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    बीसलपुर में 500 करोड़ से बने 36 पुल; पर अधूरी रह गई बस स्टैंड की आस, जानिए विधायक विवेक वर्मा का रिपोर्ट कार्ड

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 09:30 PM (IST)

    Uttar Pradesh MLA Report Card: बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा ने अपने कार्यकाल में 500 करोड़ से अधिक के 36 पुलों सहित कई विकास कार्य कराए, लेकिन बस स्टैंड ...और पढ़ें

    व‍िधायक व‍िवेक वर्मा

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    HighLights

    1. पिता और पूर्वी मंत्री रामसरन वर्मा की विरासत संभाल रहे बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा

    मनोज पाठक, बीसलपुर (पीलीभीत)। पूर्व मंत्री और पिता रामसरन वर्मा की विरासत संभालने उतरे विवेक वर्मा पहली बार में चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे। चुनाव में न तो उन्होंने जनता से बड़े वादे किए और न ही जनता को उनसे अपेक्षा थी, बस जनता को भी उम्मीद यह थी कि वह पिता के पदचिन्हों पर चलेंगे। यही वजह है कि इन साढ़े चार वर्षाें में उन्होंने पुल निर्माण, गोशाला निर्माण, सड़क, सीसी रोड विकास कार्य कराए।

    मगर, कस्बे व आसपास के लोगों के लिए बेहद अहम बस स्टैंड की आस अब भी अधूरी है। इसके अलावा लंबी दूरी का सफर करने के लिए ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा है, जिससे शाहजहांपुर और बरेली जाकर लोगों को बड़े शहरों के लिए ट्रेनें मिलती हैं, जबकि गोरखपुर शामली एक्सप्रेस वे की स्वीकृति से क्षेत्र के लाेगों को बड़े शहरों से कनेक्टविटी मिलने की उम्मीद जागी है।

    चुनाव का बिगुल बजता है तो दावेदार जनता से तमाम लुभावने वायदे करते हैं। चुनाव के बाद प्रमुख मुद्दे हल कराने को विकास की गाड़ी दौड़ाई तो जाती है, लेकिन जनता की आकांक्षाओं की कसौटी पर उतने वायदे पूरे नहीं हो पाते हैं, जिनकी उम्मीद जनता करती है।

    पिछले चुनाव में दावेदारों के वायदे इस बार भी चुनाव में दोहराए जाएंगे। क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए सभी प्रमुख पुलों का निर्माण कराने के लिए कहा था, जिसके अंतर्गत 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत से 36 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कराया।

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    गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय की स्थापना कराने के वादों के बीच विवेक के विधायक रहते दियोरिया कलां में 36.35 करोड़ रुपये से मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय की स्वीकृति मिली। साथ ही चार करोड़ से लिलहर सरोवर का सुंदरीकरण, बीसलपुर महाविद्यालय में पीजी ब्लाक की स्थापना के लिए 3.36 करोड़ रुपये से कार्य कराया गया।

    इसके अलावा करोड़ों रुपये से सीसी सड़कों का निर्माण कराने, ग्राम जोगीठेर में आंबेडकर पार्क की स्थापना कराने, ग्राम खांडेपुर में क्रांतिकारियों की स्मारक का निर्माण, नगर के दुबे तालाब का अमृत सरोवर योजना के तहत सुंदरीकरण, मुहल्ला दुबे में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, अर्बन अस्पताल व होम्योपैथिक चिकित्सालय भवन का विस्तारीकरण, तहसील मुख्यालय पर अधिवक्ताओं के बैठने के लिए बरामदे का निर्माण, एक दर्जन गोशालाओं का निर्माण कराया गया।

    वहीं, बरेली और शाहजहांपुर की सीमा स्पर्श करने वाले बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र के तहसील मुख्यालय पर रोडवेज बस स्टैंड नहीं होने से लखीमपुर, बरेली और शाहजहांपुर के साथ ही जिला मुख्यालय तक आने के लोगों को दिक्कत होती है।

    तहसील मुख्यालय पर बस स्टैंड निर्माण की मांग लंबे समय से चल रही है, जबकि तात्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार में गलत स्थान पर बनाया गया रोडवेज बस स्टैंड शो पीस बना हुआ है। अब भी फगुनाई घाट पुल, पुरैनिया राम गुलाम व गझाड़ा सहित तीन पुलों का निर्माण कार्य होना बाकी है।

    प्राथम‍िकता पर कराया जा रहा काम : व‍िवेक वर्मा

    मैंने जनता से कोई वायदा कर चुनाव नहीं जीता है, क्योंकि चुनाव के समय किए गए वायदे झूठे हो जाते हैं। वह काम करने में विश्वास रखते हैं। पूरे पांच वर्ष के कार्यकाल में हर गांव में विकास कराने का प्रयास किया। सड़कों का जाल बिछाया गया। क्षेत्र में आवश्यकता के अनुसार बड़ी संख्या में पुलों का निर्माण कराया।

    गरीब ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास शौचालय, गरीब महिलाओं को निश्शुल्क गैस सिलिंडर सहित तमाम विकास कार्य कराए हैं। मैलानी बंडा, बिलसंडा बीसलपुर भुता होते हुए बरेली तक रेलवे लाइन बिछाई जाने की मांग प्रमुख है, जिसके लिए प्राथमिकता से काम कराया जा रहा है।

    दिव्या गंगवार बोलीं- पानी की टंकियों की तरह शोपीस बना विकास कार्य

    पूर्व सपा प्रत्‍याशी द‍िव्‍या गंगवार ने बोलीं क‍ि भाजपा के शासन काल में पिछले पांच वर्षों में धरातल पर विकास कार्य नहीं हुए हैं, जबकि सरकारी धन का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हुआ। करोड़ों की पानी की टंकियां बनाई गईं, जो शोपीस बनी हैं। गांव-गांव में सड़कों को उखाड़कर डाल दिया गया, जो अभी तक सही नहीं हो पाए हैं।

    गोवंशीय पशुओं की बड़ी समस्या है, जिसका समाधान नहीं हो पाया है। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों का भारी अभाव है। शिक्षा की व्यवस्था लचर है। रोडवेज बस स्टैंड जैसी समस्या का हल नहीं हो पाया है।

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