पीलीभीत के बाघों को अब नहीं जाना होगा चिड़ियाघर, इंसानी बस्तियों में हमले रोकने के लिए तैयार हुआ 'नया घर'!
प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने पीलीभीत के गोपालपुर में निर्माणाधीन वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणदायी संस्था को एक माह मे ...और पढ़ें

पूरनपुर पहुंचकर वन्यजीव सेंटर का निरीक्षण करती प्रमुख सचिव। जागरण
HighLights
प्रमुख सचिव वन एवं वन्यजीव ने सेंटर का किया निरीक्षण
संवाद सहयोगी, पूरनपुर (पीलीभीत)। गोपालपुर नाम से विकसित सोशल फारेस्ट की जमीन पर निर्माणाधीन वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी ने गहनता से निरीक्षण किया। एक माह में सेंटर तैयार कर वन विभाग को हस्तांतरित करने के निर्माणदायी संस्था को निर्देश दिए। निरीक्षण से खलबली मची रही।
प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश वन एवं पर्यावरण जलवायु परिवर्तन गुरुवार को लखनऊ से सीधे रेस्क्यू सेंटर पहुंची। वहां उन्होंने सेंटर में वन्यजीवों के लिए तैयार हो चुके अस्पताल, क्वारंटाइन जोन, रेस्क्यू सेंटर, पोस्टमार्टम हाउस, शवदाह गृह, बाउंड्रीबाल, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन, लाइट, सुरक्षा व्यवस्था आदि की गहन जांच की।

आवासीय भवन में लाइट, रंगाई पुताई का कार्य होता पाया। जिम्मेदारों से कई जानकार कर एक माह में रेस्क्यू सेंटर को पूरी तरह से तैयार कर संबंधित विभाग को हैंडओवर करने के निर्देश दिए। वह करीब आधा घंटा तक रूकी। इसके बाद मुस्ताफाबाद के लिए रवाना हो गई।
निरीक्षण में वन विभाग की चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन अनुराधा बेमूरी, एफडी पीपी सिंह, डीएफओ पीटीआर मनीष सिंह, डीएफओ सोशल फारेस्ट भरत कुमार डीके, एसडीओ रमेश चौहान, आरओ सोवरन सिंह व संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश मौर्य, अवर अभियंता सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।
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तीन माह पहले ही निकल गया समय
रेस्क्यू सेंटर का एक जनवरी 2023 से निर्माण शुरू हुआ था। सीएनडीएस कार्यदायी संस्था इसका निर्माण कर रही है। करीब 14 करोड़ की लागत से रेस्क्यू सेंटर बनाया जा रहा है। वर्ष 2026 में निर्माण पूरा कर विभाग को हस्तांतरित किया जाना था। लेकिन तीन माह अधिक बीतने को हैं। लेकिन निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसके पीछे निर्माणदायी संस्था की लेट लतीफी मानी जा रही है।
रेस्क्यू बाघ भेजे जा रहे चिड़िया घर
पीटीआर के जंगल से निकलकर बाघ, तेंदुआ आदि वन्यजीव खेतों में विचरण करने लगते हैं। वह नाला, नदी किनारे झाड़ियों और गन्ने के खेतों को सुरक्षित ठिकाना बना लेते हैं। आबादी तक पहुंचकर पशुओं के साथ इंसानों पर हमला कर उन्हें मार डालते हैं। ऐसे बाघों को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाता है या फिर चिड़िया घर भेज दिया जाता है। वर्ष 2022 से अब तक करीब छह बाघ चिड़िया घर भेजे जा चुके हैं।
अभ्यस्त कर जंगल में जाएंगे छोड़े
जंगल से भटक कर मैदानी क्षेत्र में ठिकाना बनाने वाले वन्यजीवों को रेस्क्यू सेंटर पर लगाकर उन्हें अभ्यस्त किया जाएगा। जंगल जैसा माहौल उन्हें मिलेगा। अभ्यस्त होने के बाद उन्हें फिर जंगल में छोड़ा जाएगा, जिससे वह मैदानी क्षेत्रों में नहीं जाएंगे। सबसे खास बात यह है कि बाघ चिड़िया घर जाने से भी बच जाएंगे। विशेषज्ञ उन्हें अभ्यस्त करेंगे।