Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में SIT कोर्ट से न्याय की उम्मीद, लापरवाही पर उठे सवाल

    Updated: Wed, 28 Jan 2026 07:12 AM (IST)

    इंजीनियर युवराज मेहता की ग्रेटर नोएडा में पानी में डूबने से हुई मौत पर देश की निगाहें एसआईटी अदालत पर टिकी हैं। 16 जनवरी को हुई इस घटना में युवराज ने ...और पढ़ें

    नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की हुई थी डूबकर मौत।

    नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की हुई थी डूबकर मौत।

    HighLights

    1. युवराज मेहता की मौत पर एसआईटी से न्याय की उम्मीद।

    2. ग्रेटर नोएडा में 120 मिनट तक संघर्ष, बचाव दल निष्क्रिय।

    3. अधिकारियों की लापरवाही उजागर, तीन बिल्डर गिरफ्तार।

    गजेंद्र पांडेय, ग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज मेहता का मौत को मात देने के लिए करीब 120 मिनट का संघर्ष..बचाओ-बचाओ के शब्द सुन लाचार व बेबस होकर पल-पल बेटे को मौत के आगोश में समाते देख रहे पिता राजकुमार मेहता, इस उम्मीद में हर किसी से मिन्नतें करते पिता की हालत देखने के बाद भी युवराज से महज 70 फीट की दूरी पर करीब 80 प्रशिक्षत बचाव दल तमाशबीन बना रहा।

    लगभग और डेढ़ सौ लोग वीडियो बनाते रहे। पिता की आंखाें के सामने ही बेटे युवराज की जिंदगी पानी में डूब गई। डिलीवरी ब्वाय मुनेंद्र सिंह ने पानी में उतर कर युवराज को बचाने का साहस दिखाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

    घटना में जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आई है। लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों को एसआईटी की अदालत में सजा और युवराज को न्याय मिले...इस पर गौतमबुद्धनगर ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

    सेक्टर-150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाट में भरे पानी में डूबने से 16 जनवरी की रात युवराज मेहता की मौत हो गई थी। घटना के बाद सिस्टम की घोर लापरवाही सामने आई थी। पिता की सूचना पर कोतवाली पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ पहुंची। करीब एक घंटे प्रयास के नाम पर हाइड्रा से सिर्फ रस्सी फेंकते रहे।

    बचाव दल का एक कर्मी उतरा, लेकिन ठंडे पानी और सरिया के डर से महज 10 सेंकेंड में बाहर निकल आया। बेटे को डूबते देख पिता की गुहार व मिन्नतों के बाद भी मौके पर मौजूद तीनों विभागों के अधिकारी और 80 कर्मचारी कार समेत डूब रहे युवराज को बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करते नजर नहीं आए। जिला प्रशासन, पुलिस, दमकल, नोएडा प्राधिकरण को कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जबकि करीब दो घंटे युवराज पानी में गिरी कार में मोबाइल फोन की टार्च जलाकर जिंदा होने का सबूत देता रहा।

    खबरें और भी

    डूब रहे युवराज को बचाने में किए गए प्रयासों और लापरवाही से पता चला कि प्रदेश में शो विंडो के रूप में पहचान बनाने वाला हाईटेक गौतमबुद्धनगर आपदा की स्थिति में किसी की जान बचाने के लिए संसाधनों के नाम पर कितना गरीब है। घटना को 12 दिन बीच गए हैं। फिलहाल दो बिल्डर्स कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तीन बिल्डर को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया है।

    स्वजन समेत हर कोई युवराज को बचाने में लापरवाही बरतने वाले विभागों के नाम लेकर आक्रोश जता रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके खिलाफ जिला स्तर पर आलाधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में अब हर किसी की निगाह एसआईटी की अदालत पर है...कि युवराज मेहता को मिले इंसाफ।

    यह भी पढ़ें- इंजीनियर युवराज मेहता केस की जांच कर रहे आईओ को कोर्ट की फटकार, 3 आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ी