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    उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के 22 जिलों के यात्रियों के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहली पसंद 

    Updated: Sun, 29 Mar 2026 07:16 AM (IST)

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट का बोझ कम करेगा, जिससे यात्रियों और कार्गो को बेहतर सुविधा मिलेगी। कम जेट ईंधन वैट के कारण यह एयरला ...और पढ़ें

    नोएडा एयरपोर्ट यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान के 22 जिलों के लिए बनी पहली पसंद।

    नोएडा एयरपोर्ट यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान के 22 जिलों के लिए बनी पहली पसंद।

    HighLights

    1. आईजीआई एयरपोर्ट का बोझ कम करेगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट।

    2. कम वैट से हवाई यात्रा सस्ती, यात्रियों को आकर्षित करेगा।

    3. पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान के 22 जिलों को लाभ।

    अर्पित त्रिपाठी, ग्रेटर नोएडा। एशिया का सबसे बड़ा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। आईजीआई एयरपोर्ट पर यात्रियों को बेहतर सुविधा के साथ ही कार्गों में भी तेजी आएगी। आइजीआइ एयरपोर्ट पर हर साल सात से आठ करोड़ यात्री सफर करते हैं, इनमें से 30 प्रतिशत तक यात्रियों का नोएडा एयरपोर्ट पर शिफ्ट होने का अनुमान प्रारंभिक स्तर पर लगाया जा रहा है।

    नोएडा एयरपोर्ट की व्यावहारिकता रिपोर्ट में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के 22 जिलों को शामिल किया गया था, जहां के यात्रियों के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहली पसंद होगा। खास बात यह कि जेट ईंधन पर वैट दिल्ली में 25 प्रतिशत है जबकि एनआइए में एक प्रतिशत रहेगा। संभावना है कि वैट कम होने से टिकट के मूल्य में कमी आएगी जिससे एयरलाइंस और यात्रियों का एनआइए पर अधिक फोकस होना लाजिमी है।

    नोएडा एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में शामिल

    आईजीआई एयरपोर्ट 1986 में स्वरूप में आया, इससे पहले यह पालम एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता था। इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने के बाद यह देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में शामिल हो गया। वर्तमान में यहां हर साल करीब सात से आठ करोड़ यात्री सफर करते हैं। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और एयर ट्रैफिक के दबाव के कारण यात्रियों को कई बार लंबा इंतजार करना पड़ जाता है। जमीन की सीमित उपलब्धता के कारण विस्तार की गुंजाइश कम है।

    एनआइए में कार्गो हब की प्रारंभिक क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन है, जबकि आईजीआई की वर्तमान में 1.8 लाख मीट्रिक टन क्षमता और कुल क्षमता 2.5 लाख टन है। एनआईए के चरम स्तर पर 18 लाख मीट्रिक टन क्षमता होगी। इससे जाहिर है कि एनआइए पर कार्गो भी काफी मात्रा में शिफ्ट होगा।

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    2017 के करीब एनआईए की व्यावहारिकता रिपोर्ट तैयार हुई थी। इसमें सामने आया था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान के सीमावर्ती समेत 22 जिलों से यात्री और कार्गो एनआइए को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिले समेत बरेली, पीलीभीत, रामपुर, देहरादून, हरिद्वार, राजस्थान के धौलपुर, भरतपुर आदि शामिल हैं। पिछले दिनों दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने वैश्विक सलाहकार फर्म आइसीएफ इंटरनेशनल से एक यातायात अध्ययन कराया।

    इसमें एनआईए के शुरू होने पर आइजीआइ पर क्या असर पड़ेगा का अध्ययन किया गया था। डायल ने चिंता जताई थी भारत में एयरलाइंस के संचालन खर्च का 45 प्रतिशत हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर होता है। एनआइए ने जेट ईंधन पर एक प्रतिशत वैट लगाया है, जबकि दिल्ली सरकार ने आइजीआइ में एटीएफ पर 25 प्रतिशत टैक्स लगा रखा है। ऐसे में एयरलाइंस एनआइए की ओर अधिक रुख कर सकती हैं। नोएडा एयरपोर्ट पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद के साथ ही मेरठ, मथुरा, आगरा, अलीगढ़, ग्वालियर तक के अधिकांश यात्री शिफ्ट होंगे।

    कनेक्टिविटी एनआईए की यूएसपी

    नोएडा एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी के कई विकल्प होंगे। यह यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल और मेट्रो कनेक्टिविटी से जुड़ेगा। इससे दिल्ली, नोएडा, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ जैसे शहर सीधे जुड़ेंगे।

    करीब सात करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ

    दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश (ग्वालियर, मुरैना) राजस्थान (धौलपुर भरतपुर) के हिस्सों को मिलाकर करीब सात करोड़ आबादी को सीधा लाभ होगा। खासकर पश्चिमी यूपी के लोगों को अब दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी।

    मुंबई के बाद अब दिल्ली एनसीआर में भी दो एयरपोर्ट

    दिल्ली-एनसीआर दो इंटरनेशनल एयरपोर्ट संचालित करने वाले क्षेत्र में शामिल हो गया है। पिछले साल मुंबई पहला भारतीय मेगासिटी बन गया था, जहां दो प्रमुख एयरपोर्ट छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं।

    - मुंबई के नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनएमआइए) की तरह, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआइए) को एक बड़े वैश्विक एयरपोर्ट के केंद्र के रूप में स्थापित करने की तैयारी है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक भारत के परिचालन और आगामी वैकल्पिक एयरपोर्ट, जैसे मोपा (गोवा), एनएमआइए और एनआइए, इस वर्ष के अंत तक लगभग चार करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता रख सकते हैं। 2030 तक, ये एय सालाना 4.5-5 करोड़ यात्रियों की सेवा करने के लिए तैयार हैं।
    - 11,742.45 एकड़ में फैला, 3,900 मीटर रनवे, जो कम दृश्यता वाले संचालन को संभालने में सक्षम है। रनवे दोनों सिरों पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम से लैस है, जिससे विमान हवा की स्थिति के आधार पर दोनों तरफ से आ सकते हैं।

    - नोएडा एयरपोर्ट का सिंगल रनवे, वाइड-बाडी विमानों को समायोजित कर सकता है, इसमें इंस्ट्रूमेंट लेंडिस सिस्टम (आइएलएस) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग जैसी आधुनिक नेविगेशन सुविधाएं भी हैं। वैमानिकी ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम से भी लैस, जिसमें एप्रोच और रनवे लाइटिंग शामिल है, जो आइएलएस के साथ, रात में और कम दृश्यता के दौरान संचालन में मदद करता है, इससे निर्बाध, सभी मौसम और 24 घंटे संचालन होगा।
    - मल्टी-मॉडल कार्गो हब में प्रारंभिक स्तर पर सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक की हैंडलिंग क्षमता। इसका विस्तार भी होगा।
    - यात्रियों को टर्मिनल के अंदर बिताए गए समय को कम किया जाएगा। प्रस्तावित 10 मिनट की चेक-इन और बैगेज-ड्राप टाइमलाइन स्वयं-सेवा कियोस्क, डिजिटल प्रोसेसिंग और भीड़ को कम करने के लिए टर्मिनल को डिजाइन किया है।

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