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    ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता को 22 दिन बाद भी नहीं मिला न्याय, दिल्ली में तुरंत कार्रवाई

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 06:37 AM (IST)

    ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की पानी से भरे गड्ढे में डूबकर हुई मौत के 22 दिन बाद भी न्याय नहीं मिला है। एसआईटी जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के 1 ...और पढ़ें

    इंजीनियर युवराज मेहता को घटना के 22 दिन बीतने के बाद भी इंसाफ नहीं मिला।

    इंजीनियर युवराज मेहता को घटना के 22 दिन बीतने के बाद भी इंसाफ नहीं मिला।

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    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नालेज पार्क कोतवाली अंतर्गत सेक्टर-150 स्थित माल के बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाट में भरे पानी में डूबे इंजीनियर युवराज मेहता को घटना के 22 दिन बीतने के बाद भी इंसाफ नहीं मिला है। एसआइटी जांच के बाद भी शासन स्तर पर मामला अटका है। वहीं पड़ोसी राज्य दिल्ली में पांच फरवरी की रात जनकपुरी में कंस्ट्रक्शन साइट पर खोदे गड्डे में गिरकर बाइक सवार कमल भयानी की मौत हो गई थी।

    दिल्ली सरकार ने तत्काल जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई कर दी। मामले में सब कांट्रैक्टर की गिरफ्तारी और तीन इंजीनियरों पर केस दर्ज कर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। जबकि युवराज की मौत के मामले में एसआईटी की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के 11 दिन भी मामला ठंठे बस्ते में पड़ा है।

    बता दें कि इंजीनियर युवराज मेहता 16 जनवरी की रात गुरुग्राम से लौट रहे थे। 90 डिग्री सड़क पर वह कोहरे के कारण सड़क किनारे बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाट में भरे पानी में कार समेत डूब गए थे। उन्होंने पिता को फोन कर घटना के बारे में बताया था। पिता मौके पर पहुंच गए। कंट्रोल रूम को फोन कर बचाव दल को बुलाया।

    करीब दो घंटे युवराज को निकालने का प्रयास हुआ। बचाव दल में एसडीआरएफ, पुलिस और दमकल के करीब 80 जवान मौके पर थे पर संसाधनों के अभाव और पानी ठंडा होने के कारण युवराज को नहीं बचाया जा सका। बचाव दल के पास रस्सी तक नहीं थी। दो घंटे के बाद युवराज पानी में कार समेत समा गया।

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    बेबस पिता के पास आंखों के सामने बेटे को पानी में डूबते देखने के अलावा कोई चारा नहीं था। डिलीवरी ब्वाय मुनेंद्र ने पानी में उतकर युवराज को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शासन ने घटना की जांच के लिए मेरठ जोन के एडीजी व मंडलायुक्त के नेतृत्व में एसआइटी गठित की थी।

    21 से 26 जनवरी तक एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, दमकल, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, युवराज के पिता राजकुमार मेहता, डिलीवरी ब्वाय मुनेंद्र समेत कई के बयान लिए। मौके पर निरीक्षण कर रिपोर्ट शासन को सौंप दी। 11 दिन बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

    नालेज पार्क कोतवाली पुलिस ने जिन बिल्डर्स को आरोपित ठहराते हुए मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को नियम विरुद्ध बताते हुए राहत दे दी है।

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