ग्रेटर नोएडा के पैकेजिंग उद्योग पर इनवर्टेड GST की मार, वित्त मंत्री से टैक्स ढांचा बदलने की मांग
ग्रेटर नोएडा के इंडस्ट्रियल एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन (IEA) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पैकेजिंग उद्योग की इनवर्टेड जीएसटी संरचना को खत्म करने औ ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
पैकेजिंग उद्योग की इनवर्टेड जीएसटी संरचना खत्म करने की मांग।
जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने की अपील।
इनवर्टेड जीएसटी से एमएसएमई का कैश फ्लो प्रभावित, इकाइयां बंद होने के कगार पर।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। इंडस्ट्रियल एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन (आइईए) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ईमेल के माध्यम से पैकेजिंग उद्योग की सबसे बड़ी समस्या इंवर्टेड जीएसटी संरचना को तुरंत खतम करने की मांग की है।
साथ ही जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की भी मांग रखी गई है। आइईए अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख औद्योगिक हब में है। यहां हजारों पैकेजिंग इकाइयां संचालित हैं जो लाखों लोगों को रोजगार देती हैं और विनिर्माण व निर्यात में अहम भूमिका निभाती हैं।
लेकिन मौजूदा जीएसटी ढांचे से उद्योग गहरे वित्तीय संकट में है। उन्होंने कहा कि तैयार पैकेजिंग उत्पाद पर पांच प्रतिशत जीएसटी है, जबकि कच्चा माल, फिल्म, स्याही और अन्य इनपुट पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है।
रिफंड में फंस जाती है कार्यशील पूंजी
इस तरह 13 प्रतिशत के अंतर के कारण उद्योगों की बड़ी कार्यशील पूंजी रिफंड में फंस जाती है। रिफंड प्रक्रिया जटिल और देरी वाली होने से एमएसएमई का कैश फ्लो बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई इकाइयां बंदी के कगार पर हैं।
संगठन ने दर समानता, त्वरित रिफंड, आटोमेटिक सिस्टम, विशेष प्रोत्साहन आदि मांगों को प्रमुखता से उठाया। संजीव शर्मा ने कहा कि सरकार मेक इन इंडिया और ईज आफ डूइंग बिजनेस के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन के पूर्व अध्यक्ष पीके तिवारी ने कहा कि उनकी मांगें नहीं मानी गई, तो उद्यमी आंदोलन को मजबूर होंगे।