5 साल तक किस्तें भरने के बाद यमुना प्राधिकरण ने दिखाया ठेंगा, औद्योगिक भूखंड की रजिस्ट्री से किया इंकार
ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण के एक औद्योगिक भूखंड के खरीदार को पांच साल तक 35 लाख रुपये चुकाने के बाद भी लीजडीड नहीं मिल पा रही है। प्राधिकरण ने भ ...और पढ़ें

ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण के एक औद्योगिक भूखंड के खरीदार को पांच साल तक 35 लाख रुपये चुकाने के बाद भी लीजडीड नहीं मिल पा रही है। फाइल फोटो
HighLights
पांच साल तक 35 लाख रुपये चुकाने के बाद भी लीजडीड नहीं।
यमुना प्राधिकरण ने नियम विरुद्ध हस्तांतरण के कारण रजिस्ट्री रोकी।
मूल आवंटी ने औद्योगिक इकाई स्थापित न कर भूखंड बेचा।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण के खाते में पांच साल तक एक व्यक्ति लाखों रुपए जमा करता है। जब भूखंड की रजिस्ट्री का समय आया तो प्राधिकरण ने यह कहकर उनके पैरों तले जमीन खिसका दी कि जो औद्योगिक भूखंड उन्होंने खरीदा है, उसमें नियमों का पालन नहीं हुआ है।
इसलिए रजिस्ट्री उनके नाम पर नहीं हो सकती है। भूखंड विक्रेता और रकम की मांग कर रहा है, प्राधिकरण नियमों का हवाला देकर पीड़ित के नाम पर रजिस्ट्री करने को तैयार नहीं है।
मामला यमुना प्राधिकरण के औद्योगिक सेक्टर 32 का है। प्राधिकरण की औद्योगिक भूखंड योजना में 2015 में एक व्यक्ति के नाम पर 300 वर्गमीटर का औद्योगिक भूखंड आवंटित हुआ था, लेकिन आवंटी ने भूखंड की किस्तों का भुगतान करने में असमर्थता जताते हुए भूखंड को अनिल शुक्ला व उनके बेटे रवि शुक्ला को बेच दिया।
रवि शुक्ला का कहना है कि उन्होंने भूखंड की एवज में 18 लाख रुपए प्रीमियम दिया था। प्राधिकरण के दस्तावेज में उनका व उनके पिता का नाम पता दर्ज हो गया।
पीड़ित ने अपने खाते से 2021 से लेकर 2025 तक प्राधिकरण को भूखंड की किस्तों का 35 लाख रुपए भुगतान किया, किस्तें पूरी होने के बाद प्राधिकरण ने लीजडीड के लिए चेक लिस्ट जारी कर दी। जब वह लीजडीड कराने के लिए यीडा कार्यालय पर पहुंचे तो प्राधिकरण कर्मचारियों ने भूखंड की खरीद फराेख्त नियम विरुद्ध बताकर लीजडीड से इन्कार कर दिया।
पीड़ित का कहना है कि भूखंड की वर्तमान कीमत बढ़ चुकी है। मूल आवंटी चालीस लाख रुपए की और मांग कर रहा है। उन्होंने मंगलवार को यीडा सीईओ राकेश कुमार सिंह से मिलकर अपनी शिकायत रखी।
पीड़ित का कहना है कि सीईओ का कहना है कि औद्योगिक भूखंड की लीजडीड मूल आवंटी के नाम पर होने के बाद उसे आवंटित भूखंड पर औद्योगिक इकाई का निर्माण कर उसे क्रियाशील करना जरूरी है, तभी संपत्ति का विक्रय करने की अनुमति है। पीड़ित का कहना है कि मूल आवंटी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस को दी है।