110 ई-बसें सड़कों पर, फिर भी नहीं मिल रहीं सवारियां; नोएडा में रूट चार्ट पर उठे सवाल
नोएडा में 110 ई-बसें सड़कों पर होने के बावजूद सवारियां नहीं मिल रही हैं, जिसकी मुख्य वजह गलत रूट चार्ट है। लोग समय बचाने के लिए ऑटो और ई-रिक्शा को प्र ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
नोएडा में 110 ई-बसों में सवारियों की कमी।
गलत रूट चार्ट और देरी मुख्य कारण।
लोग ऑटो-ई-रिक्शा को दे रहे प्राथमिकता।
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। जिले की सड़कों पर दौड़ रहीं 110 ई-बसों से सवारियां गायब हैं। अगले सप्ताह 90 ई-मिनी बसें सड़कों पर उतरने वाली है। ई-बसों को चलाने का मकसद साफ था।
प्रदूषण कम हो, सफर सस्ता हो और लोगों को आरामदायक पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कह रही हैं। ई-बसें उम्मीद पर खरी नहीं उतर सकीं। इसकी वजह गलत रूट चार्ट होना है। बसें यात्रियों को देरी से गतंव्य पर पहुंचाती हैं। इस वजह से लोग आटो व ई-रिक्शा तो तरजीह दे रहे हैं।
110 बसें चलने के बाद भी उनमें वह भीड़ नहीं दिख रही, जिसकी उम्मीद की गई थी। सुबह-शाम के पीक आवर में भी कई बसें आधी खाली या उससे भी कम सवारियों के साथ अपने रूट पूरा कर रही हैं।
असली वजह रूट ही गड़बड़
- बसों में उम्मीद से उलट कम यात्री होने की प्रमुख वजह जिले में रूट चार्ट का सही न होना है।
- जिन रूटों पर बसें चलाई गई हैं, वह लोगों की रोज की जरूरत से मेल नहीं खाते। नतीजा यह कि बस को अपने गंतव्य तक पहुंचने में तय समय से कहीं ज्यादा वक्त लग जाता है। एक तरफ जहां मेट्रो स्टेशन से सेक्टर तक जाने में 15 मिनट लगने चाहिए, वहीं बस घूम-घूम कर 40 मिनट ले रही है।
- मंजिल तक पहुंचने में इतनी देरी की वजह से आम आदमी बस का इंतजार नहीं करता। वह आटो काे तरजीह दे देता है।
आटो-ई रिक्शा पहुंचा देते हैं जल्दी
यह छोटे वाहन शार्टकट लेते हैं। भीड़-भाड़ वाली गलियों से निकल जाते हैं और 10-15 मिनट में लोगों को उनके आफिस, कालेज, इंडस्ट्री, मार्केट या घर तक पहुंचा देते हैं। किराया थोड़ा ज्यादा सही, पर समय की बचत के आगे लोग उसे ही चुन रहे हैं। एक छात्र ने कहा कि बस का इंतजार करो, फिर धीरे-धीरे घूमते हुए जाओ... उससे अच्छा है 20 रुपये ज्यादा देकर ई-रिक्शा ले लो।
90 ई-मिनी बसें और चलाने से पहले रूट चार्ज करना होगा सही
अगर 90 मिनी बसों को चलाने से पहले ठीक से रूट चार्ट नहीं बनाया गया तो हालात सुधरने के बहुत आसार नहीं हैं। न सरकार का पैसा वसूल होगा, न प्रदूषण कम होगा।
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पहले मौजूदा 110 बसों के रूट का री-सर्वे करना होगा । आफिस, कालेज, मेट्रो स्टेशन, मार्केट और रिहायशी इलाकों को जोड़ने वाले सीधे और तेज रूट बनाए जाएं। फीडर सर्विस की तरह बसें चलें ताकि लोग मेट्रो से उतर कर सीधे बस पकड़ सकें।
ई-बसें भविष्य हैं, इसमें कोई शक नहीं। बस जरूरत है, उन्हें लोगों की जरूरत के हिसाब से चलाने की। वरना 200 बसें भी सड़कों पर होंगी, पर सवारियां फिर भी आटो में ही मिलेंगी।
नंबर गेम
- 83701 यात्रियों ने किया सफर
- जिले में 12 जून को ई-बसों का संचालन शुरू हुआ था।
- नोएडा में 12 जून से बीस जुलाई तक 40155, ग्रेटर नोएडा में
- 13243 व यीडा में 30303 यात्रियों ने ई बसों से सफर किया
क्या बोले लोग
सेक्टर-19 से बसों का संचालन नहीं होने से आटो में धक्के खाने को मजबूर हैं। रूट पर बसें होनी चाहिए।
भीम खुराना
मेट्रो स्टेशन तक कोई बस सेवा नहीं है। कालेज आने जाने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उत्कर्ष भट्ट
बाहर जाना है तो आटो में लटकना आना चाहिए। अगर पकड ढीली है तो गिर भी जाएंगे। कुछ ऐसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है।
वीवी भाटिया
सेक्टर-22 से सिटी बस की कोई व्यवस्था नहीं हैं। डीटीसी की बसें बाेटेनिकल गार्डन तक तो पहुंचा सकती हैं। दूसरे रूट पर कोई बस नहीं हैं।
रमेश राणा
सेक्टर 12 और 22 सबसे पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। ई-सिटी बसों के रूट पर सबसे पहले यह होना चाहिए, लेकिन अभी तक नहीं हैं।
मंजर