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    पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जिंदगी और मौत से लड़ रही बाघिन, कान के घाव में पड़े कीड़े; गश्त पर उठे सवाल

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 07:55 PM (GMT+05:30)

    पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गश्त के दौरान एक घायल बाघिन अचेत अवस्था में मिली, जिसके शरीर पर कई गंभीर घाव थे और कान के पास के घाव में कीड़े पड़ गए थे। आपस ...और पढ़ें

    पीलीभीत टाइगर र‍िजर्व में घायल म‍िली बाघ‍िन

    पीलीभीत टाइगर र‍िजर्व में घायल म‍िली बाघ‍िन

    HighLights

    1. बाघ के साथ आपसी संघर्ष की जताई जा रही आशंका, बाघिन की जान बचाने में जुटे पशुचिकित्सक

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के जंगल की गहराई में शनिवार सुबह गश्त पर निकले वनकर्मियों को एक बाघिन अचेत अवस्था में मिली। मामले की जानकारी मिलने पर पशुचिकित्साधिकारी व आला अफसर मौके पर पहुंचे। बाघिन को रेस्क्यू कर मुख्यालय स्थित सेफ-हाउस में रखा गया है। बाघिन के शरीर पर कई दिन पुरानी चोटों के गंभीर घाव मिले हैं। बाघिन की हालत बेहद खराब बताई जा रही है।

    हाल-फिलहाल बाघिन की जान बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, बाघिन की निगरानी के लिए डीएफओ ने अपनी अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी है। हालांकि, बाघिन के मिलने के बाद पीटीआर की मानसूनी गश्त पर भी तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब पांच बजे पीटीआर की माला रेंज में गश्त कर रहे वनकर्मियों को एक बाघिन झाड़ियों में पड़ी नजर आई। वनकर्मियों ने जब करीब जा कर देखा तो एक घायल बाघिन अचेत अवस्था में पड़ी मिली। वनकर्मियों ने वायरलेस के माध्यम पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी।

    मौके पर पहुंचे आला अफसरों के निर्देशों पर पशुचिकित्साधिकारी दक्ष गंगवार की अगुवाई में बाघिन को रेस्क्यू कर पीटीआर स्थित सेफहाउस लाया गया। प्रारंभिक परीक्षण में बाघिन की उम्र करीब आठ वर्ष पाई गई है। बाघिन के शरीर मे कई जगह चोटों के गंभीर घाव हैं।

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    वहीं, बाघिन के कान के समीप का घाव काफी गंभीर है, इस घाव में कीड़े पड़ने की बात सामने आ रही है। चोटों के निशानों के आधार पर ही आपसी संघर्ष को बाघिन के घायल होने के पीछे का कारण माना जा रहा है। बाघिन की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।

    जानकारी के मुताबिक, कई दिन तक शिकार व भोजन न करने के कारण बाघिन का वजन काफी अधिक कम हो गया है। डीएफओ मनीष सिंह ने घायल बाघिन की निगरानी के लिए अपनी अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। बाघिन अभी भी अचेत अवस्था में है, ऐसे में आईवीआरआई बरेली के डाॅ. एम. करीकलन से टेलीफोन के माध्यम से सलाह ली जा रही है।

    बिना ट्रंकुलाइज किए हुई रेस्क्यू

    अचेत अवस्था में मिली इस बाघिन को बिना ट्रेकुलाइज किए ही रेस्क्यू किया गया। उसका इलाज भी अचेत अवस्था में ही जारी है। जानकारी के अनुसार, इस बाघिन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि रेस्क्यू करने से लेकर इलाज के दौरान तक उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

    आठ वर्षीय बाघिन का अन्य बाघिनों की तुलना में उसका वजन एक तिहाई भर रह गया है। ऐसे में इसके कई दिन से भूखे होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। गंभीर हालत को देखते हुए इस बाघिन के इलाज में विशेष एहतियात बरता जा रहा है।

    शरीर में कई चोटों के निशान के बीच बाघिन के कान पर हुआ घाव सबसे अधिक बुरी स्थिति में है। इस घाव में सैकड़ों की संख्या में कीड़े पाए गए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बिल्ली वंशीय प्रजाति के जीवों को हुए घाव में पड़े कीड़ों के उपचार में कैमिकल का प्रयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में नीम स्प्रे या फिर किसी अन्य ईको-फ्रैंडली उपायों से ही इसका इलाज संभव है।

    गश्त पर खड़े हो रहे सवाल, हाथी की गश्त में मिली बाघिन

    बाघिन के इस अवस्था में मिलने के बाद से ही पीटीआर की गश्त व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। बाघिन के घाव व उसकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए जानकार उसके कई दिनों से घायल होने का अनुमान जता रहे हैं।

    इधर, पीटीआर प्रशासन मानसून के दौरान और अधिक निगरानी व गश्त के दावे कर रहा है। ऐसे में गश्त व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। रोजाना सुबह शाम पैदल गश्त के बावजूद भी बाघिन को ट्रेस कैसे नहीं किया जा सका?

    रेंज में वन्यजीवों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी रेंज स्तर पर भी कैसे नहीं पहुची? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो पीटीआर में वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से काफी अहम हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगल के अंदर गहराई में हाथियों की गश्त में बाघिन अचेत अवस्था में मिली।

     

    शनिवार सुबह एक बाघिन के घायल अवस्था में होने की सूचना प्राप्त हुई थी। प्रथमदृष्टया आपसी संघर्ष में बाघिन के घायल होने का अनुमान है। बाघिन को सेफहाउस में रखकर उसका इलाज किया जा रहा है। कानपुर चिड़ियाघर व आइवीआरआइ बरेली के विशेषज्ञों से टेली-कंस्लटेशन लिया जा रहा है। उच्चाधिकारियों को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है।

    - मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर

     

    बाघिन के शरीर में कई स्थानों पर चोट के निशान मिले हैं। कान के समीप हुआ घाव थोड़ा गंभीर स्थिति में है। बाघिन का हर संभव उपचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि बाघिन जल्द स्वस्थ्य हो जाएगी।

    - डाॅ. दक्ष, पशुचिकित्साधिकारी, पीटीआर


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