इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बंद कमरे में गोकशी पर रासुका रद की, कहा- कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोकशी के आरोपी समीर पर लगी रासुका (NSA) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि गोकशी बंद कमरे में हुई हो और कानून व्यवस्था न बि ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
किसी दंगा-फसाद से कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ी तो रासुका लगाना गलत
कोर्ट ने कहा- गोवध निरोधक अधिनियम में आरोपियों पर चलेगा केस
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोकशी में आरोपित शामली निवासी समीर की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत नजरबंदी को अवैध करार देते हुए रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा, गोवध बंद अंधेरे कमरे में किया गया। इसको लेकर कोई बवाल नहीं हुआ, कानून व्यवस्था की स्थिति नहीं आई,ऐसे में रासुका लगाना सही नहीं है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका हाई कोर्ट में स्वीकार
हालांकि कोर्ट ने कहा कि उप्र मे गो-वध करना कानूनी अपराध है और इसके लिए आपराधिक केस चलेगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा तथा न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार की खंडपीठ ने आरोपित समीर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए की है।
शामली पुलिस ने दर्ज किए थे दो मुकदमे
अभियोजन कथानाक के अनुसार 23 अप्रैल 2025 को शामली पुलिस ने समीर और उसके साथियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गोहत्या निवारण अधिनियम, 1955 तथा शस्त्र अधिनियम के तहत दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे। आरोप था कि उन्होंने घर के अंदर गाय का वध किया।
जिला मजिस्ट्रेट ने नजरबंदी का जारी किया आदेश
पुलिस ने 27 जून 2025 को समीर को गिरफ्तार किया, लेकिन अदालत से जमानत मिलने से पहले ही पुलिस की रिपोर्ट पर जिला मजिस्ट्रेट शामली ने 21 जुलाई 2025 को रासुका के तहत 12 महीने की नजरबंदी का आदेश जारी कर दिया। बाद में राज्य सरकार ने 19 अगस्त 2025 को इस आदेश की पुष्टि भी कर दी।
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न कोई सांप्रदायिक हिंसा, न सार्वजनिक शांति भंग हुई
अदालत ने पाया कि आरोपित घटना चहारदीवारी के भीतर हुई थी, न कि सार्वजनिक स्थान पर। घटना के कारण न कोई सांप्रदायिक हिंसा हुई, न सार्वजनिक शांति भंग हुई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैयाज कुरैशी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जब गोहत्या चहारदीवारी के भीतर और सार्वजनिक नजरों से दूर हो, तो वह "सार्वजनिक व्यवस्था भंग" की श्रेणी में नहीं आती।
कोर्ट ने दिया आदेश
कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि समीर अन्य मामले में वांछित न हो तो तत्काल रिहा किया जाए। कोर्ट का कहना था कि राज्य सरकार अथवा केंद्र सरकार के हलफनामे में यह नहीं कहा गया कि घटना के कारण समाज में तनाव फैला और बवाल हुआ जिसमें कानून व्यवस्था प्रभावित हुई। इसलिए रासुका लगाया गया।