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    49 लाख का वीआईपी नंबर 2.22 लाख में बिका, नोएडा में व्हीकल नंबरों की फर्जी बोलियों से परिवहन विभाग परेशान

    Updated: Wed, 04 Feb 2026 11:11 PM (GMT+05:30)

    नोएडा में वीआईपी वाहन नंबरों की नीलामी विवादों में घिर गई है। 0001 जैसे नंबरों के लिए 49 लाख तक की ऊंची बोली लगने के बावजूद, भुगतान न होने पर वे 2.22 ...और पढ़ें

    वाहनों के वीआईपी नंबर को की फर्जी बोली से बढ़ी परेशानी। फोटाे: सांकेतिक

    वाहनों के वीआईपी नंबर को की फर्जी बोली से बढ़ी परेशानी। फोटाे: सांकेतिक

    HighLights

    1. वीआईपी नंबर 0001, 49 लाख की बोली के बाद 2.22 लाख में बिका

    2. 0007 नंबर भी 22 लाख की बोली के बाद 2.44 लाख में बेचा गया

    3. फर्जी बोली से परिवहन विभाग को करोड़ों का राजस्व नुकसान

    जागरण संवाददाता, नोएडा। परिवहन विभाग में वीआईपी वाहन नंबरों की नीलामी इन दिनों राजस्व बढ़ाने के बजाय विवादों में घिरती जा रही है। ताजा मामला एफके सीरीज के सबसे खास नंबर 0001 से जुड़ा है।

    इस नंबर के लिए ऑनलाइन नीलामी के दौरान प्रदेश की अब तक की सबसे ऊंची बोली 49 लाख रुपये लगी थी, जिससे विभाग को भारी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन भुगतान के समय यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।

    जानकारी के अनुसार सबसे ऊंची बोली लगाने वाले ने तय समय में रकम जमा नहीं की। इसके बाद नियमों के अनुसार यह नंबर दूसरी सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को दिया जाना था, लेकिन उसने भी नंबर लेने से इनकार कर दिया।

    इसी तरह कई बोली लगाने वाले पीछे हटते चले गए और अंततः यह वीआईपी नंबर सातवें बोलीदाता को मात्र 2.22 लाख रुपये में आवंटित कर दिया गया। यह नंबर एक रेंज रोवर कार के मालिक ने खरीदा है।

    इसी तरह 0007 नंबर के साथ भी यही स्थिति सामने आईं। इस नंबर पर नीलामी के दौरान 22 लाख रुपये तक की बोली लगी थी, लेकिन अंत में यह नंबर केवल 2.44 लाख रुपये में बेच दिया गया।

    ऐसे में लोगों के अनुसार यह आशंका जताई जा रही है कि इसमें फर्जी बोली का एक संगठित खेल हो सकता है, जिसमें जानबूझकर ऊंची बोली लगाकर वास्तविक खरीदारों को पीछे हटने पर मजबूर किया जाता है।

    बाद में बोली लगाने वाले रकम जमा नहीं करते और नंबर बेहद कम कीमत पर किसी अन्य व्यक्ति को मिल जाता है। इस प्रक्रिया से परिवहन विभाग को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान तो होता ही है, साथ ही ईमानदार वाहन मालिक भी खुद को ठगा महसूस करते हैं।

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