'राशन कार्ड निरस्त करने का रिकार्ड नहीं, बिना नोटिस कार्रवाई अवैध', इलाहाबाद HC का राज्य सरकार को आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना नोटिस और रिकॉर्ड के राशन कार्ड रद्द करने को अवैध बताया है। कोर्ट ने शामली निवासी कलाम सिंह का राशन कार्ड बहाल करने का आदेश ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने राशन कार्ड बहाल करने का निर्देश दिया
खंडपीठ ने 21 मई 2018 के निरस्तीकरण आदेश रद
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस दिए और रिकार्ड के अभाव में राशन कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने शामली निवासी कलाम सिंह का पात्र गृहस्थी राशन कार्ड बहाल करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इन्द्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने 21 मई 2018 के निरस्तीकरण आदेश को रद करते हुए राज्य सरकार को तत्काल राशन कार्ड पुनः जारी करने को कहा। साथ ही पात्र पाए जाने पर अंत्योदय राशन कार्ड देने पर भी विचार करने का निर्देश दिया।
याची के अधिवक्ता का तर्क
याची की ओर से अधिवक्ता आनंद शंकर मिश्र ने दलील दी कि याची अत्यंत गरीब परिवार से है। पिछले 28 वर्षों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत नियमित राशन प्राप्त कर रहा था। उसका पात्र गृहस्थी राशन कार्ड बिना पूर्व सूचना अथवा सुनवाई का अवसर दिए केवल डिस्प्लेसमेंट का आधार बताकर निरस्त कर दिया गया। कहा कि ग्राम प्रधान के प्रमाणपत्र से यह सिद्ध होता है कि याची ने गांव नहीं छोड़ा है। याची ने कई बार अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने के लिए आवेदन और प्रतिनिधित्व भी दिया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
डीएसओ ने राशन कार्ड निरस्त करने का बताया कारण
जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) शामली ने अदालत को बताया कि याची का राशन कार्ड "डिस्प्लेसमेंट" के आधार पर निरस्त किया गया था, लेकिन निरस्तीकरण से संबंधित मूल रिकार्ड और फाइल उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह सत्यापित नहीं किया जा सकता कि कार्ड किस प्रक्रिया से निरस्त किया गया था अथवा याची को कोई अवसर दिया गया था या नहीं। खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह स्पष्ट है कि याची के गांव छोड़ने का कोई आधार नहीं है। रिकार्ड के अभाव में प्रशासन की कार्रवाई टिकाऊ नहीं मानी जा सकती।