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22 वर्ष पुराने मामले के कारण रोकी गई पेंशन-ग्रेच्युटी को इलाहाबाद HC ने मंजूरी दी, रद किया सरकार का आदेश

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Updated: Fri, 21 Aug 2026 02:37 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मैनपुरी के कुंवर सिंह की 22 साल पुराने मामले के कारण रोकी गई पेंशन और ग्रेच्युटी ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. कोर्ट ने मैनपुरी के कुंवर सिंह की पेंशन और ग्रेच्युटी बहाल करने का आदेश दिया

  2. हाई कोर्ट का संबंधित विभाग को याची को पेंशन-ग्रेच्युटी का भुगतान करने का निर्देश

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मैनपुरी के कुंवर सिंह की पेंशन और ग्रेच्युटी बहाल करने का आदेश दिया है जो पिछले सात वर्षों से रोकी गई थी। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने यह आदेश देते हुए कहा है कि फाइनल रिपोर्ट दाखिल हुए 22 साल से अधिक समय बीत चुका है और पुलिस विवेचना में याची को क्लीनचिट मिल चुकी है। ऐसी स्थिति में केवल इस आधार पर पेंशन और ग्रेच्युटी रोकना उचित नहीं है।

याची के अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर ने बताया कि 2003 में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने 18 जून, 2003 को अंतिम रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें याची को दोषमुक्त बताया गया। इसके बावजूद 16 सितंबर, 2019 के आदेश से पेंशन और ग्रेच्युटी यह कहते हुए रोक दी गई कि आपराधिक मामले के निपटारे के बाद ही ग्रेच्युटी दी जाएगी।

राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ कोई प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल हुई थी अथवा अदालत ने उसे खारिज किया था। थाना कोतवाली मैनपुरी के प्रभारी निरीक्षक ने 27 मार्च के पत्र में बताया कि उक्त आपराधिक मामले के रिकार्ड अदालत में नहीं मिल पा रहे हैं और उन्हें तलाशने की कोशिश जारी है। फाइनल रिपोर्ट स्वीकार हुई या खारिज, इसकी सूचना संबंधित विभाग को कभी नहीं दी गई।

कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के छह सप्ताह के भीतर याची को पेंशन व ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए। साथ ही सेवानिवृत्ति की तारीख से वास्तविक भुगतान तक सात प्रतिशत साधारण ब्याज भी दिया जाय।

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