पाचन सबंधित समस्याएं, कीमो ब्रेन (याददाशत व एकाग्रती में कमी), चयापचय (मेटाबालिज्म) संबंधित विकार।