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    नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत के बाद भी नहीं सुधरे हालात, खुले नाले बने मौत का कुआं

    Updated: Mon, 23 Mar 2026 05:30 AM (IST)

    सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद भी नोएडा में सुरक्षा व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। मुख्यमंत्री के संज्ञान और सीईओ के सख्त निर्दे ...और पढ़ें

    इंजीनियर युवराज की मौत का मामला। जागरण

    इंजीनियर युवराज की मौत का मामला। जागरण

    HighLights

    1. युवराज मेहता की मौत के बाद भी खुले नाले।

    2. सीईओ के आदेशों के बावजूद सुरक्षा में लापरवाही।

    3. अस्थायी उपायों से टाल रहे हैं बड़े हादसे का खतरा।

    जागरण संवाददाता। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता दर्दनाक मौत ने हाईटेक शहर के सुरक्षा और बचाव इंतजामों की पोल खाेली थी। युवराज की मौत का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया।

    वहीं, जांच के लिए एसआईटी गठित हुई। लेकिन, एसआईटी की रिपोर्ट नहीं आई। युवराज की मौत के दो महीने बाद भी शहर में नाले और गड्ढे खुले हैं।

    सीईओ के निर्देश पर यहां सुरक्षा रस्सी और बांस के सहारे है। जिम्मेदारों को फिर से किसी हादसे का इंतजार है। खुले नाले और गड्ढों को लेकर दैनिक जागरण आज से चार दिवसीय समाचारीय अभियान शुरू कर रहा है। पेश है पहले दिन संवाददाता प्रवेंद्र सिंह सिकरवार की रिपोर्ट-

    सेक्टर-150 में जनवरी की सर्द रात में भीषण कोहरे के बीच साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार माल के लिए खाेदे गए बेसमेंट में गिर गई। बचाने के लिए पहुंचा बचाव दल भी युवराज की जान नहीं बचा सका।

    वहीं, हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ हटाए गए। नए सीईओ ने ने तत्काल सभी खुले गड्ढों और नालों को भरने के सख्त निर्देश दिए थे। एक महीने के अंदर काम पूरा करने का अल्टीमेटम बिल्डरों को भी दिया गया।

    प्राधिकरण क्षेत्र में खुले नालों को भी एक माह के भीतर सुरक्षित करना था। हादसे के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं, बल्कि लापरवाही और हीलाहवाली जारी है। नोएडा में 249 किलोमीटर से अधिक लंबे 159 नाले हैं। करीब 30 किमी क्षेत्र में यह असुरक्षित हैं।

    वहीं, दो दर्जन से अधिक बिल्डर परियोजनाओं के 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पानी भरा हुआ है। शहर में बताए गए 64 खुले नाले व गड्ढों की संख्या वास्तव में दो से तीन गुना अधिक है। 10 वर्क सर्कल प्रभारियों ने आधी-अधूरी रिपोर्ट दी, जबकि सीईओ के तत्काल कार्य के आदेशों पर अमल धीमा है।

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    सीईओ के सख्त निर्देश, लेकिन अमल शून्य

    हादसे के बाद सीईओ ने सभी खुले गड्ढों को तुरंत भरने और बिल्डरों को 30 दिनों में काम पूरा करने के आदेश दिए। लेकिन, वर्क सर्कल प्रभारियों ने हीलाहवाली की। अधिकांश जगहों पर जगह सिर्फ टेप, रस्सी या बांस लगाकर नालों से खतरे को टालने का कार्य किया गया है।

    खतरनाक हैं खुले नाले

    ज्यादातर नाले बिना फेंसिंग, ढक्कन या चेतावनी बोर्ड के खुले पड़े हैं। अतिक्रमण, कचरा और सिल्ट जमा होने से पानी का बहाव रुक जाता है। युवराज हादसे के बाद भी कई सेक्टरों में गड्ढे टेप-बांस से ढके'''' हैं। हाल ही में सेक्टर-71 में एक और कार खुले नाले में गिरी थी।

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    सेक्टर-71 और इसके आसपास कई जगहों पर नाले खुले हैं। इनको बंद कराने का अनुरोध किया गया है। जिस जगह बाउंड्रीवाल टूटी हैं वह भी ठीक नहीं कराई गईं। - जगदीश यादव जग्गा, सेक्टर-71

    सेक्टर-137 में कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां हैं और नाले खुले हैं। जानवर और गोवंश आए दिन नाले में गिरते हैं। किसी बच्चे या वाहन चालक के गिरने पर गंभीर हादसा हो सकता है। - राहुल श्रीवास्तव, सेक्टर-137

    कंचनजंगा अपार्टमेंट के बाहर और मार्केट क्षेत्र में नाला खुला है। यह भीड़भाड वाला क्षेत्र है। यहां पर लोग हादसे का शिकार हो सकते हैं। प्राधिकरण को ध्यान देना चाहिए। - चंदन, सेक्टर-53

    एक्सप्रेसवे से सटे सर्विस रोड पर कई जगह से नाला टूटा हुआ है। यहां नाले की सफाई भी नहीं हुई। ऊपर तक नाला भरा हुआ है। टूटा नाला व गंदगी से लोग परेशान हैं। - विनोद शर्मा, सेक्टर-108

    सेक्टर-75 में सोसायटी के सामने नाले के स्लैब टूट चुके हैं। कई जगह नाले की दीवार गिरी हुई है। स्पीड ब्रेकर भी यहां की जरूरत है इस ओर ध्यान देना चाहिए।