इलाहाबाद HC का अहम फैसला, मां की मौत के बाद नानी को दी 2 बच्चों की कस्टडी, कहा- पिता से भावनात्मक लगाव नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मां के निधन के बाद दो नाबालिग बच्चों की अंतरिम अभिरक्षा उनकी नानी को सौंप दी। ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट
HighLights
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बच्चों की नानी को अंतरिम कस्टडी सौंपी।
बच्चों का कल्याण सर्वोपरि, पिता से भावनात्मक जुड़ाव नहीं।
पिता को मंदिर में मिलने व वीडियो कॉल का अधिकार।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बीमारी से मां के निधन के बाद दो नाबालिग बच्चों का कल्याण सर्वोपरि मानते हुए उनकी अंतरिम अभिरक्षा (कस्टडी) उनकी नानी को दिए जाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों का पिता से भावनात्मक लगाव नहीं है और जबरन कस्टडी देने से उन्हें मानसिक आघात पहुंच सकता है।
अभिरक्षा के मामलों में बच्चे का कल्याण ही सबसे महत्वपूर्ण है। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने वाराणसी निवासी चिकित्सक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को अपने आदेश में कहा था कि वह बच्चों की राय जानेगा। इसके अनुपालन में बच्चों के मामा उन्हें लेकर पहुंचे।
कोर्ट ने दोनों बच्चों से बातचीत की। कक्षा दो में अध्ययनरत दोनों बच्चों ने बताया कि वे अपनी नानी और मामा के साथ रह रहे हैं तथा वर्तमान माहौल में सहज हैं। बीमारी के दौरान पिता ने उनकी मां की ठीक से देखभाल नहीं की। दोनों ने पिता संग रहने से साफ इनकार कर दिया। नानी ने बताया कि वह विधवा हैं और लगभग 35 हजार रुपये मासिक पारिवारिक पेंशन पाती हैं।
बच्चों का जन्म से ही पालन-पोषण कर रही हैं। उन्होंने बच्चों को पिता के खिलाफ भड़काने के आरोप से इनकार किया। कार्यालय सहायक मामा ने कहा कि वह बच्चों के लालन-पालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पिता चंदौली अस्पताल में जनरल सर्जन हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पत्नी फेफड़े के कैंसर से पीड़ित थीं।
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चेन्नई के अपोलो अस्पताल में 50 लाख रुपये से अधिक खर्च के बावजूद उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने उपेक्षा के आरोपों को नकारते हुए खुद को बच्चों का प्राकृतिक संरक्षक बताया। कोर्ट ने कहा-यद्यपि पिता प्राकृतिक संरक्षक हैं, लेकिन वर्तमान में बच्चों का उनसे कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। इसके विपरीत वे नानी और मामा से गहरे जुड़े हैं। अदालत ने पिता-पुत्र के रिश्तों को सुधारने के लिए भेंट का अधिकार भी तय किया है।
हर रविवार मंदिर में मुलाकात व वीडियो कॉल से बात कर सकेंगे पिता
याची पिता हर रविवार सुबह 10 से शाम छह बजे तक वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में बच्चों से मिल सकेंगे। स्कूल की छुट्टियों में आपसी सहमति से बच्चों को कुछ समय के लिए अपने साथ रख सकेंगे।
शाम छह से रात नौ बजे तक वीडियो कॉल के माध्यम से भी बात कर सकेंगे। नानी और मामा को इसमें कोई बाधा न डालने का निर्देश दिया गया है। मामले की निगरानी के लिए याचिका लंबित रखते हुए अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 तय की गई है।