साॅफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बिल्डर की जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा-नहीं है पर्याप्त आधार
ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्धनगर की अदालत ने एमजेड विशटाउन के निदेशक अभय कुमार की जमान ...और पढ़ें

युवराज मेहता के मामले में कोर्ट ने बिल्डर की जमानत याचिका खारिज की। फोटो: आर्काइव

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्धनगर की अदालत ने इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में आरोपित एमजेड विशटाउन के निदेशक अभय कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों में जमानत के पर्याप्त आधार नहीं हैं। मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 13 फरवरी निर्धारित की गई है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि घटना स्थल उस कंपनी के अंतर्गत आता है, जिसकी लापरवाही के कारण हादसा हुआ है।
आरोप है कि नाॅलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-150 स्थित बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाट में भरे पानी में डूबने से हुई, जिसे सुरक्षित नहीं किया गया था। इसी दौरान एक कार अनियंत्रित होकर उक्त प्लाॅट में जा गिरी। कार में सवार इंजीनियर युवराज की मौके पर ही मौत हो गई।
आरोपित अभय कुमार की ओर से प्रस्तुत जमानत के प्रार्थना पत्र में कहा गया कि वह निर्दोष है, उसे झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपित का घटना से प्रत्यक्ष कोई संबंध नहीं है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
वहीं अभियोजन अधिकारी ने जमानत का विरोध करते हुए इसे सत्र परीक्षणीय, गैरजमानती और गंभीर अपराध बताया। अदालत ने आरोपित के वकील रिंकू तोंगड़ और अभियोजन अधिकारी की दलीलों को सुनने के बाद मामले के साक्ष्यों का अवलोकन किया।
न्यायालय ने आदेश में कहा कि प्रथमदृष्टया घटना में गंभीर लापरवाही सामने आती है। इसके चलते एक व्यक्ति की जान चली गई। ऐसे में जमानत देना न्यायोचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखते हुए आरोपित को फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती है।