कभी विकास से अछूता था जेवर, एयरपोर्ट आने के बाद बदलने शुरू हुए किसानों के तेवर
नोएडा एयरपोर्ट आने के बाद जेवर क्षेत्र में किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। 2017 में परियोजना को हरी झंडी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण से मिले मुआ ...और पढ़ें

एयरपोर्ट विस्थापित किसानों की आर एंड आर टाउनशिप में बनी शानदार कोठी और सामने खड़ी थार गाड़ी। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मनोज कुमार शर्मा, जेवर। विकास और रोजगार के मामले में पिछड़ा माने जाने वाला जेवर क्षेत्र नोएडा एयरपोर्ट आने के बाद बिना पंख आसमान छूने को तैयार है। केंद्र और प्रदेश सरकार ने परियोजना को वर्ष 2017 में हरी झंडी दी तो क्षेत्र के विकास को भी पंख लगे।
किसानों को जमीन की एवज में मिले प्रतिकर की धनराशि (मुआवजा) ने उनकी जीवन शैली, दिनचर्या, रहन-सहन, खान-पान के अलावा शिक्षा और रोजगार में भी बड़ा बदलाव किया है। अब एयरपोर्ट लोकार्पण के बाद यहीं किसानों की युवा पीढ़ी निवेश और कारोबार के रास्ते तलाशने में जुटी है।

एयरपोर्ट विस्थापित किसानों की टाउनशिप में बनी शानदार कोठी । जागरण
लोग अपने बच्चों को बड़े शहरों में अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कराने के लिए भेज रहे हैं। स्वयं भी खेती किसानी के अलावा कारोबार और प्रापर्टी में सफलता हासिल कर रहे हैं।
कब शुरू हुआ था भूमि अधिग्रहण का काम?
जेवर तहसील को बुलंदशहर से हटाकर नव गठित जिले गौतमबुद्धनगर में वर्ष 1997 में शामिल किया गया तो लोगों ने विकास के बड़े बड़े सपने देखने शुरू किए। बीस वर्ष तक नोएडा और ग्रेटर नोएडा में खूब विकास हुआ, लेकिन जेवर विकास से अछूता रहा।
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2014 में एयरपोर्ट परियोजना को आगे बढ़ाया गया। सात वर्ष पहले जेवर के छह गांव में एयरपोर्ट के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हुआ। लोगों की जमीन के रेट बढ़े और मुआवजा मिलने के बाद किसानों ने आय के साधन बनाने के लिए खेती किसानी घर बार और गाड़ी घोड़ा में मुआवजा राशि लगाई। जिससे यहां के लोगों की लाइफ स्टाइल पूरी तरह बदल गई।
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बच्चों को मिल रही अच्छी शिक्षा
मुआवजा लगभग तीन हजार परिवारों को मिला, लेकिन जिन परिवारों ने मुआवजा धनराशि सदउपयोग कर व्यापार कारोबार आय के साधन बनाए, उनकी आमदनी भी हो रही है। वह अच्छी जिंदगी जी रहे हैं।
लोगों के पास पैसा और आने जाने के साधनों के लिए गाड़ी आने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा के अलावा दिल्ली एनसीआर के अच्छे स्कूलों में लोगों ने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना भी शुरू किया। वहीं जिन लोगों ने मुआवजे का पैसा केवल गाड़ी, घोड़ा, मकान और अन्य शोक पूरे करने में खर्च किया उनकी स्थिति अच्छी नहीं हैं।
आसपास के जिलों में लोगों ने खरीदीं खेती की बड़ी जमीनें
ज्यादातर लोगों ने मुआवजा मिलने के बाद भी जमीन से नाता नहीं तोड़ा, उन्होंने आसपास के जिलों में जान पहचान या रिश्तेदारियों के माध्यम से जमकर कृषि की जमीनों के अलावा बाग, भट्टे और फार्म हाउस में पैसा लगाया।
कई किसानों ने बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा में कम कीमत होने के चलते कई गुना जमीन खरीदने के अलावा घर मकान और आय के अन्य साधन भी बनाए हैं।
मेरी 26 बीघा जमीन गई है मेरी जमीन पर रनवे बना है एयरपोर्ट आने से क्षेत्र में प्रॉपर्टी के दाम आसमान में पहुंच गए, लोकार्पण के बाद प्रॉपर्टी कारोबार और बुलंदी छूएगा खेती किसानी के साथ प्रापर्टी कारोबार भी अच्छा फील्ड है।
दरियाब सिंह किसान,रोही
एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे से तरक्की के रास्ते बने है अभी तक बच्चों की शिक्षा दिल्ली एनसीआर में कराते थे, लेकिन एयरपोर्ट के लोकार्पण के बाद देश के किसी भी हिस्से सहित विदेशों में भी पढ़ाई कराना संभव हो पाएगा। पढ़े लिखने के बाद क्षेत्र के विकास और अपनी कामयाबी हासिल करेंगे।
सोमदत्त शर्मा किसान, बनवारीवास
मेरी 45 बीघा जमीन एयरपोर्ट को गई जिसमें एटीसी और रनवे बना है एयरपोर्ट आने के बाद निसंदेह क्षेत्र ने विकास की रफ्तार पकड़ी है लोकार्पण के बाद उन्नति के और भी अवसर मिलेंगे। इस दिन का लंबे वक्त से इंतजार था
किसान धीरेंद्र सिंह,रन्हेरा