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Indian Railways : दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर चिपयाना से PDU के बीच ट्रेनों का टकराना असंभव, अत्याधुनिक तकनीक कवच 4.0 से लैस

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 02 Aug 2026 06:40 PM (IST)

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर 636 रूट किलोमीटर में स्वदेशी 'कवच 4.0' प्रणाली सफलतापूर्वक ...और पढ़ें

दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए  636 किमी तक कवच 4.2 लगाया गया।

दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए 636 किमी तक कवच 4.2 लगाया गया।

HighLights

  1. कवच 4.0 अत्याधुनिक तकनीक से लैस हुआ 636 रूट किलोमीटर का रेल नेटवर्क 

  2. मालगाड़ी के अलावा ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस का ट्रायल भी सफल

  3. यह तकनीक पटरियों, सिग्नल व ट्रेन के इंजन के बीच रेडियो तरंगों से तालमेल बनाती है

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच 4.0' की सफल कमीशनिंग की है। इसके तहत गाजियाबाद के पास स्थित चिपियाना (चिपियाना बुजुर्ग) से पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीडीयू) जंक्शन के बीच 636 रूट किलोमीटर का रेल नेटवर्क अब इस अत्याधुनिक दुर्घटना-रोधी तकनीक से लैस हो चुका है।

दोनों ट्रेनों में स्वत: लग जाएगा ब्रेक

यह तकनीक पटरियों, सिग्नल और ट्रेन के इंजन के बीच 24 घंटे रेडियो तरंगों के जरिए तालमेल बनाए रखती है। यदि गलती से कोई दो ट्रेनें एक ही पटरी पर आमने-सामने आ जाएं या पीछे से एक ही दिशा में चलने लगें, तो ''कवच' बिना किसी मानवीय दखल के दोनों ट्रेनों में अपने आप ब्रेक लगाकर उन्हें सुरक्षित दूरी पर रोक देगा।

लोको पायलट को सिस्टम सीटी बजाकर चेतावनी देगा

अगर लोको पायलट (ड्राइवर) से ध्यान भटकने के कारण कोई लाल सिग्नल छूट जाता है या ट्रेन की स्पीड तय सीमा से ज्यादा होती है, तो सिस्टम पहले सीटी बजाकर चेतावनी देगा। ड्राइवर के एक्शन न लेने पर यह खुद-ब-खुद इमरजेंसी ब्रेक लगा देगा।

कोहरे में भी सुरक्षित सफर व लेट नहीं होंगी ट्रेनें 

ठंड के दिनों में घने कोहरे के कारण जब बाहर कुछ दिखाई नहीं देता, तब यह तकनीक ड्राइवर के केबिन की स्क्रीन पर आगे के सिग्नल की सटीक जानकारी लाइव दिखाती रहेगी। इससे कोहरे में भी सफर सुरक्षित रहेगा और ट्रेनें बेवजह लेट नहीं होंगी।

गाजियाबाद से डीडीयू तक विशेष टैग लगाए गए 

गाजियाबाद से डीडीयू तक 760 किलोमीटर में 636 किलोमीटर हिस्से पर 1,824 विशेष आरएफआइडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टैग लगाए गए हैं। बेहतर रेडियो संचार व्यवस्था के लिए 40 मीटर ऊंचे नए टावर खड़े किए गए हैं और 2×24-कोर बैकबोन आप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है।

ट्रैक पर इन ट्रेनों का ट्रायल सफल

ट्रैक पर परीक्षण के लिए डब्ल्यूएजी-नाइन मालगाड़ी के इंजन, ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के इंजन में कवच लगाय गया, ट्रायल सफल रहा है। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि दिल्ली-हावड़ा उच्च घनत्व रेल कारिडोर पर रेल सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने, परिचालन विश्वसनीयता बढ़ाने तथा उच्च गति से ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

कहां-कहां पूरा हो गया काम?

- मीरजापुर–पीडीडीयू (64 रूट किमी)

-  चिपयाना-टूंडला (175 रूट किमी)

- टूंडला-पनकी धाम (207 रूट किमी)

- कानपुर-प्रयागराज के बीच (स्टेशन को छोड़कर) (190 रूट किमी)

यहां बचा है काम?

- प्रयागराज और कानपुर स्टेशन पर

- प्रयागराज से मीरजापुर के बीच।

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