Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पीलीभीत में बाघों की 'दहशत' से तेंदुए छोड़ रहे जंगल, अब योगी सरकार यहां बना रही देश की खास लेपर्ड सफारी

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 06:30 AM (IST)

    पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण तेंदुए जंगल से बाहर निकल रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। इस समस्या के समाधान और ...और पढ़ें

    पीलीभीत टाइगर रिजर्व में टहलता बाघ और पेड़ पर बैठा तेंदुआ। फाइल फोटो

    पीलीभीत टाइगर रिजर्व में टहलता बाघ और पेड़ पर बैठा तेंदुआ। फाइल फोटो

    HighLights

    1. गोपालपुर के करीब 1700 हेक्टेयर जंगल में लेपर्ड सफारी के प्रयास जारी

    पीयूष दुबे, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) समेत अन्य जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही तेंदुओं ने जंगल के बाहर ठिकाना बनाना शुरू कर दिया। बाघों के डर से टाइगर रिजर्व के जंगल के तेंदुए बाहर की ओर भाग रहे हैं, जहां पर उन्हें शिकार करने में आसानी रहे, लेकिन इससे मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका हो रही है। यही वजह है कि पीलीभीत में लेपर्ड सफारी विकसित करने की घोषणा की गई।

    जहां पर वन विभाग तेंदुओं को सुरक्षित पर्यावास देने की तैयारी कर रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की हरी घास, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता और शाल के जंगल के साथ ही ऊंची-ऊंची घास वन्यजीवों के लिए स्वर्ग साबित हो रही है। इस कारण टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद से अब तक बाघों की संख्या 25 से बढ़कर 80 के करीब पहुंच गई है।

    ये बाघ गणना के परिणाम के बाद स्पष्ट हो जाएगी। वहीं, पीटीआर में 25 से 30 तेंदुए जंगल के अंदर हैं, जबकि 35 से 40 तेंदुए जंगल के बाहर अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। पीटीआर में बाघों की बढ़ती संख्या की वजह से तेंदुओं ने जंगल से बाहर की ओर जाना शुरू कर दिया है।

    पिछले पांच महीने में पीलीभीत टाइगर रिजर्व से नौ तेंदुए बाहर आए, जिन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ा। जंगल के बाहर निकले तीन तेंदुओं की मौत भी हो गई, जिनके कारण अलग-अलग रहे। जबकि कई तेंदुओं को रेस्क्यू कर सामाजिक वानिकी के वन कर्मियों की ओर से जंगल में छोड़ा गया।

    खबरें और भी

    बाहर निकले दो तेंदुओं ने गजरौला के ग्राम दियूरा में किसानों पर हमला कर दिया। किसानों ने किसी तरह संघर्ष कर डंडों से दबाकर एक तेंदुआ पकड़ लिया था। तेंदुए के साथ संघर्ष में पांच किसान घायल हो गए। इस मामले में वन विभाग की ओर से केस काटा गया। तेंदुओं के जंगल से बाहर निकलने से मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका हो जाती है।

    बिजनौर और मुरादाबाद जिले में के कांठ, ठाकुरद्वारा आदि क्षेत्रों की स्थिति भी यही है, जहां पड़ोसी जिलों और राज्यों के टाइगर रिजर्व से भागकर तेंदुए बाहर की ओर जा रहे हैं। मादा तेंदुआ और शावक मिलने से उनके उस क्षेत्र में स्थायी रूप से रहने की पुष्टि हो जाती है।

    इसी कारण प्रदेश में पीलीभीत में लेपर्ड सफारी की घोषणा की गई। जिले में पीलीभीत टाइगर रिजर्व से कुछ दूरी पर स्थित पीलीभीत व शाहजहांपुर के सामाजिक वानिकी के जंगल में लेपर्ड सफारी पार्क करीब 1700 हेक्टेयर के जंगल में तैयार करने की योजना है। इसका प्रोजेक्ट मुख्य वन संरक्षक की ओर से शासन को भेजा जा चुका है।

    जिले में गोपालपुर के करीब 1700 हेक्टेयर जंगल में लेपर्ड सफारी की शासन ने स्वीकृति दे दी है, लेकिन अभी कार्यदायी संस्था तय होने का इंतजार है। इसमें टाइगर रिजर्व से बाहर आने वाले और हमलों में घायल होने वाले तेंदुओं को रखा जाएगा। उनके उपचार एवं पुनर्वास की व्यवस्था होगी।

     

    तेंदुओं के जंगल के बाहर आने से मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है। लेपर्ड सफारी पार्क बनने से सबसे पहले मानव वन्यजीव संघर्ष कम होगा। वन्य जीवों के लिए सफारी पार्क बनने से ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इससे वन्यजीवों के प्रति उनका लगाव बढ़ेगा। इस पर तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।

    - पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक, बरेली जोन


    यह भी पढ़ें- पीलीभीत के 'चूका बीच' पर जाना अब खतरे से खाली नहीं? पार्किंग तक पहुंचे बाघ-भालू, वन विभाग ने उठाया ये बड़ा कदम