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    यमुना को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गृह सचिव की अध्यक्षता में बनेगी उच्चस्तरीय समिति

    Updated: Tue, 26 May 2026 11:21 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के लिए केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के लिए केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के लिए केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है। 

    जागरण संवाददाता, नोएडा। यमुना को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पर केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कमेटी का गठन होगा। एक सिविल अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यमुना नदी सभ्यताओं की जीवनधारा से सीवेज की नाली बनकर रह गई है।

    प्रदूषण, अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही ने नदी को बुरी तरह तबाह कर दिया है। अब टुकड़ों में काम नहीं चलेगा, बल्कि एक दीर्घकालिक और एकीकृत रणनीति से ही यमुना को पुनर्जीवित किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के संवेदनशील ‘जोन O’ में हो रहे अतिक्रमण, अवैध उद्योगों द्वारा बहाए जा रहे जहरीले कचरे, अनधिकृत कालोनियों से निकलने वाले बिना ट्रीटमेंट सीवेज और बारिश के पानी की नालियों में सीवेज मिलाने को नदी की दुर्दशा की वजह बताया।

    कोर्ट ने कहा कि जल निकासी, सीवेज, पेयजल और कचरा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल का अभाव ही समस्या की जड़ है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यमुना से जुड़े किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पास नदी संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की कोई स्पष्ट, समन्वित नीति नहीं है।

    राज्यों के बीच नीतिगत समन्वय भी पूरी तरह गायब है। इस पर कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है। इस समिति में यमुना से प्रभावित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रमुख और एमिकस क्यूरी शामिल होंगे।

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    गृह सचिव को जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों को भी शामिल करने की छूट दी गई है। समिति को आठ सप्ताह के अंदर यमुना पुनरुद्धार की व्यापक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

    इस योजना में स्पष्ट लक्ष्य, जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका, बजट, कार्यान्वयन रणनीति और समय-सीमा शामिल होंगी। ‘नमामि गंगे’ की तर्ज पर यमुना के लिए भी अब एक मजबूत और समग्र योजना बनेगी। यह फैसला यमुना संरक्षण की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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