इंजीनियर युवराज मेहता केस की जांच कर रहे आईओ को कोर्ट की फटकार, 3 आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ी
ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में सीजेएम कोर्ट ने लोटस ग्रीन के रवि बंसल व सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक और एमजेड ...और पढ़ें
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दो आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई।
HighLights
युवराज की मौत मामले में तीन आरोपितों की न्यायिक हिरासत बढ़ी
सीजेएम कोर्ट ने विवेचक को जांच में ढिलाई पर फटकारा
गिरफ्तारी में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं हुआ
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-150 के पास हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने लोटस ग्रीन बिल्डर से जुड़े आरोपित रवि बंसल और सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक और एमजेड विशटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार की 2 फरवरी तक बढ़ाई है।
इसके साथ ही अदालत ने जांच में ढिलाई बरतने पर जांच अधिकारी को फटकार भी लगाई। मामले की सुनवाई दोपहर बाद करीब तीन बजे शुरू हुई। लोटस ग्रीन बिल्डर के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि जिन दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वे न तो कंपनी के डायरेक्टर हैं और न ही मुख्य निर्णय लेने वाले अधिकारी।
दोनों आरोपी केवल वेतनभोगी कर्मचारी हैं। उन्हें महज मुनीम या जूनियर स्टाफ की तरह काम करने वाला बताया गया। बिना पूरी जांच के, प्रशासनिक और पुलिस दबाव में आनन-फानन की गिरफ्तारी में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया गया है।
अदालत को बताया कि कंपनी की ओर से लगभग 500 पेज की रिपोर्ट पेश की गई है। इसमें घटनास्थल से जुड़ी तकनीकी जानकारियां, जीपीएस युक्त सैटेलाइट इमेज और पुराने रिकाॅर्ड शामिल हैं। अधिवक्ताओं का कहना था कि वर्ष 2021 में जिस नाले के टूटने की बात सामने आई, तभी से वहां पानी भरने की स्थिति बनी थी।
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नोएडा प्राधिकरण को पूर्व में ही सूचना दी गई थी। मरम्मत के लिए फंड भी स्वीकृत हुआ था, लेकिन ठोस कार्य नहीं कराया गया। पूरे मामले की जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों पर डालना न्यायसंगत नहीं है।
रिमांड पर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस ने न तो आरोपियों की भूमिका का स्पष्ट आंकलन किया और न ही यह बताया कि किस आधार पर उन्हें सीधे जेल भेजा गया। बड़े बिल्डर, कंपनी के मालिक और शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सिर्फ छोटे कर्मचारियों को ही आरोपी बना जेल में डाला गया है। इसलिए रिमांड निरस्त कर नियमित जमानत देने की मांग की गई। अदालत ने विवेचक से कंपनी द्वारा दी 500 पन्नों की रिपोर्ट के अध्ययन के बारे में सवाल किया।
विवेचक ने कहा कि रिपोर्ट काफी बड़ी होने से पूरी तरह पढ़ने के लिए समय नहीं मिला। कुछ और दिन का वक्त चाहिए। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा कि जब विवेचना ही पूरी नहीं हुई है तो गिरफ्तारी किस आधार पर की गई।
कहा कि अब तक पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि हादसे के लिए आरोपियों की सीधी भूमिका क्या है। एमजेड विशटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार के मामले में भी उनके अधिवक्ताओं ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। कहा कि गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया।
आईओ के जवाब से अदालत नहीं हुई संतुष्ट
रिपोर्ट पूरी नहीं पढ़ पाने के विवेचक के जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। सीजेएम ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी विवेचक को अगली तारीख पर पूरी तैयारी के साथ आने का निर्देश दिया था। बावजूद रिपोर्ट का अध्ययन नहीं किया गया। इसे लापरवाही मानते हुए विवेचक को फटकार लगाई। स्पष्ट किया कि इस तरह की गंभीर घटना में जांच एजेंसी से पूरी तत्परता की अपेक्षा होती है।
पूरी तैयारी से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश
सीजेएम ने आदेश में कहा कि अगली तारीख पर विवेचक को पूरी फाइल, सभी दस्तावेजों के अध्ययन और तथ्यों के साथ अदालत में उपस्थित होना होगा। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह दो दिन के भीतर रिपोर्ट में अब तक की गई जांच और आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्ज करे, ताकि यह तय किया जा सके कि किस स्तर पर लापरवाही या आपराधिक कृत्य हुआ है।