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मारपीट के 46 वर्ष पुराने मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग को इलाहाबाद HC से राहत, सजा जेल में भुगती गई अवधि तक सीमित

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Updated: Thu, 20 Aug 2026 05:07 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 46 वर्ष पुराने मारपीट के मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग को राहत दी है। उनकी सजा ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. बिजनौर का मामला, 1980 में जमीन से जुड़े विवाद में मारपीट में दोषी ठहराए गए थे

  2. चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश ने छह अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वर्ष 1980 में जमीन से जुड़े विवाद में हुई मारपीट में दोषी ठहराए गए 90 वर्षीय बुजुर्ग को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सजा जेल में भुगती गई अवधि तक सीमित कर दी है। साथ ही जमानती को तत्काल मुक्त करने का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट में दी गई चुनौती

बिजनौर की चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश ने छह अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 147, 323/149 और 307/149 के तहत दोषी करार देते हुए अलग-अलग सजाएं सुनाई थीं। इनमें अधिकतम सजा एक वर्ष सश्रम कारावास और 200 रुपये जुर्माना था। इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। अपील लंबित रहने के दौरान पांच अपीलार्थियों ठाकुरी, केसरी, लेखा, भगवत सिंह और मेघा का निधन हो गया, जिससे उनकी अपील समाप्त हो गई।

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय 

मामला केवल एकमात्र जीवित अपीलार्थी मंगू के संबंध में सुनवाई योग्य रह गया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह ने अपीलार्थी मंगू के खिलाफ किसी विशेष हथियार से हमला करने या किसी विशिष्ट चोट पहुंचाने का आरोप नहीं लगाया था। कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि मंगू अब उम्र-संबंधी कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने एक वर्ष की सजा घटा कर पहले से भुगती जा चुकी अवधि तक सीमित कर दी।

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