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    FDDI की नई पहल: पराली और जूट से बनेंगे जूते-कपड़े, मिलेगी वैश्विक पहचान; प्रदूषण भी होगा कम

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 10:00 AM (GMT+05:30)

    एफडीडीआई पराली और जूट जैसे फसल अवशेषों से सोफा कवर, जूते और कपड़े जैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद विकसित कर रहा है। यह पहल प्रदूषण कम करने, ग्रामीण रोजगार ...और पढ़ें

    AI जनरेटेड।

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    HighLights

    1. एफडीडीआई पराली-जूट से पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद विकसित कर रहा है।

    2. प्रदूषण कम करने और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य।

    3. भारत मंडपम में जूट उत्पादों की प्रदर्शनी हुई।

    चेतना राठौर, नोएडा। पराली जलने से हर साल प्रदूषण का स्तर बढ़ने की शिकायतें समाने आती रहीं हैं। इसको देखते हुए फसलों से निकलने वाले वेस्ट से विभिन्न उत्पादों को तैयार करने की दिशा में फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई) कार्य कर रहा है।

    यह पहल भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने देश के पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    उद्योग बाजार में उतारेंगे

    जूट और पराली पर शोध कर संस्थान के प्रोफेसर सोफा कवर, जूते, डिजाइनर ड्रैसेस सहित विभिन्न उत्पादों को तैयार कर उद्योगों को देंगे। इसे उद्योग बाजार में उतारेंगे। प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किए जा रहे उत्पादों को आधुनिक डिजाइन और तकनीक के साथ बाजार तक पहुंचाने का कार्य करेगा।

    इन सामग्रियों से कपड़े, जूते और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि ग्रामीण हस्तशिल्प और पारंपरिक कौशल को भी नई पहचान दे रहे हैं।

    जूट और पराली आधारित उत्पादों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी लाने में मदद मिल सकेगी। इन उत्पादों के निर्माण में रासायनिक पदार्थों का उपयोग बेहद कम या नहीं के बराबर होता है, जिससे यह पूरी तरह टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बन रहे हैं। चमड़े के उपयोग को कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    प्रदूषण होगा कम

    हर साल किसानों द्वारा पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए अब उसी पराली को उपयोगी उत्पादों में बदलने की पहल की जा रही है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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    भारत मंडपम की प्रदर्शनी में किया प्रस्तुत

    एफडीडीआई ने जूट से बने उत्पादों को प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया था। जिसे दर्शकों ने खूब पसंद भी किया था। यह पहल मेक इन इंडिया और वोकल फार लोकल जैसे अभियानों को भी मजबूती देगी। पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, बेहतर गुणवत्ता और वैश्विक बाजार से जोड़कर भारत की हरित अर्थव्यवस्था और ग्रामीण उद्यमिता को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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    संस्थान में प्रोफेसर जूट और पराली पर कार्य कर रहे हैं जिससे बनने वाले नवीन उत्पादों के लिए उद्योगों से संपर्क किया जाएगा। - मंजुमन, कार्यकारी निदेशक, एफडीडीआई

    देश में कई रिसोर्स हैं जिनका उपयोग कर नवीन पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को तैयार किया जा सकता है। इसी दिशा में संस्थान कार्यरत है। - राजेश शर्मा, एचओडी, डिजाइन विभाग, एफडीडीआई