कचरा समझे जाने वाले पत्थरों से बना जेवर एयरपोर्ट! जानिए क्या है ये 'ग्रीन सीमेंट' और इसकी ताकत
जेवर एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो ग्रीन सीमेंट (LC3) से बना है, जो कचरे से बनता है और पर्यावरण के लिए बेहतर है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट।
HighLights
जेवर एयरपोर्ट देश का पहला ग्रीन सीमेंट प्रोजेक्ट।
ग्रीन सीमेंट कचरे से बनता, ऊर्जा बचाता, CO2 घटाता।
भविष्य में निर्माण के लिए महत्वपूर्ण, सामान्य जितना मजबूत।
डिजिटल डेस्क, नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट कई मायनों में खास बन गया है। यह न सिर्फ अपनी विशालता के साथ ही कई और चीजों के लिए विख्यात है, बल्कि यह देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो ग्रीन सीमेंट से बना है।
जी हां, ऐसा सीमेंट जो इको-फ्रेंडली होने के साथ ही ऊर्जा बचत भी करता है। ग्रीन सीमेंट बना है कचरा समझे जाने वाले पत्थरों, मिट्टी आदि से। हालांकि अभी ग्रीन सीमेंट का उत्पादन कम मात्रा में हो रहा है, इसलिए यह जरूर महंगा है। लेकिन आने वाले समय में इसका उत्पादन तेजी से बढ़ेगा तो सामान्य सीमेंट से इसकी कीमत कम होने का अनुमान है।
इस स्टोरी में हम आपको ग्रीन सीमेंट क्या है, यह कैसे ईको-फ्रेंडली है और किन चीजों से बनता है उसे लेकर विस्तार से जानकारी देंगे जिससे यह साफ होगा कि यह सीमेंट भविष्य का सीमेंट है...
ग्रीन सीमेंट यानी LC3 क्या है?
सीमेंट बनाने के लिए मुख्यरूप से क्लिंकर का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य सीमेंट की तुलना में ग्रीन सीमेंट में कम क्लिंकर, अधिक तपी हुई मिट्टी और चूना पत्थर का उपयोग होता है। जानकारी के अनुसार एलसी3 का आविष्कार आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, स्विट्जरलैंड के ईपीएफएल व कुछ अन्य संस्थानों ने मिल कर किया था।
कैसे है पर्यावरण के लिए बेहतर?
ग्रीन सीमेंट बनाने में मात्र 800 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। वहीं सामान्य सीमेंट बनाने के लिए इससे कहीं ज्यादा 1450 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। ग्रीन सीमेंट से न सिर्फ ऊर्जा की खपत में बचत होती है बल्कि 40 प्रतिशत तक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम हो जाता है।

क्या बहुतायात में मिलते हैं ग्रीन सीमेंट बनाने वाले उत्पाद?
- कैल्साइंड क्ले यानी तपी हुई मिट्टी- एलसी3 सीमेंट बनाने के लिए लो ग्रेड वाली मिट्टी का इस्तेमाल होता है। ऐसी मिट्टी जिसका खेती या किसी काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। भारत ही नहीं पूरे विश्व में इस तरह की मिट्टी बड़े पैमाने पर पाई जाती है।
- चूना पत्थर- जहां सामान्य सीमेंट में उच्च गुणवत्ता वाले लाइमस्टोन का उपयोग होता है, वहीं एलसी3 सीमेंट में खराब चूना पत्थर का इस्तेमाल होता है। वो चूना पत्थर जो सामान्य सीमेंट बनाने वाले उत्पादक कचरा समझ कर छोड़ देते हैं। इस तरह ग्रीन सीमेंट का यह कॉम्पोनेंट भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
- क्लिंकर की जरूरत 50 प्रतिशत कम- ग्रीन सीमेंट में मिट्टी और चूना पत्थर की मात्रा बढ़ा दी जाती है, ऐसे में क्लिंकर की जरूरत 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है और यही वजह है कि इस सीमेंट से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम हो जाता है।
ग्रीन सीमेंट कितना मजबूत होता है?
वैज्ञानिकों की राय है कि ग्रीन सीमेंट से बनी इमारत की मजबूती सामान्य सीमेंट जितनी ही होती है। कई परिस्थितियों में यह सामान्य से भी ज्यादा टिकाऊ होता है।
क्या सामान्य से महंगा है ग्रीन सीमेंट?
वर्तमान में इस सीमेंट का उत्पादन सीमित होने के चलते यह इसका दाम ज्यादा है। हालांकि आने वाले समय में जब इसका प्रोडक्शन बढ़ेगा तो इसके रेट्स भी कम होने की प्रबल संभावना है।
भारत के लिए कितना अहम है LC3?
हमारा देश दुनिया के सबसे ज्यादा सीमेंट उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है। यहां आए दिन न सिर्फ सरकारी परियोजनाएं शुरू होती हैं बल्कि बड़ी जनसंख्या होने के चलते निजी तौर पर भी निर्माण कार्य चलते ही रहते हैं। ऐसे में आने वाले समय में ग्रीन सीमेंट के बढ़ते प्रयोग से न सिर्फ ऊर्जा खपत कम की जा सकती है बल्कि कार्बन उत्सर्जन पर भी बड़ी मात्रा में रोक लगाई जा सकती है।
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