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सरकारी लोन पर अनुदान का झांसा देकर 6 महीने में 6 करोड़ की ठगी, नोएडा पुलिस ने किया गैंग का पर्दाफाश

Published: Fri, 15 May 2026 02:57 AM (IST)

बिसरख पुलिस और साइबर सेल ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लोन पर अनुदान का झांसा देकर देशभर के ...और पढ़ें

ग्रेटर नोएडा से अंतरराज्यीय गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार।

ग्रेटर नोएडा से अंतरराज्यीय गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार।

HighLights

  1. पीएमईजीपी लोन पर अनुदान का झांसा दिया।

  2. देशभर के 100 लोगों से 6 करोड़ की ठगी।

  3. ग्रेटर नोएडा से अंतरराज्यीय गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार।

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) लोन पर अनुदान दिलाने का झांसा देकर देशभर के करीब 100 लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है।

गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, छह स्मार्ट फोन और 15 रजिस्टर कालिंग डाटा समेत अन्य सामान बरामद किया है। गिरोह इंटरनेट मीडिया पर फर्जी विज्ञापन प्रसारित कर लोन लेने का प्रयास कर रहे बेरोजगारों को जाल में फंसाकर ठगी करते थे। गिरोह ने प्रोसेसिंग फीस आदि के नाम पर छह माह में लगभग छह करोड़ की ठगी की।

डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, टीमों ने बिसरख क्षेत्र की कृष्णा काउंटी टावर-ए, सेक्टर-एक से गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया। बदमाशों की पहचान धर्मराज राठौर, रवि कुमार, किशन राठौर, अक्षय, किरण नायर और किरण बाबू राठौर के रूप में हुई है।

आरोपित मूलरूप से कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं। यह ग्रेटर नोएडा में रहकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। आरोपित इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर आधार और पैन कार्ड से लोन दिलाने से संबंधित विज्ञापन प्रसारित करते थे।

इसमें बेरोजगार युवक, छोटे कारोबारी और लोन की जरूरत वाले लोग झांसे में आते थे। विज्ञापन पर क्लिक करते ही आरोपितों का मोबाइल फोन नंबर शो करता था। गिरोह के सदस्य खुद को सरकारी योजना से जुड़े अधिकृत लोन अधिकारी बताकर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लोन पर अनुदान व बेहद कम ब्याज का भरोसा देते थे।

सरकारी योजनाओं और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी भाषा का इस्तेमाल करते थे। जाल में फंसे लोगों से फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, बीमा, एनओसी, जीएसटी और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर दो से चार लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराते थे। इसके बाद मोबाइल नंबर बंद कर देते थे। आरोपितों पर मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।

कथित बास नामक व्यक्ति नेटवर्क का संचालक

गिरोह ने देशभर के लोगों से ठगी की है। बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर यह पता कर रही है कि कुल कितने लोगों से ठगी की है। डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए की-पैड मोबाइल फोन का उपयोग करते थे। सिम कार्ड बदलते रहते थे। बरामद 15 रजिस्टरों में कालिंग डाटा, संभावित लोगों की सूची, बैंक खातों की जानकारी व लेनदेन का रिकार्ड दर्ज मिला है।

नेटवर्क का संचालन कथित बास के निर्देश पर किया जा रहा था। पुलिस गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। आरोपित धर्मराज राठौर कक्षा 12वीं पास है, अन्य आरोपित 6वीं से लेकर बीएससी तक पढ़े हैं। इसके बावजूद साइबर अपराध में शामिल थे। पुलिस बरामद मोबाइल फोन, बैंक खातों और इंटरनेट मीडिया अकाउंट, डिजिटल डाटा की फोरेंसिक जांच करा रही है।

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