Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    लागत से यात्री क्षमता तक... एशिया के सबसे बड़े नोएडा एयरपोर्ट से जुड़ी खास बातें

    Updated: Sun, 15 Mar 2026 01:13 PM (IST)

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) उद्घाटन के करीब है, जिसका शिलान्यास पीएम मोदी ने 2021 में किया था। इसका पहला चरण पूरा हो चुका है और नवरात्र में प्रधान ...और पढ़ें

    HighLights

    1. पहला चरण पूरा, नवरात्र में पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन।

    2. एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, ग्रीन एनर्जी पर केंद्रित।

    3. DGCA से लाइसेंस मिला, अत्याधुनिक तकनीक से लैस।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब उद्घाटन के करीब पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 नवंबर 2021 को इसकी आधारशिला रखी थी।

    करीब साढ़े चार वर्षों में एयरपोर्ट के पहले चरण का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। चर्चा है कि आगामी नवरात्र के दौरान प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन कर सकते हैं।

    एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट

    चार चरणों में विकसित होने वाला यह एयरपोर्ट पूरी तरह तैयार होने के बाद एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। इसका निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत किया जा रहा है।

    स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी के सहयोग से यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड इसका विकास कर रही है, जिसे 40 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है।

    पहले चरण का निर्माण पूरा

    एयरपोर्ट के पहले चरण का निर्माण 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में पूरा किया गया है। इस चरण में 3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे तैयार किया गया है। भविष्य में यहां कुल छह रनवे बनाए जाने की योजना है।

    यह भी पढ़ें- नोएडा एयरपोर्ट की दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद से होगी ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी; 3,631 करोड़ के बजट को मंजूरी

    पूरी तरह विकसित होने के बाद जेवर एयरपोर्ट करीब 5100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा, जो दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से लगभग ढाई गुना बड़ा होगा।

    निर्माण की लागत और चरण

    जेवर एयरपोर्ट परियोजना की कुल अनुमानित लागत 29,561 करोड़ रुपये आंकी गई है। सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2050 तक चारों चरणों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

    • 4,588 करोड़ रुपये – प्रथम चरण की लागत
    • 5,983 करोड़ रुपये – द्वितीय चरण के निर्माण पर अनुमानित खर्च
    • 8,415 करोड़ रुपये – तृतीय चरण की अनुमानित लागत
    • 10,575 करोड़ रुपये – चतुर्थ चरण की अनुमानित लागत

    यात्रियों की क्षमता धीरे-धीरे बढ़ेगी

    एयरपोर्ट के विकास के साथ इसकी यात्री क्षमता भी बढ़ती जाएगी। पहले चरण में यह हर साल 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।

    • प्रथम चरण (2026): 1.2 करोड़ यात्री
    • द्वितीय चरण (2031-32): 3 करोड़ यात्री
    • तृतीय चरण (2036-37): 5 करोड़ यात्री
    • चतुर्थ चरण (2040-50): 7 करोड़ यात्री

    पर्यावरण के अनुकूल एयरपोर्ट

    जेवर एयरपोर्ट को ग्रीन एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां कुल बिजली जरूरत का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा हरित ऊर्जा से पूरा करने की योजना है।

    unnamed (44)

    इसके लिए टाटा पावर के सहयोग से सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे करीब 13 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। साथ ही पवन ऊर्जा से 10.8 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। एयरपोर्ट परिसर में इस्तेमाल होने वाले वाहन भी इलेक्ट्रिक होंगे और यहां कार्बन उत्सर्जन शून्य रखने का लक्ष्य तय किया गया है।

    खबरें और भी

    मिला एयरोड्रोम लाइसेंस

    नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 6 मार्च को जेवर एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस जारी किया। यह लाइसेंस इस बात का प्रमाण है कि एयरपोर्ट का रनवे, सुरक्षा व्यवस्था और नेविगेशन सिस्टम विमानों के संचालन के लिए तय मानकों पर खरे उतरते हैं।

    यह भी पढ़ें- नोएडा एयरपोर्ट बनेगा विमानों की 'वर्कशॉप', आकासा एयर स्थापित करेगी अपना पहला अत्याधुनिक MRO सेंटर

    एयरोड्रोम वह स्थान होता है जहां विमानों के सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग की सुविधा होती है, जबकि एयरपोर्ट में इसके साथ-साथ यात्री टर्मिनल, हैंगर और विमानों के रखरखाव जैसी सुविधाएं भी होती हैं।

    अत्याधुनिक तकनीक से लैस

    जेवर एयरपोर्ट को अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया गया है। यहां रनवे पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) लगाया गया है, जिससे घने कोहरे या खराब मौसम में भी 50 मीटर तक की कम दृश्यता में विमान सुरक्षित उतर सकेंगे।

    एयरपोर्ट में 2.5 मिलियन टन सालाना क्षमता वाला मल्टी-मॉडल कार्गो हब भी बनाया गया है। साथ ही इसे एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहालिंग की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

    यहां 24 मध्यम आकार के कोड-सी विमान और दो बड़े कोड-डी तथा एफ विमान के लिए पार्किंग स्टैंड बनाए गए हैं। एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग की कैटेगरी-9 सुरक्षा व्यवस्था के कारण यहां बोइंग 777 जैसे बड़े विमानों का संचालन भी संभव होगा।

    एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल CISF को सौंपी गई है। पहले चरण में 1047 CISF जवानों की तैनाती की जाएगी।

    इन शहरों के लिए शुरू होंगी उड़ानें

    शुरुआती चरण में कई प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें शुरू होने की संभावना है। इंडिगो, आकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने यहां से उड़ान संचालन के लिए सहमति जताई है।

    यह भी पढ़ें- मार्च के अंत में नोएडा एयरपोर्ट के शुभारंभ की उम्मीद, जेवर विधायक ने परखी तैयारी

    शुरुआत में वाराणसी, लखनऊ, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, चेन्नई, पटना, कानपुर और श्रीनगर के लिए उड़ानें शुरू हो सकती हैं। अनुमान है कि यहां से रोजाना औसतन करीब 150 उड़ानें संचालित होंगी।

    जेवर एयरपोर्ट की दूरी

    • इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से: 72 किमी
    • नोएडा से: 52 किमी
    • आगरा से: 130 किमी
    • दादरी मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक हब से: 90 किमी

    इस समाचार में उपयोग किए गए क्रिएटिव ग्राफिक्स को NoteBookLM आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस प्रोग्राम की सहायता से बनाया गया है।

    सोर्स: www.niairport.in, www.yamunaexpresswayauthority.com