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    चूका बीच के ट्री-हट और बोटिंग पर मंडराया खतरा! 'डैम सेफ्टी एक्ट' के तहत बड़ी कार्रवाई की तैयारी

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 09:25 PM (IST)

    शारदा सागर बांध की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व से चूका बीच की पर्यटन गतिविधियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। डैम सेफ्टी एक्ट- ...और पढ़ें

    चूका बीच

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    1. - शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता ने डैम सेफ्टी एक्ट का हवाला देकर बांध की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च

    संवाद सहयोगी, कलीनगर (पीलीभीत)। शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता ने डैम सेफ्टी एक्ट-2021 के अनुपालन को लेकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र भेजकर चूका बीच पर संचालित सभी पर्यटन गतिविधियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शारदा सागर एक अंतरराज्यीय एवं अधिसूचित बांध है, जिसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में जलाशय क्षेत्र और रिजर्वायर रिम एरिया में होने वाली प्रत्येक गतिविधि डैम की सुरक्षा मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

    कलीनगर तहसील क्षेत्र में स्थित शारदा सागर डैम शारदा सागर खंड के अधीन आता है। यह टाइगर रिजर्व के जंगलों से सटा हुआ है। टाइगर रिजर्व के प्रमुख पर्यटन स्थल चूका बीच की सुंदरता शारदा डैम से ही देखते बनती है। ऐसे में पर्यटन गतिविधियां होने से सिंचाई विभाग को डैम की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।

    इसी के तहत शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता पीपी गौतम ने टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2018 में चूका बीच पर मोटर बोट संचालन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया था, लेकिन उस समय देश में डैम सेफ्टी एक्ट लागू नहीं था।

    C-473-1-BRL1070-470800

    वर्तमान में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 प्रभावी होने के बाद शारदा सागर बांध सहित सभी अधिसूचित बांधों का संचालन और सुरक्षा विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप की जा रही है। वर्ष 1954 में निर्मित शारदा सागर एक मिट्टी का अंतरराज्यीय बांध है, जिसकी निगरानी भारत सरकार के राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश के राज्य बांध सुरक्षा संगठन द्वारा की जा रही है।

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    ऐसे में बांध के रिजर्वायर रिम एरिया में संचालित होने वाली सभी गतिविधियों का सुरक्षा की दृष्टि से परीक्षण आवश्यक है। चूका बीच पीलीभीत टाइगर रिजर्व का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां ट्री हट, बैम्बू हट, वाटर हट, कैंटीन तथा मोटर बोटिंग जैसी गतिविधियां संचालित होती हैं।

    यह पूरा क्षेत्र शारदा सागर जलाशय के रिजर्वायर रिम एरिया में स्थित है, इसलिए इन गतिविधियों का डैम की सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग से छह बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

    इनमें चूका बीच पर संचालित सभी गतिविधियों का विवरण, जलाशय रिम एरिया से उनकी दूरी, बांध किनारे निर्मित संरचनाओं की संख्या, जलाशय में संचालित मोटर बोटों का विवरण, पर्यटकों एवं रात्रि विश्राम करने वालों का रिकार्ड तथा डैम सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व द्वारा किस प्रकार कार्य किया जाता है।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों के डैम एवं नहरों के निरीक्षण के दौरान कई बार वन विभाग के कर्मचारी वाहनों को रोकते हैं। इस पर आपत्ति जताते हुए प्रभागीय वनाधिकारी से अनुरोध किया गया है कि निरीक्षण के समय सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बिना किसी बाधा के आवागमन सुनिश्चित कराया जाए।

    इसके लिए विभागीय अधिकारियों के सरकारी वाहनों के नंबर भी पत्र के साथ उपलब्ध कराए गए हैं। पत्र के अंत में स्पष्ट किया है कि बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रविधानों का पालन न करना अधिनियम के अध्याय-10 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

    इससे स्पष्ट है कि सिंचाई विभाग अब चूका बीच क्षेत्र में संचालित पर्यटन गतिविधियों को डैम सुरक्षा के मानकों के अनुरूप सुनिश्चित कराने के लिए गंभीरता से कदम उठा रहा है।

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