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    कोडीनयुक्त सीरप मामला : जमानत के लिए पक्षकार ने पहुंच बनाई तो इलाहाबाद HC के न्यायमूर्ति नाराज, सुनवाई से हुए अलग

    By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:48 PM (GMT+05:30)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने कोडीनयुक्त सीरप मामले की जमानत सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। पक्षकार द्वारा संपर्क साधने की कोशिश पर उन ...और पढ़ें

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    HighLights

    1. न्यायमूर्ति कृष्ण पहल सुनवाई से अलग, बताया इतिहास का काला दिन, न्यायिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप

    2. 80 जमानत अर्जियां अन्य पीठ को सुपुर्द करने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति को भेजी पत्रावली

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने जमानत अर्जी पर आदेश जारी करने से पहले स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया। साथ ही अन्य पीठ नामित करने के लिए लगभग 80 अर्जियां मुख्य न्यायमूर्ति को भेजने का आदेश दिया। यह जमानत अर्जियां कोडीन युक्त सीरप मामले में गिरफ्तार आरोपितों की तरफ से दायर की गई हैं। 

    दरअसल पक्षकार ने न्यायमूर्ति से संपर्क करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा- इतिहास का यह काला दिन है। न्याय होना ही नहीं, होते हुए दिखना भी चाहिए। सभी मामलों की सुनवाई अब सात अगस्त 2026 को होगी।

    अदालत में भोला प्रसाद जायसवाल व अन्य की जमानत अर्जी पर गुरुवार को सुबह 10 बजे सुनवाई शुरू होनी थी। याची आरोपितों के वकीलों के साथ ही राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और एजीए (प्रथम) परितोष कुमार मालवीय तथा नितेश श्रीवास्तव उपस्थित थे।

    सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने कहा कि सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रखा जा सकता था, लेकिन बाद में वादकारी पक्षों द्वारा पीठासीन न्यायाधीश तक पहुंच बनाने और संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए गए। अदालत ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए कहा -यह न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो न्यायपालिका में जनता का भरोसा कमजोर होगा।

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    अपने आदेश में न्यायमूर्ति पहल ने कहा- यह घटना अदालत के इतिहास में ‘काला दिन’ है। न्याय होना ही काफी नहीं, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी जरूरी है। अगर फैसला उसी पक्ष के हक में आता जिसका पक्ष सुनवाई में मजबूत लग रहा था तो इससे यह गलत धारणा बन सकती थी कि फैसला बाहरी दबाव में दिया गया। कोर्ट ने वकीलों और वादकारियों को चेतावनी दी कि न्यायिक स्वतंत्रता विशेषाधिकार नहीं बल्कि हर नागरिक को मिला संवैधानिक अधिकार है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश की सख्त निंदा की जानी चाहिए।

    उल्लेखनीय है कि सबसे पहले आरोपियों ने प्राथमिकी रद किए जाने के लिए याचिकाएं दाखिल की थीं, मगर इन याचिकाओं को हाई कोर्ट की तीन अलग अलग खंडपीठों और लखनऊ बेंच की एक खंडपीठ खारिज कर चुकी है। इसके बाद अग्रिम जमानत पाने के लिए अर्जियां दाखिल की गईं। इन अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी किसी भी वादकारी को राहत नहीं मिली और गिरफ्तारियां जारी रहीं। इसके बाद नियमित जमानत के लिए याचिकाएं दाखिल की गई। चार आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं हाई कोर्ट की अलग अलग पीठों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।

    खास-खास

    कफ सीरप कांड : नमकीन के ट्रक में करोड़ों की शीशियां मिली थीं

    - 70 लाेगों की हुई थी गिरफ्तारी

    - 128 एफआईआर दर्ज हुई

    - दुबई तक से जुड़े तार

    मौतें मध्य प्रदेश में, डर पूरे देश में 

    अक्टूबर का महीना था. मध्य प्रदेश में कुछ बच्चों की किडनी खराब होने से मौत की खबरें सामने आ रही थीं। एमपी में हड़कंप मचा था। जांच में पता चला कि इन बच्चों को खांसी आ रही थी और इन्हें कफ सीरप दिया जा रहा था. इसलिए मौतों की वजह कफ सीरप माना जाने लगा। मौतें मध्य प्रदेश में हुईं, लेकिन डर पूरे देश में फैल गया। उसमें एक राज्य यूपी भी था। कफ सीरप की जांच यूपी में भी शुरू हुई। जांच नकली कफ सीरप को लेकर शुरू हुई, लेकिन पता चला कि खेल बहुत बड़ा है.

    असली और नकली कफ सिरप का खेल

    कफ सीरप के मामला दो एंगल से सामने आए। पहला वह जिसमें दूषित कफ सीरप जानलेवा साबित हो रही थी। दूसरा वह कफ सीरप, जिसका इस्तेमाल नशे के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा था

    इन आंकड़ों को भी जानें 

    - 18 अक्टूबर को जनपद सोनभद्र में चेकिंग के दौरान दो कंटेनरों से कुल 1,19,675 शीशी 3.50 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित कफ सीरप की शीशियां बरामद की गई थीं।
    - एक नवंबर को झारखंड के रांची में 134 पेटी में करोड़ों की कुल 13400 अवैध कफ सीरफ की शीशियां बरामद की गई थीं।
    - तीन नवंबर की रात में सोनभद्र पुलिस व गाजियाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में चार ट्रकों से 3.40 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित कफ सीरप तथा 20 लाख फंडिंग की नकदी बरामद की गई थी।
    -17 दिसंबर 2025 को मां कृपा मेडिकल का प्रोपराइटर वाराणसी निवासी सत्यम कुमार गिरफ्तार
    -30 नवंबर को शैली ट्रेडर्स का प्रोपराइटर भोला प्रसाद जायसवाल निवासी वाराणसी वाराणसी को सोनभद्र पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार किया था।

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