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सोनभद्र POCSO एक्ट मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से चार आरोपियों को मिली जमानत, नाबालिग से दुष्कर्म मामला

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Updated: Thu, 20 Aug 2026 05:26 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोनभद्र के राबर्ट्सगंज में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में चार आरोपियों को जमानत दे दी है। ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. पीड़िता ने ही एक आरोपित के साथ काम की तलाश में घर छोड़ने का बयान दिया था

  2. राबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र में दर्ज था केस, आरोपित 13 और 18 अप्रैल 2026 से जेल में बंद थे

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म मामले में चार आरोपितों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इनमें सोनी, शिव सिंह उर्फ रामलाल, बिंदु और राहुल कुमार हैं।

बिंदु के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज थी

अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपित बिंदु के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी कि शिकायतकर्ता की पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। बाद में पीड़िता बरामद हुई, जिसने अपने बयान में बताया कि वह स्वयं बिंदु के साथ काम की तलाश में मीरजापुर और फिर आगरा गई थी, जहां दोनों शिव सिंह उर्फ रामलाल और सोनी के घर ठहरे।

नाबालिग से दुष्कर्म व गर्भवती होने का आरोप 

कुछ दिनों बाद बिंदु वापस लौट आई, जबकि सोनी और शिव सिंह पीड़िता को राहुल कुमार के घर ले गए, जहां वह घरेलू सहायिका के रूप में काम करने लगी। आरोप है कि राहुल कुमार ने सोनी और शिव सिंह से पीड़िता को 'खरीदा' और 10 दिन बाद उसके साथ दुष्कर्म शुरू कर दिया, इससे वह गर्भवती हो गई।

बचाव पक्ष के वकीलों की दलील 

बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि पीड़िता ने राहुल कुमार के घर रहने के दौरान उससे प्रेम संबंध स्थापित किया और स्वेच्छा से विवाह कर लिया, जिसके बाद वह गर्भवती हुई। पीड़िता की आयु लगभग 18 वर्ष बताई गई। वादी पक्ष के वकील ने भी राहुल कुमार की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया, क्योंकि दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के मामले का दिया हवाला 

अदालत ने पाया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है, इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के कपिल वाधवान बनाम सीबीआई (2025) तथा हाई कोर्ट के माया तिवारी बनाम यूपी राज्य (2024) मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कोर्ट ने चारों आरोपियों को जमानत देने का निर्णय लिया। आरोपित 13 और 18 अप्रैल 2026 से जेल में बंद थे।

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